राजस्थान में पंचायत चुनाव के पहले चरण का प्रचार थमा, अब थिस थाम ली गई धड़कनें

राजस्थान में पंचायत चुनाव के पहले चरण का प्रचार थमा, अब थिस थाम ली गई धड़कनें

राजस्थान की राजनीति के लिहाज से इस वक्त ग्रामीण अंचल से लेकर राजधानी जयपुर तक हलचल काफी तेज हो चुकी है। राज्य में पंचायती राज संस्थाओं के आम चुनावों के तहत पहले चरण का चुनाव प्रचार अब आधिकारिक रूप से थम चुका है। निर्वाचन आयोग के तय दिशा-निर्देशों के अनुसार, चुनाव प्रचार की समय सीमा समाप्त होने के बाद अब प्रत्याशी केवल घर-घर जाकर जनसंपर्क (Door-to-door campaign) ही कर सकेंगे, जबकि किसी भी प्रकार की जनसभा, लाउडस्पीकर के इस्तेमाल या राजनीतिक रैलियों पर पूरी तरह से पाबंदी लग गई है। राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में इस बार का स्थानीय निकाय चुनाव काफी रोमांचक और कड़ा मुकाबला बनता जा रहा है, क्योंकि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। पहले चरण के मतदान की तारीख नजदीक आते ही चुनावी मैदान में उतरे दिग्गजों और प्रत्याशियों की सांसें तेज हो गई हैं। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान संपन्न कराने के लिए तमाम प्रशासनिक और पुलिस अमले को पूरी तरह से मुस्तैद कर दिया गया है। आइए विस्तार से जानते हैं कि पहले चरण के तहत राजस्थान के किन-किन जिलों और क्षेत्रों में मतदान होना है और प्रशासन की तरफ से क्या खास तैयारियां की गई हैं।

पहले चरण के तहत इन प्रमुख जिलों और क्षेत्रों में बिछ चुका है चुनावी बिसात

राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित किए गए चार चरणों के विस्तृत कार्यक्रम के अनुसार, पहले चरण का मतदान प्रक्रिया अब अपने अंतिम और निर्णायक पड़ाव पर पहुंच चुकी है। पहले चरण में प्रदेश के विभिन्न जिलों की चिन्हित पंचायत समितियों और जिला परिषद क्षेत्रों के लिए मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। ग्रामीण मतदाता अपने गांव की सरकार यानी वार्ड पंच, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्यों के भाग्य का फैसला करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। प्रशासनिक रिपोर्ट के मुताबिक, पहले चरण में शामिल जिलों के हर एक मतदान केंद्र पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। संवेदनशील और अतिसंवेदनशील बूथों की खास तौर पर पहचान करके वहां अतिरिक्त पुलिस बल, अर्धसैनिक बलों और माइक्रो ऑब्जर्वर की तैनाती की गई है। चुनाव प्रचार के अंतिम दिन सभी राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों ने अपनी पूरी ताकत झोंकते हुए शक्ति प्रदर्शन किया और मतदाताओं को अपने पक्ष में लुभाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। अब लाउडस्पीकर की आवाजें थमने के बाद उम्मीदवार व्यक्तिगत संपर्क और साइलेंट कैंपेन के जरिए अंतिम दांव चल रहे हैं।

दो अलग-अलग दिनों में होगी वोटिंग, ईवीएम और बैलेट पेपर दोनों का होगा इस्तेमाल

इस बार के राजस्थान पंचायती राज चुनावों की सबसे बड़ी और खास बात यह है कि मतदान की प्रक्रिया को दो अलग-अलग चरणों या दिनों में बांटा गया है, जिससे मतदाताओं और चुनाव अधिकारियों दोनों के लिए व्यवस्था को सुगम बनाया जा सके। नियमों के अनुसार, जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के जरिए वोट डाले जाएंगे, जबकि ग्रामीण स्तर पर पंच और सरपंच पद के चुनाव पारंपरिक मतपत्रों (Ballot Papers) के माध्यम से संपन्न कराए जाएंगे। यही वजह है कि एक ही क्षेत्र के मतदाताओं को अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए अलग-अलग तिथियों पर मतदान केंद्रों तक पहुंचना होगा। चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि मतदान के दौरान पारदर्शिता बनाए रखने के लिए हर केंद्र पर पर्याप्त मात्रा में वीडियोग्राफी और डिजिटल निगरानी की व्यवस्था की गई है। बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांग मतदाताओं के लिए विशेष सहायता केंद्र बनाए गए हैं ताकि उन्हें वोट डालने में किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

जिला प्रशासन और पुलिस विभाग की चाक-चौबंद व्यवस्था, शांतिपूर्ण मतदान की पूरी उम्मीद

चुनाव प्रचार का शोर थमने के बाद अब जिला प्रशासन की असली परीक्षा शुरू हो चुकी है। संबंधित जिलों के जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षकों (SP) ने स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं कि चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करने वाले या माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वाले असामाजिक तत्वों से सख्ती से निपटा जाएगा। प्रचार थमने के बाद क्षेत्र के बाहरी व्यक्तियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को पंचायत सीमा क्षेत्र छोड़ने के निर्देश दिए जा चुके हैं, ताकि निष्पक्षता बरकरार रहे। मतदान दलों को आवश्यक चुनावी सामग्री, ईवीएम मशीनों और मतपत्रों के साथ उनके निर्धारित बूथों के लिए रवाना कर दिया गया है। प्रशासनिक अमला पूरी तरह से सतर्क है और हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है। ग्रामीण इलाकों के मतदाता भी इस बार अपने स्थानीय विकास के मुद्दों, पानी, बिजली और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए अपने मत का प्रयोग करने का मन बना चुके हैं। पहले चरण के इस घमासान के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मतदान के दिन ग्रामीण मतदाता किस प्रत्याशी के सिर पर जीत का सेहरा बांधते हैं।