प्यार किया, पर अपना बना न सकीं! जानें क्यों आजीवन कुंवारी रह गईं 'जुबली गर्ल' आशा पारेख, क्या था नासिर हुसैन से वो अधूरा रिश्ता?
60 और 70 के दशक का वो सुनहरा दौर... जब हिंदी सिनेमा के पर्दे पर एक ऐसी अभिनेत्री का राज था, जिसकी आंखें बोलती थीं, जिसका डांस थिरकने पर मजबूर कर देता था, और जिसकी मुस्कान पर लाखों दिल फिदा थे। वो थीं आशा पारेख (Asha Parekh), बॉलीवुड की 'जुबली गर्ल', जिनकी लगभग हर फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सिल्वर जुबली मनाती थी। 'कटी पतंग', 'तीसरी मंजिल', 'लव इन टोक्यो', 'आन मिलो सजना' जैसी अनगिनत सुपरहिट फिल्में देने वाली आशा पारेख ने अपने करियर में सफलता की हर बुलंदी को छुआ।
लेकिन, पर्दे पर हमेशा खुशमिजाज और चुलबुली दिखने वाली इस अदाकारा की असल जिंदगी में एक ऐसी कहानी छिपी थी, जिसमें प्यार तो था, पर मुकम्मल न हो सका। अपने करियर में शिखर पर रहते हुए भी, आशा पारेख ने कभी शादी नहीं की और आजीवन कुंवारी रहीं। आखिर ऐसा क्या हुआ कि लाखों दिलों की धड़कन बनी यह अभिनेत्री अपनी जिंदगी में हमेशा अकेली रह गईं? इसके पीछे की वजह है एक ऐसी प्रेम कहानी, जिसमें मोहब्बत तो थी, पर सामाजिक बंधनों के आगे उसे झुकना पड़ा।
आशा की जिंदगी का 'पहला और आखिरी प्यार' - नासिर हुसैन
यह कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। आशा पारेख की जिंदगी में प्यार बनकर आए थे अपने जमाने के मशहूर फिल्म निर्माता-निर्देशक नासिर हुसैन (Nasir Hussain)। नासिर हुसैन, सुपरस्टार आमिर खान के चाचा थे और उन्होंने 'यादों की बारात', 'हम किसी से कम नहीं', 'तीसरी मंजिल' जैसी कई ब्लॉकबस्टर फिल्में बनाई थीं।
आशा का वो दर्द भरा फैसला - "मैं किसी का घर नहीं तोड़ सकती"
आशा पारेख ने अपनी आत्मकथा 'द हिट गर्ल' (The Hit Girl) में इस रिश्ते को लेकर पहली बार खुलकर बात की थी। उन्होंने स्वीकार किया कि नासिर हुसैन ही एकमात्र ऐसे व्यक्ति थे, जिनसे उन्होंने सच्चा प्यार किया था।
उन्होंने लिखा, "मैंने कभी किसी का घर तोड़ने के बारे में नहीं सोचा। मेरे और नासिर साहब के परिवार के बीच कोई अनबन या कड़वाहट नहीं थी। मैंने उनकी पत्नी और बच्चों का हमेशा सम्मान किया। शायद इसीलिए, मैंने उनसे दूरी बनाए रखना ही सही समझा।"
प्यार के लिए इतना बड़ा त्याग करने का फैसला आसान नहीं था। आशा पारेख नासिर हुसैन की खातिर किसी और से शादी न करने का फैसला किया और अपनी पूरी जिंदगी अकेले ही गुजार दी। नासिर हुसैन के आखिरी समय में भी वह उनसे मिलती रहीं, लेकिन उनका रिश्ता हमेशा एक अनकही मर्यादा में बंधा रहा।
25 की उम्र में बनना चाहती थीं माँ, पर रह गया सपना अधूरा
आशा पारेख ने अपने इंटरव्यू में यह भी खुलासा किया था कि वह हमेशा से माँ बनना चाहती थीं। एक समय था, लगभग 25-26 साल की उम्र में, जब उन्हें मातृत्व का सुख पाने की बहुत तीव्र इच्छा थी। लेकिन, वह शादी के बिना माँ नहीं बनना चाहती थीं, और उनकी शादी का सपना कभी पूरा नहीं हो सका। इसलिए, उनकी यह ख्वाहिश भी हमेशा के लिए एक अधूरी ख्वाहिश ही बनकर रह गई।
आज आशा पारेख अपनी जिंदगी में खुश और संतुष्ट हैं। वह एक शानदार अभिनेत्री के साथ-साथ एक मजबूत और स्वाभिमानी महिला की मिसाल हैं, जिन्होंने अपने उसूलों और सम्मान के लिए अपनी जिंदगी के सबसे बड़े प्यार को भी कुर्बान कर दिया। उनकी यह कहानी मोहब्बत और त्याग की एक ऐसी अनूठी दास्तां ਹੈ, जिसे हमेशा याद रखा जाएगा।