Rajasthan Assembly : राजस्थान में गाय बनेगी राज्य माता? विधानसभा में गूंजा मुद्दा, जानें गहलोत सरकार के मंत्री का दो टूक जवाब
News India Live, Digital Desk: राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र के दौरान 'गौवंश' को लेकर एक बार फिर सियासत गर्मा गई है। सदन में विपक्षी विधायकों ने गाय को 'राज्य माता' (State Mother) का दर्जा देने की मांग पुरजोर तरीके से उठाई। इस भावनात्मक और धार्मिक मुद्दे पर सरकार की ओर से आए जवाब ने सदन के भीतर लंबी बहस छेड़ दी है।
सदन में क्यों उठा 'राज्य माता' का मुद्दा?
विधानसभा की कार्यवाही के दौरान प्रश्नकाल और शून्यकाल में गौ संरक्षण का मुद्दा छाया रहा।
विपक्ष की मांग: भारतीय जनता पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के विधायकों ने तर्क दिया कि राजस्थान की संस्कृति और अर्थव्यवस्था में गाय का स्थान सर्वोपरि है। इसे केवल पशु नहीं, बल्कि 'माता' का दर्जा मिलना चाहिए।
लम्पी वायरस का जिक्र: बहस के दौरान पिछले वर्षों में लम्पी वायरस से हुई गायों की मौत और उनके मुआवजे का मुद्दा भी उठा। विधायकों ने मांग की कि 'राज्य माता' घोषित करने से गौवंश के संरक्षण को कानूनी और संवैधानिक मजबूती मिलेगी।
सरकार का जवाब: "भावनाओं का सम्मान, पर प्रक्रिया जटिल"
विपक्ष के तीखे सवालों के बीच पशुपालन मंत्री ने सरकार का पक्ष रखा।
संवैधानिक स्थिति: मंत्री ने कहा कि सरकार गौवंश के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और उनके संरक्षण के लिए लगातार बजट बढ़ा रही है। हालांकि, किसी पशु को 'राज्य माता' जैसे आधिकारिक दर्जे देने के लिए तकनीकी और संवैधानिक प्रक्रियाओं का अध्ययन जरूरी है।
गौशालाओं को अनुदान: सरकार ने गिनाया कि राजस्थान देश का इकलौता राज्य है जहां गौशालाओं को सबसे अधिक अनुदान दिया जा रहा है और नंदी शालाओं का निर्माण कराया जा रहा है।
अगला कदम: सरकार ने फिलहाल इस पर कोई स्पष्ट समय सीमा नहीं दी है, लेकिन यह आश्वासन दिया कि गौवंश की सुरक्षा और कल्याण उनकी प्राथमिकता है।
सियासी गलियारों में चर्चा
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव के करीब आते ही इस तरह के मुद्दे दोनों ही पक्षों के लिए 'वोट बैंक' को साधने का जरिया बनते हैं। जहां विपक्ष इसे हिंदुत्व और आस्था से जोड़ रहा है, वहीं सरकार अपने 'कल्याणकारी कार्यों' के दम पर बचाव कर रही है।