BREAKING:
April 30 2026 01:04 pm

Ganga Expressway : प्रयागराज से मेरठ का सफर अब ट्रेन से भी तेज जानें कैसे यह एक्सप्रेसवे बदल देगा यूपी की रफ्तार

Post

News India Live, Digital Desk : उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढांचे और सड़क कनेक्टिविटी के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित होने जा रहा है। गंगा एक्सप्रेसवे (Ganga Expressway) के निर्माण के साथ ही प्रयागराज से मेरठ के बीच की दूरी और समय में क्रांतिकारी बदलाव आने वाला है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस एक्सप्रेसवे के पूरी तरह चालू होने के बाद सड़क मार्ग से तय किया गया सफर कई एक्सप्रेस ट्रेनों की तुलना में भी कम समय लेगा।

समय की बड़ी बचत: ट्रेन बनाम एक्सप्रेसवे (Time Comparison)

वर्तमान में प्रयागराज और मेरठ के बीच चलने वाली प्रमुख एक्सप्रेस ट्रेनों को यह दूरी तय करने में लगभग 11 से 12 घंटे का समय लगता है।

गंगा एक्सप्रेसवे द्वारा समय: एक्सप्रेसवे के जरिए प्रयागराज से मेरठ की लगभग 594 किलोमीटर की दूरी मात्र 6 से 7 घंटे में तय की जा सकेगी।

रफ्तार: 120 किमी/घंटा की डिजाइन स्पीड के साथ, यह सफर न केवल छोटा होगा बल्कि यात्रियों के लिए बेहद सुगम भी होगा।

गंगा एक्सप्रेसवे: एक नजर में (Key Highlights)

कुल लंबाई: लगभग 594 किलोमीटर।

मुख्य रूट: यह मेरठ के बिजौली गांव से शुरू होकर प्रयागराज के जुदापुर दांडू गांव तक जाएगा।

कवर किए जाने वाले जिले: मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज।

हवाई पट्टी (Airstrip): शाहजहांपुर में आपातकालीन लैंडिंग के लिए एक विशेष हवाई पट्टी का निर्माण भी किया गया है।

आर्थिक और औद्योगिक क्रांति (Economic Impact)

औद्योगिक गलियारा: एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

कृषि को बढ़ावा: पश्चिमी यूपी और पूर्वी यूपी के किसानों के लिए अपनी उपज को बड़ी मंडियों तक पहुँचाना अब आसान और सस्ता हो जाएगा।

पर्यटन: प्रयागराज (संगम नगरी) और मेरठ (ऐतिहासिक शहर) के बीच कनेक्टिविटी बढ़ने से पर्यटन क्षेत्र को भी भारी बढ़ावा मिलेगा।

निर्माण की वर्तमान स्थिति (Status Update 2026)

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य अंतिम चरणों में है और इसके मुख्य हिस्सों को यातायात के लिए खोलने की तैयारी चल रही है। यह उत्तर प्रदेश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे होने के साथ-साथ राज्य की अर्थव्यवस्था को $1 ट्रिलियन बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।