आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कौन सा तुरुप का इक्का चल चुके हैं सीएम

आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कौन सा तुरुप का इक्का चल चुके हैं सीएम

पंजाब की राजनीतिक बिसात पर इन दिनों सियासी दांव-पेंच और रणनीति का एक ऐसा खेल चल रहा है, जो आने वाले समय में देश के सबसे दिलचस्प चुनावी मुकाबलों में से एक साबित होने वाला है. राज्य में जैसे-जैसे विधानसभा चुनावों की तारीखें नजदीक आ रही हैं, वैसे-वैसे तमाम राजनीतिक दलों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की होड़ मच गई है. विपक्षी दल लगातार आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार को घेरने की कोशिश में जुटे हैं और कानून-व्यवस्था तथा प्रशासनिक मुद्दों को लेकर लगातार हमले बोल रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद राजनीतिक विश्लेषकों का यह मानना है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान को सत्ता से उखाड़ फेंकना किसी भी विरोधी दल के लिए आसान खेल नहीं होने वाला है. अपनी खास कार्यशैली, जनता से सीधे जुड़ाव और चुनावी माहौल भांपने की अद्भुत क्षमता के चलते भगवंत मान ने चुनाव से ठीक पहले एक ऐसा मास्टरस्ट्रोक यानी तुरुप का इक्का चल दिया है, जिसने विपक्षी पार्टियों के सारे समीकरणों को उलझा कर रख दिया है. राज्य के कोने-कोने में इस बात की चर्चा है कि 'आप' सरकार ने इस बार जमीनी स्तर पर जनता को साधने के लिए जो नीति अपनाई है, वह चुनावी वैतरणी पार कराने में बेहद कारगर साबित हो सकती है.

मुफ्त बिजली और ग्रामीण विकास के जरिए भगवंत मान ने मजबूत किया अपना सियासी किला

जब से पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार सत्ता में आई है, तब से मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्य के आम और मध्यम वर्गीय परिवारों को ध्यान में रखते हुए कई ऐसे बड़े फैसले लिए हैं जो सीधे तौर पर उनकी जेब को राहत पहुंचाते हैं. पंजाब में घरेलू उपभोक्ताओं को मिलने वाली मुफ्त और रियादती बिजली की योजना ने ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में पार्टी की जड़ें बहुत मजबूत कर दी हैं, जिससे पारंपरिक दलों के वोट बैंक में बड़ी सेंध लगी है. इसके अलावा, राज्यभर में सरकारी स्कूलों के कायाकल्प, 'मोहल्ला क्लीनिक' की तर्ज पर स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और युवाओं को रोजगार देने के लिए पारदर्शिता के साथ उठाये गए कदमों ने आम जनता के बीच सरकार की छवि को काफी ऊंचा उठाया है. विपक्षी पार्टियां भले ही भ्रष्टाचार और अन्य प्रशासनिक मामलों को लेकर सरकार पर लगातार आरोप लगा रही हों, लेकिन मैदानी हकीकत यह है कि जमीनी स्तर पर इन लोकलुभावन और बुनियादी सुविधाओं का लाभ उठाने वाला एक बहुत बड़ा वर्ग ऐसा है जो अभी भी भगवंत मान के नेतृत्व पर अटूट विश्वास बनाए बैठा है.

ग्रामीण मतदाताओं और किसानों के बीच गहरी पैט बनाने का अचूक राजनीतिक दांव

पंजाब की राजनीति में बिना किसानों और ग्रामीण मतदाताओं को साधे कोई भी पार्टी सत्ता के सिंहासन तक नहीं पहुंच सकती है, और इस बात को मुख्यमंत्री भगवंत मान बहुत अच्छी तरह समझते हैं. चुनाव से ठीक पहले सरकार ने कृषि क्षेत्र, सिंचाई सुविधाओं और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास के लिए जिस बड़े पैमाने पर बजट आवंटित किया है और नई योजनाओं की शुरुआत की है, उसने किसानों के बीच एक सकारात्मक संदेश भेजा है. जब भी विपक्षी दल कृषि से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश करते हैं, तो मुख्यमंत्री खुद सामने आकर सीधा संवाद स्थापित करते हैं और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए त्वरित प्रशासनिक कदम उठाते हैं. इसके अलावा, ग्रामीण अंचलों में सड़क संपर्क को बेहतर बनाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए जिस तरह की योजनाएं धरातल पर उतारी गई हैं, उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में आम आदमी पार्टी की पकड़ को और अधिक सुदृढ़ कर दिया है. यही वजह है कि राजनीतिक पंडित अब यह कहने लगे हैं कि भगवंत मान को केवल बयानों के दम पर सत्ता से बेदखल कर पाना विपक्ष के लिए लोहे के चने चबाने जैसा साबित होगा.

विपक्षी दलों के तमाम हमलों और घेराबंदी के बीच 'आप' की नई चुनावी रणनीति

आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस, अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी (BJP) तीनों ही दल अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं और सरकार की कमियों को उजागर करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. हालांकि, इन तमाम राजनीतिक हमलों के बावजूद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने जिस संयम और आक्रामक जनसंपर्क अभियान के साथ अपनी नीतियों का बचाव किया है, उससे यह साफ हो गया है कि वे चुनावी दंगल में मात खाने वाले राजनेताओं में से नहीं हैं. उन्होंने चुनाव से ठीक पहले अपने प्रशासनिक फैसलों और जनहितैषी योजनाओं के जरिए एक ऐसा सुरक्षा चक्र तैयार कर लिया है, जिसे भेदना विपक्षी दलों के लिए एक टेढ़ी खीर साबित हो रहा है. आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि विपक्ष इस मजबूत राजनीतिक किलेबंदी को तोड़ने के लिए कौन सी नई काट ढूंढता है, लेकिन फिलहाल पंजाब के राजनीतिक आसमान पर भगवंत मान का यह तुरुप का इक्का पूरी तरह छाया हुआ है और मुकाबला बेहद रोमांचक मोड़ पर पहुंच चुका है.