जमशेदपुर में चलते-चलते रुक गया रेलवे का बुलडोजर जानिए दुकानदारों को ऐन वक्त पर कैसे मिली राहत?

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News India Live, Digital Desk : लौहनगरी जमशेदपुर (टाटानगर) में आज सुबह से ही माहौल तनावपूर्ण था। रेलवे स्टेशन के पास और साकची-जुगसलाई जैसे रास्तों पर अतिक्रमण हटाने के लिए रेलवे प्रशासन पूरी तैयारी के साथ पहुंचा था। बड़ी-बड़ी जेसीबी मशीनें और पुलिस बल को देखकर दुकानदारों के पसीने छूट रहे थे। सबकी धड़कनें तेज थीं कि आज उनकी रोजी-रोटी का जरिया यानी उनकी दुकानें जमींदोज हो जाएंगी।

लेकिन, जैसे ही कार्रवाई शुरू होने वाली थी, एक 'ब्रेक' लग गया। रेलवे ने आज का अभियान स्थगित (Postpone) कर दिया है।

आखिर बुलडोजर रुका क्यों?
दुकानदारों और स्थानीय लोगों के मन में यही सवाल है कि सब कुछ तैयार होने के बाद कार्रवाई रोकी क्यों गई? बताया जा रहा है कि इसके पीछे मानवीय पहलू और प्रशासन की दखल मुख्य वजह रही।
जब रेलवे की टीम और आरपीएफ (RPF) मौके पर पहुंचे, तो वहां मौजूद दुकानदारों ने उनसे समय की मांग की। उनका कहना था कि उन्हें अपना सामान हटाने के लिए थोड़ा और वक्त दिया जाए। एकदम से दुकानें टूटने पर उनका लाखों का नुकसान हो जाएगा।

साथ ही, स्थानीय जिला प्रशासन और पुलिस के बीच समन्वय (coordination) को लेकर भी कुछ बातें सामने आईं। मौके पर तनाव को देखते हुए और कानून-व्यवस्था न बिगड़े, इसलिए यह फैसला लिया गया कि अभी फ़िलहाल के लिए कार्रवाई को टाल दिया जाए।

विरोध और मायूसी के बीच आशा
जब बुलडोजर पहुंचा तो कई दुकानदार भावुक हो गए और हाथ जोड़कर अधिकारियों से विनती करने लगे। दुकानदारों का कहना है कि वे सालों से यहां छोटा-मोटा व्यापार करके अपना घर चला रहे हैं। अचानक उन्हें हटा दिया जाएगा तो वे कहां जाएंगे? उनकी गुहार को सुनते हुए फिलहाल उन्हें 'मोहलत' मिल गई है।

खतरा अभी टला नहीं है
राहत जरूर मिली है, लेकिन खतरा खत्म नहीं हुआ है। रेलवे अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि यह कार्रवाई रद्द नहीं हुई है, बस स्थगित हुई है। रेलवे अपनी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए प्रतिबद्ध है। दुकानदारों को इशारा कर दिया गया है कि वे खुद ही अवैध निर्माण हटा लें, वरना अगली बार शायद इतनी रियायत न मिले।

फिलहाल, उन दर्जनों दुकानदारों के चेहरे पर मुस्कान लौट आई है, जिन्हें लग रहा था कि आज उनकी दुकान का आखिरी दिन है