राजस्थान पंचायत चुनाव में बैलेट पेपर से होंगे पंच-सरपंच के चुनाव

राजस्थान पंचायत चुनाव में बैलेट पेपर से होंगे पंच-सरपंच के चुनाव

राजस्थान के ग्रामीण इलाकों से इस वक्त पंचायत चुनावों को लेकर एक बहुत ही बड़ी और दिलचस्प खबर सामने आ रही है, जो सीधे तौर पर राज्य के करोड़ों मतदाताओं को प्रभावित करने वाली है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा हाल ही में जारी किए गए नए और आधिकारिक दिशा-निर्देशों के अनुसार, आगामी पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों में वार्ड पंच और सरपंच पद के मतदान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम (EVM) के बजाय पारंपरिक तरीके से यानी मतपेटी और बैलेट पेपर (Ballot Paper) के माध्यम से संपन्न कराए जाएंगे। इस महत्वपूर्ण बदलाव के बाद से ही राजनीतिक गलियारों और गांवों की चौपालों पर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है, क्योंकि बैलेट पेपर से चुनाव होने पर पूरी मतदान प्रक्रिया का स्वरूप बिल्कुल अलग नजर आता है। इसके साथ ही महिलाओं के सशक्तिकरण और उनकी राजनीतिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए पंचायती राज संस्थाओं में 50 प्रतिशत का भारी-भरकम आरक्षण लागू कर दिया गया है, जिसके तहत आधे से ज्यादा पदों पर महिला जनप्रतिनिधि ही कमान संभालेंगी। उत्तर प्रदेश सहित अन्य पड़ोसी राज्यों की राजनीतिक गतिविधियों पर नजर रखने वाले विश्लेषक भी राजस्थान के इस अनोखे और बड़े चुनावी पैटर्न पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि जमीनी स्तर पर होने वाले ये चुनाव राज्य की आगामी राजनीतिक दिशा तय करने में सबसे अहम कड़ी माने जाते हैं।

बैलेट पेपर से डाले जाएंगे वोट, पंच और सरपंच पदों के लिए मतपेटी का होगा इस्तेमाल

जब भी चुनाव प्रणाली में ईवीएम से हटकर दोबारा बैलेट पेपर या मतपेटी का जिक्र आता है, तो चुनावी माहौल में एक अलग ही उत्सुकता देखने को मिलती है। निर्वाचन आयोग के स्पष्ट आदेशों के मुताबिक, इस बार के पंचायत चुनावों में ग्राम पंचायत स्तर पर होने वाले सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव पूरी तरह से मतपेटियों (Ballot Boxes) के जरिए ही कराए जाएंगे, हालांकि जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव ईवीएम के जरिए ही संपन्न होंगे। आयोग ने इन मतपत्रों के प्रारूप और उनके रंगों को भी पूरी तरह से तय कर दिया है, जिसमें सरपंच पद के लिए सफेद रंग के मतपत्र और वार्ड पंच के लिए गुलाबी रंग के मतपत्र मुद्रित किए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, मतदाताओं के लिए नोटा (NOTA) का विकल्प भी इन मतपत्रों पर पूरी तरह से उपलब्ध रहेगा, ताकि यदि कोई मतदाता किसी भी उम्मीदवार को योग्य नहीं समझता है, तो वह नोटा के पक्ष में अपना मत दर्ज करा सके। जिला स्तर पर सुरक्षा के कड़े पहरे के बीच निजी और सरकारी प्रेसों में इन मतपत्रों की छपाई का काम युद्धस्तर पर पूरा किया जा रहा है, ताकि मतदान के दिन किसी भी प्रकार की प्रशासनिक असुविधा का सामना न करना पड़े।

महिलाओं को मिला 50 प्रतिशत आरक्षण, त्रिस्तरीय चुनाव में तय होगी आधी आबादी की जोरदार हिस्सेदारी

भारतीय लोकतंत्र और ग्रामीण विकास के इतिहास में महिलाओं की भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिए राजस्थान सरकार और निर्वाचन आयोग ने पंचायतों में 50 प्रतिशत आरक्षण के नियम को पूरी कड़ाई के साथ लागू किया है। हाल ही में निकाली गई आरक्षण की लॉटरी और नियमों के अनुसार, प्रदेशभर की कुल चौदह हजार से अधिक ग्राम पंचायतों में से आधी यानी करीब सात हजार से ज्यादा पंचायतों में केवल महिलाएं ही सरपंच पद की कमान संभालती नजर आएंगी। इसके अलावा जिला प्रमुख और पंचायत समिति प्रधान के पदों पर भी महिलाओं के लिए आधे स्थान आरक्षित किए गए हैं, जिससे ग्रामीण राजनीति की तस्वीर पूरी तरह से बदलती हुई दिखाई दे रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस आरक्षण व्यवस्था से गांवों की महिलाओं में नेतृत्व क्षमता का विकास होगा और वे अपने क्षेत्र के विकास कार्यों में अपनी सक्रिय और सीधी भूमिका निभा सकेंगी। बीकानेर संभाग सहित कई अन्य जिलों में तो महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण और भी अधिक निर्णायक साबित हो रहा है, जहां त्रिस्तरीय चुनावी ढांचे में आधी आबादी का दबदबा स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है।

लगभग 1.69 लाख नए जनप्रतिनिधियों के चयन के लिए चार चरणों में हो सकते हैं मतदान

आगामी पंचायत चुनावों के तहत पूरे राज्य में लगभग 1.69 लाख नए और ऊर्जावान जनप्रतिनिधियों को चुनने की बड़ी प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जिसमें हजारों वार्ड पंच, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य शामिल हैं। चुनाव आयोग द्वारा यह पूरी चुनावी प्रक्रिया तय समय सीमा के भीतर और पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न कराने के निर्देश दिए गए हैं। ग्रामीण मतदाता इस बात को लेकर बेहद उत्साहित हैं कि वे अपने मताधिकार का प्रयोग करके ऐसे ईमानदार और मेहनती प्रतिनिधियों का चुनाव करें जो उनके गांवों में सड़क, पानी, बिजली और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं को सुदृढ़ कर सकें। प्रशासनिक अमला और पुलिस विभाग पूरी तरह से मुस्तैद हो चुका है ताकि आचार संहिता के दायरे में रहकर शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान कराया जा सके।

ग्रामीण लोकतंत्र का महापर्व और भविष्य की राजनीतिक सरगर्मी

संक्षेप में कहें तो राजस्थान के इन पंचायत चुनावों में बैलेट पेपर की वापसी और महिलाओं को मिला 50 प्रतिशत का आरक्षण इसे देश के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण स्थानीय चुनावों में से एक बनाता है। यह चुनाव न केवल गांवों की तस्वीर बदलेंगे, बल्कि भविष्य की राज्य राजनीति के नए समीकरणों की नींव भी रखेंगे।