Rajasthan Assembly : क्या अब विधानसभा में बैठकर जासूसी होगी? - प्राइवेसी पर मंत्री के बयान से राजस्थान में मचा बवाल
News India Live, Digital Desk: राजस्थान विधानसभा में अब कुछ भी 'प्राइवेट' नहीं रहेगा! संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल के एक बयान ने राजस्थान के सियासी और प्रशासनिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। उन्होंने सदन में जो कुछ कहा है, उसे विपक्ष 'प्राइवेसी पर हमला' बता रहा है, वहीं कई अधिकारी और कर्मचारी भी इस बयान से असहज महसूस कर रहे हैं।
मंगलवार को सदन की कार्यवाही के दौरान, मंत्री जोगाराम पटेल ने घोषणा की कि अब से विधानसभा भवन का कोना-कोना, हर गलियारा, हर लॉबी और हर चैम्बर सीसीटीवी कैमरों (CCTV Cameras) की निगरानी में रहेगा।
हर विधायक की लोकेशन रहेगी ट्रैक
लेकिन मामला सिर्फ कैमरों तक ही सीमित नहीं है। मंत्री जी ने इससे भी एक कदम आगे की बात कह डाली। उन्होंने कहा, "अब विधानसभा के अंदर हर विधायक और अधिकारी की लोकेशन को ट्रैक किया जा सकेगा। हमारे पास यह जानकारी होगी कि कौन सा विधायक किस समय सदन में मौजूद है और किस समय कहां है।"
उन्होंने बताया कि इसके लिए विधानसभा अध्यक्ष के कक्ष में एक विशेष कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जहां से पूरे परिसर की 24 घंटे निगरानी की जाएगी।
क्यों पड़ी इस 'जासूसी' की जरूरत? मंत्री जी ने दिया यह तर्क
इस पर विपक्ष के विधायकों ने जब हंगामा किया और इसे 'जासूसी' और 'निजता का हनन' बताया, तो मंत्री जोगाराम पटेल ने सरकार का पक्ष रखते हुए कुछ तर्क दिए। उन्होंने कहा कि यह फैसला सुरक्षा और सदन की गरिमा को बनाए रखने के लिए लिया गया है।
सरकार के तर्क:
- गरिमा: कई बार सदन के अंदर या बाहर लॉबी में ऐसी घटनाएं या नारेबाजी होती है, जो सदन की गरिमा के खिलाफ होती हैं। कैमरों से ऐसी गतिविधियों पर रोक लगेगी।
- जवाबदेही: इससे यह भी पता चल सकेगा कि कौन से विधायक सदन की कार्यवाही में कितनी रुचि ले रहे हैं।
विपक्ष का हमला: "यह लोकतंत्र पर हमला है
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने सरकार के इस कदम को अलोकतांत्रिक और विधायकों के अधिकारों का हनन बताया है। विपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने कहा, "क्या अब सरकार अपने ही विधायकों की जासूसी कराएगी? विधानसभा चर्चा और बहस की जगह है, कोई जेल नहीं है जहां कैदियों पर नजर रखी जाए। यह फैसला विधायकों की प्राइवेसी पर सीधा हमला है और इसे वापस लिया जाना चाहिए।"
इस पूरे विवाद ने राजस्थान की राजनीति में एक नया मुद्दा खड़ा कर दिया है। जहां सरकार इसे सुरक्षा और अनुशासन का मामला बता रही है, वहीं विपक्ष इसे अपनी आवाज को दबाने और हर किसी पर नजर रखने की कोशिश के तौर पर देख रहा है। अब देखना यह है कि यह 'कैमरा कांड' आगे क्या मोड़ लेता है।