राजस्थान निकाय चुनाव के बीच कांग्रेस चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने फिर लहराया गमछा

राजस्थान निकाय चुनाव के बीच कांग्रेस चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने फिर लहराया गमछा

राजस्थान की सियासत में अपने तीखे बयानों और अनूठे अंदाज के लिए हमेशा सुर्खियों में रहने वाले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने एक बार फिर अपने चिरपरिचित अंदाज से राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। राज्य में इन दिनों नगर निकाय चुनावों का माहौल पूरी तरह से गर्माया हुआ है और तमाम राजनीतिक दल अपनी-अपनी जीत के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। ऐसे वक्त में राजधानी जयपुर के बिरला ऑडिटोरियम में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान कुछ ऐसा देखने को मिला जिसने एक बार फिर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। मंच पर पहुंचते ही डोटासरा ने अपना पुराना और सबसे लोकप्रिय 'गमछा डांस' अंदाज दोहराते हुए हवा में गमछा लहरा दिया। उनके इस अंदाज को देखकर जहां एक तरफ कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह भर गया, वहीं कार्यक्रम में मौजूद विरोधी दल यानी बीजेपी के दिग्गज नेता भी हैरान होकर उन्हें देखते रह गए। निकाय चुनाव के ठीक बीच सामने आए इस वाकये के बाद से प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है और राजनीतिक विश्लेषक इसके अलग-अलग मायने निकालने लगे हैं।

राजधानी जयपुर के एक बड़े कार्यक्रम में दिखा डोटासरा का वही पुराना और जोशीला अंदाज

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जयपुर के प्रतिष्ठित बिरला ऑडिटोरियम में वीर तेजाजी सेना की ओर से 'राष्ट्रीय तेज संवाद' कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस बड़े राजनीतिक और सामाजिक मंच पर प्रदेश के कई दिग्गज नेता और जनप्रतिनिधि मौजूद थे। कार्यक्रम के दौरान जब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की बारी आई, तो उन्होंने अपने संबोधन से पहले ही माहौल को पूरी तरह से एनर्जेटिक बना दिया। उन्होंने अपनी खास शैली का परिचय देते हुए हाथ में गमछा लिया और हवा में लहराते हुए हल्का सा थिरके। उनके इस सिग्नेचर स्टाइल को देखते ही वहां मौजूद समर्थकों ने तालियों और सीटियों से पूरा हॉल गुंजा दिया। मंच पर उनके साथ बैठे बाड़मेर-जैसलमेर के सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल और वरिष्ठ नेता हेमाराम चौधरी समेत तमाम नेता भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए और तालियां बजाकर उनका हौसला बढ़ाया। इस दौरान मुख्य अतिथि या अन्य मेहमानों के रूप में वहां उपस्थित बीजेपी के नेता सुमेधामंद सरस्वती समेत कई अन्य विपक्षी चेहरे भी इस अनोखे नजके को देखकर अछंभित नजर आए।

क्या है इस 'गमछा डांस' का इतिहास और कैसे बन गया राजस्थान की कांग्रेस का सियासी ट्रेडमार्क

राजनीतिक मंचों पर गमछा लहराकर इस तरह का जश्न मनाने की शुरुआत सबसे पहले गोविंद सिंह डोटासरा ने ही की थी। कुछ साल पहले अपने गृह क्षेत्र लक्ष्मणगढ़ में एक चुनावी सभा के दौरान उन्होंने तेजल महाराज के लोकप्रिय गाने पर पहली बार इस अंदाज में गमछा लहराया था, जो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर एक बहुत बड़ा ट्रेंड बन गया। इसके बाद से ही कार्यकर्ताओं की डिमांड पर वे अक्सर रैलियों और सम्मेलनों में इस स्टाइल को दोहराते नजर आते हैं। पिछले लोकसभा चुनावों के दौरान जब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व जैसे मल्लिकार्जुन खरगे और प्रियंका गांधी राजस्थान के दौरे पर आए थे, तब भी डोटासरा के इस अंदाज ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं। जानकारों का मानना है कि चुनाव के समय इस तरह के सांस्कृतिक और लोकप्रिय प्रतीकों का इस्तेमाल करके वे सीधे तौर पर ग्रामीण और युवा मतदाताओं के साथ एक भावनात्मक जुड़ाव पैदा कर लेते हैं, जो पार्टी के लिए जमीनी स्तर पर काफी असरदार साबित होता है।

जब खुद डोटासरा ने समर्थकों को टोकते हुए कहा- यहाँ सिर्फ वीर तेजाजी महाराज के नारे लगाओ

इस पूरे कार्यक्रम के दौरान एक और बात ने सबका दिल जीत लिया जब डोटासरा ने अपनी लोकप्रियता के बीच संयम का परिचय दिया। जैसे ही उन्होंने मंच पर गमछा लहराया, अतिउत्साहित कार्यकर्ताओं ने उनके समर्थन में नारेबाजी शुरू कर दी। स्थिति को भांपते हुए डोटासरा ने तुरंत माइक संभाला और समर्थकों को रोकते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस पवित्र मंच पर उनके व्यक्तिगत नारे लगाने की कोई आवश्यकता नहीं है, यहां केवल और केवल वीर तेजाजी महाराज के जयकारे लगाए जाने चाहिए। उनके इस बयान की वहां मौजूद लोगों ने काफी सराहना की। इसके बाद उन्होंने समाज को पूरी तरह से एकजुट होकर आगे बढ़ने का मजबूत संदेश दिया और अपने चिरपरिचित व्यंग्यबाणों से विपक्षी पार्टियों पर भी राजनीतिक त ंज कसे।

निकाय चुनावों के लिहाज से इस वायरल वीडियो के सियासी मायने और जनता की प्रतिक्रिया

वर्तमान में राजस्थान के कई जिलों में नगर निकाय चुनाव का रण चरम पर है, जहां हर एक सीट को जीतने के लिए सत्ताधारी दल और विपक्ष के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। ऐसे समय में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का यह वीडियो सामने आना इस बात की ओर इशारा करता है कि पार्टी चुनावी मैदान में मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाने के लिए पूरी तरह से आक्रामक मूड में है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है और इस पर लगातार तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। जहां एक तरफ कांग्रेस समर्थक इसे जोश और ऊर्जा का प्रतीक बता रहे हैं, वहीं राजनीतिक विश्लेषक इसे चुनावी मौसम में जनता का ध्यान खींचने का एक बेहतरीन सियासी पैंतरा मान रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि डोटासरा का यह अंदाज निकाय चुनाव के परिणामों पर कितना असर डाल पाता है।