Rajasthan Weather Update : शीतलहर के साथ कोहरे का कहर, 10 जिलों में अलर्ट,31 जनवरी से फिर बिगड़ेगा मिजाज

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 News India Live, Digital Desk: राजस्थान में बारिश और ओलावृष्टि के बाद अब कड़ाके की ठंड का दूसरा दौर शुरू हो गया है। शीतलहर और बर्फीली हवाओं के चलते प्रदेश के कई जिलों में पारा 5 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क गया है। मौसम विज्ञान केंद्र, जयपुर ने गुरुवार को राज्य के 10 जिलों में घने कोहरे का 'येलो अलर्ट' जारी किया है।

पश्चिमी विक्षोभ के गुजरने के बाद उत्तर से आ रही ठंडी हवाओं ने रेगिस्तान में ठिठुरन बढ़ा दी है।

 तापमान का हाल: पाली सबसे ठंडा, सीकर में भारी गिरावट

पिछले 24 घंटों में राजस्थान के तापमान में बड़ा फेरबदल हुआ है:

पाली: बुधवार को प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान रहा, जहाँ न्यूनतम तापमान 5°C से नीचे चला गया।

सीकर: यहाँ ठंड ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। मंगलवार को पारा 9.9°C था, जो बुधवार को गिरकर 4.4°C पर आ गया।

दिन का हाल: घने कोहरे और सर्द हवाओं के कारण अधिकांश शहरों में दिन का अधिकतम तापमान 25°C के नीचे सिमट गया है।

 कोहरा और यातायात: हाईवे पर विजिबिलिटी 30 मीटर

घने कोहरे ने सड़क और रेल यातायात की रफ्तार रोक दी है:

NH-48 (दिल्ली-जयपुर मार्ग): कोटपूतली-बहरोड़ क्षेत्र में गुरुवार सुबह दृश्यता (Visibility) घटकर मात्र 30 मीटर रह गई।

अलवर: यहाँ विजिबिलिटी 60 मीटर दर्ज की गई, जिससे वाहन चालकों को दिन में भी हेडलाइट्स का सहारा लेना पड़ा।

प्रभावित क्षेत्र: श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, झुंझुनूं और बीकानेर बेल्ट में भी कोहरे का घना साया रहा।

????️ आगामी दिनों का पूर्वानुमान: राहत और फिर आफत

मौसम केंद्र के निदेशक राधेश्याम शर्मा के अनुसार, अगले कुछ दिनों का शेड्यूल ऐसा रहेगा:

29 - 30 जनवरी: मौसम मुख्य रूप से साफ रहेगा। हालांकि, बीकानेर, जयपुर और भरतपुर संभाग में सुबह कोहरा रहेगा, लेकिन दोपहर में धूप खिलेगी।

31 जनवरी: एक नया वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (पश्चिमी विक्षोभ) सक्रिय होगा।

1 फरवरी: जयपुर, बीकानेर और भरतपुर संभाग में बादल छाएंगे, हल्की बारिश और ओलावृष्टि की संभावना है।

 किसानों और वाहन चालकों के लिए सलाह

मौसम विभाग ने कोहरे और संभावित ओलावृष्टि को देखते हुए चेतावनी दी है:

वाहन चालक: हाईवे पर फॉग लाइट का प्रयोग करें और गति धीमी रखें।

किसान: 31 जनवरी से होने वाली संभावित बारिश और ओलावृष्टि को देखते हुए फसलों (विशेषकर सरसों और चना) के बचाव के इंतजाम करें।