राजस्थान के सरकारी स्कूलों में 76,791 पद खाली, अब पढ़ाई सुधारने के लिए गेस्ट फैकल्टी से होगी शिक्षकों की भरपाई
राजस्थान के सरकारी विद्यालयों में लंबे समय से चल रही शिक्षकों की भारी कमी को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेशभर के स्कूलों में विभिन्न श्रेणियों के कुल 76,791 पद रिक्त पड़े हैं, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा था। इस अकादमिक सत्र में बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए सरकार ने 'विद्यार्थी मित्र' या गेस्ट फैकल्टी के आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति करने का फैसला किया है। शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं, जिससे जल्द ही स्कूलों में खाली पड़े पदों पर अस्थाई शिक्षकों की तैनाती का रास्ता साफ हो गया है।
सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पदों का संकट
राजस्थान के ग्रामीण और शहरी इलाकों के सरकारी विद्यालयों में अध्यापकों की भारी कमी किसी से छिपी नहीं है। चाहे प्राथमिक स्तर के स्कूल हों या फिर उच्च माध्यमिक विद्यालय, विषय अध्यापकों और व्याख्याताओं के हजारों पद खाली होने के कारण नियमित शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा था। अभिभावकों और छात्र संगठनों द्वारा लगातार यह मांग उठाई जा रही थी कि समय रहते इन पदों को भरा जाए ताकि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो। सरकार द्वारा कराई गई हालिया समीक्षा में यह बात सामने आई कि राज्य में कुल 76,791 पद खाली हैं, जिन्हें तुरंत भरने के लिए नियमित भर्तियों के साथ-साथ वैकल्पिक व्यवस्था करना अनिवार्य हो गया था।
गेस्ट फैकल्टी योजना और नए दिशा-निर्देश
इस गंभीर समस्या का तात्कालिक समाधान निकालते हुए भजनलाल सरकार ने राजस्थान के स्कूलों में विद्या संबल योजना या गेस्ट फैकल्टी के माध्यम से शिक्षकों को आमंत्रित करने का निर्णय लिया है। जारी किए गए नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, स्थानीय स्तर पर योग्य और अनुभवी युवाओं या सेवानिवृत्त शिक्षकों को मानदेय के आधार पर पढ़ाया जाएगा। इसके लिए पूरी पारदर्शी प्रक्रिया तय की गई है ताकि केवल मेधावी और पात्रता पूरी करने वाले उम्मीदवारों को ही स्कूलों में पढ़ाने का मौका मिले। स्कूल प्रबंधन समितियों और जिला शिक्षा अधिकारियों को इस प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
विद्यार्थियों की पढ़ाई और बोर्ड परीक्षाओं पर असर
शिक्षकों के अभाव का सबसे बुरा असर नौनिहालों और बोर्ड कक्षाओं (10वीं और 12वीं) के विद्यार्थियों पर पड़ रहा था। कई स्कूलों में गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक ही नहीं थे, जिससे बच्चों का पाठ्यक्रम समय पर पूरा नहीं हो पा रहा था। अब गेस्ट फैकल्टी के रूप में शिक्षकों के आने से कक्षाओं का संचालन नियमित रूप से हो सकेगा। शिक्षाविदों का मानना है कि इस कदम से न केवल पाठ्यक्रम समय पर पूरा होगा, बल्कि ग्रामीण आंचल के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ मिल सकेगा। सरकार के इस निर्णय से छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों ने बड़ी राहत की सांस ली है।
आगे की प्रशासनिक तैयारियां और मॉनिटरिंग
राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि गेस्ट फैकल्टी के जरिए शिक्षकों की नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जाएगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। जिला स्तर के शिक्षा अधिकारियों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के स्कूलों में खाली पदों की वास्तविक स्थिति का आकलन कर समय पर शिक्षकों की व्यवस्था सुनिश्चित करें। इसके साथ ही, शिक्षा विभाग इस पूरी प्रक्रिया की नियमित मॉनिटरिंग भी करेगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि विद्यार्थियों को इसका पूरा और शत-प्रतिशत लाभ मिल सके।