बीजेपी को कांग्रेस से मिले सिर्फ 0.94 प्रतिशत ज्यादा वोट, जानिए राज्य का पूरा सियासी गणित
राजस्थान के राजनीतिक गलियारों में हाल ही में संपन्न हुए स्थानीय निकाय चुनावों (Rajasthan Nikay Chunav) के परिणामों ने राज्य के दोनों प्रमुख दलों यानी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस (Congress) की नींद उड़ा दी है। चुनाव के बाद सामने आए फाइनल वोट शेयर (Vote Share) के आंकड़ों ने यह साबित कर दिया है कि राजस्थान की राजनीति में मुकाबला कितना ज्यादा रोमांचक और कांटे की टक्कर वाला हो चुका है। निर्वाचन आयोग और राजनीतिक विश्लेषकों द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, इस बार के निकाय चुनावों में सत्ताधारी या सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने वाली बीजेपी को मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के मुकाबले महज 0.94 प्रतिशत ही ज्यादा वोट हासिल हुए हैं। यानी दोनों राष्ट्रीय दलों के बीच वोटों का यह अंतर इतना कम है कि इसे सियासी भाषा में नेकी और पूछ-पूछ या कांटे की टक्कर ही कहा जाएगा। राज्य के शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में हुए इन चुनावों में जनता ने किसी भी एक दल कोतरतरफा बहुमत देने के बजाय दोनों ही पार्टियों को लगभग बराबरी का समर्थन दिया है। इस बेहद मामूली अंतर (Marginal Difference) के सामने आने के बाद से राजनीतिक पंडितों ने राजस्थान के आगामी विधानसभा और बड़े राजनीतिक भविष्य के लिए नए सिरे से कयास लगाने शुरू कर दिए हैं।
राजस्थान की राजनीति हमेशा से दो-दलीय व्यवस्था (Two-Party System) के इर्द-गिर्द घूमती रही है, जहां हर पांच साल पर सत्ता बदलने की पुरानी परंपरा रही है। लेकिन स्थानीय निकाय चुनावों में इस तरह का नजदीकी मुकाबला यह दर्शाता है कि ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों के मतदाता अब बेहद सूझबूझ के साथ अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। बीजेपी ने जहां अपनी जमीनी पकड़ और प्रशासनिक मशीनरी के दम पर बढ़त बनाने की कोशिश की, वहीं कांग्रेस पार्टी ने भी तमाम आंतरिक गुटबाजी और चुनौतियों के बावजूद जबरदस्त वापसी करते हुए बीजेपी को कड़ी टक्कर दी है। 1 प्रतिशत से भी कम वोटों का यह अंतर इस बात का स्पष्ट संकेत है कि आने वाले समय में राजस्थान का राजनीतिक रण किसी भी एक दल के लिए आसान नहीं होने वाला है। आइए विस्तार से समझते हैं कि इस निकाय चुनाव के वोट प्रतिशत का पूरा गणित क्या है और इसका राज्य की आगामी राजनीति पर क्या गहरा प्रभाव पड़ने वाला है।
क्या है राजस्थान निकाय चुनाव का पूरा वोट शेयर गणित और आंकड़े?
सामने आए चुनावी विश्लेषण के अनुसार, राजस्थान के इन स्थानीय निकाय चुनावों में कुल पड़े वैध मतों में से बीजेपी के खाते में लगभग 42 से 43 प्रतिशत वोट आए, जबकि कांग्रेस पार्टी ने भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते हुए लगभग 41 से 42 प्रतिशत वोट हासिल किए। जब दोनों दलों के कुल मतों का सटीक मिलान किया गया, तो यह अंतर मात्र 0.94 प्रतिशत का निकला। इतनी कम मार्जिन से जीत-हार का फैसला होना यह बताता है कि कई वार्डों और सीटों पर हार-जीत का अंतर महज कुछ सौ या दहाई वोटों का ही रहा है। निर्दलीय उम्मीदवारों और अन्य क्षेत्रीय दलों ने भी इन चुनावों में कुछ सीटों पर अच्छा प्रदर्शन करके खेल को और अधिक दिलचस्प बना दिया है।
इस सियासी आंकड़े के क्या हैं गहरे मायने और आगामी चुनावों पर असर?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि निकाय चुनावों के ये नतीजे राज्य के दोनों प्रमुख दलों के लिए एक वेक-अप कॉल (Wake-up Call) की तरह हैं। बीजेपी के लिए यह सोचना जरूरी हो गया है कि शहरी इलाकों में भी अगर मुकाबला इतना कड़ा हो रहा है, तो जमीनी स्तर पर जनता की नाराजगी या मुद्दों को कितनी गंभीरता से लेने की जरूरत है। वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी इस मामूली अंतर से यह आत्मविश्वास हासिल कर सकती है कि राज्य में उसकी जमीन अभी भी उतनी ही मजबूत है जितनी सत्ता में रहते हुए थी। आने वाले दिनों में राजस्थान की राजनीति में इस मामूली वोट मार्जिन को पाटने के लिए दोनों ही दल अपनी रणनीतियों में बड़े बदलाव कर सकते हैं, जिससे राज्य का सियासी पारा और अधिक चढ़ने की पूरी उम्मीद है।