गंडक तटबंध की सुरक्षा में लापरवाही पर सम्राट चौधरी सरकार का बड़ा एक्शन

गंडक तटबंध की सुरक्षा में लापरवाही पर सम्राट चौधरी सरकार का बड़ा एक्शन

बिहार में इस समय मानसून और बाढ़ की मार ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर रखा है, जिससे न केवल नदियां उफान पर हैं बल्कि तटबंधों पर भी भारी दबाव बना हुआ है. इस बीच बिहार की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों से एक बहुत बड़ी और सख्त कार्रवाई की खबर सामने आ रही है, जिसने लापरवाह अधिकारियों के खेमे में हड़कंप मचा दिया है. जल संसाधन विभाग और तटबंधों की निगरानी में बरती गई भारी कोताही और लापरवाही को बेहद गंभीरता से लेते हुए सम्राट चौधरी सरकार ने एक कड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है. बाढ़ सुरक्षा के मोर्चे पर ड्यूटी के दौरान गंभीर रूप से लापरवाही बरतने के आरोप में गोपालगंज और छपरा यानी सारण जिलों में तैनात कुल सात वरिष्ठ और मैदानी इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है. सरकार के इस त्वरित और सख्त एक्शन से साफ संदेश चला गया है कि बाढ़ बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की हीला-हवाली या भ्रष्टाचार को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, क्योंकि इससे लाखों लोगों की जान और संपत्ति दांव पर लग जाती है.

गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच तटबंधों पर निगरानी में पाई गई थी भारी कोताही

बिहार में इन दिनों गंडक नदी समेत कई प्रमुख नदियां खतरे के निशान के करीब या उससे ऊपर बह रही हैं, जिसके कारण संवेदनशील तटबंधों की 24 घंटे निगरानी करना जल संसाधन विभाग की सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए. पिछले कुछ दिनों से लगातार मिल रही शिकायतों और स्थानीय ग्रामीणों के विरोध प्रदर्शन के बाद शासन स्तर पर यह बात सामने आई थी कि गोपालगंज और छपरा के कुछ संवेदनशील इलाकों में तटबंधों की मरम्मत और सुरक्षा कार्यों में कागजी खानापूर्ति की जा रही थी. जब उच्च अधिकारियों ने अचानक जमीनी स्तर पर जाकर निरीक्षण किया, तो यह पाया कि संबंधित क्षेत्र के इंजीनियरों ने मानसून से पहले होने वाले सुरक्षात्मक कार्यों और फ्लड फाइटिंग मैटेरियल की उपलब्धता में भारी लापरवाही बरती है. यदि समय रहते इन तटबंधों पर ध्यान नहीं दिया जाता, तो जरा सी चूक से कोई बड़ा बंबंध टूट सकता था और दर्जनों गांवों में भयंकर तबाही मच सकती थी. इसी आंतरिक जांच रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने बिना किसी देरी के इन सातों लापरवाह इंजीनियरों पर गाज गिरा दी है.

सम्राट चौधरी सरकार का कड़ा संदेश: 'जनता की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों को नहीं बख्शा जाएगा'

बिहार के उपमुख्यमंत्री और सरकार में प्रमुख भूमिका निभा रहे सम्राट चौधरी ने इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार और ड्यूटी के प्रति लापरवाही के मामले में पूरी तरह ज़ीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है. सरकार का यह साफ निर्देश है कि बाढ़ सुरक्षा के लिए आवंटित होने वाले बजट और संसाधनों का उपयोग पूरी ईमानदारी और समयबद्धता के साथ होना चाहिए, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में आम जनता को सुरक्षित रखा जा सके. सस्पेंड किए गए सातों इंजीनियरों में गोपालगंज और छपरा कार्यक्षेत्र के विभिन्न स्तरों के अधिकारी शामिल हैं, जिन पर विभागीय अनुशासनहीनता और अपने कर्तव्यों के निर्वहन में विफल रहने का औपचारिक आरोप तय किया गया है. सरकार के इस सख्त प्रशासनिक कदम की स्थानीय जनता और प्रबुद्ध नागरिकों द्वारा जमकर सराहना की जा रही है, क्योंकि उनका मानना है कि जब तक इस तरह की सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक व्यवस्था में बैठे लापरवाह लोग अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं करेंगे.

बाढ़ प्रबंधन और प्रशासनिक चौकसी पर उठ रहे सवालों के बीच सरकार का मजबूत कदम

बिहार हर साल बाढ़ की विभीषिका का सामना करता है, और इसके लिए हर साल सरकार करोड़ों रुपए बाढ़ सुरक्षा और तटबंधों के सुदृढ़ीकरण पर खर्च करती है, इसके बावजूद कई बार जमीनी स्तर पर प्रशासनिक सुस्ती के कारण हालात बेकाबू हो जाते हैं. इस बार सरकार ने मानसून के शुरुआती दौर में ही कड़े तेवर दिखाते हुए यह साबित कर दिया है कि वह किसी भी संभावित आपदा से निपटने के लिए कितनी गंभीर है. जल संसाधन विभाग को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वे राज्य के अन्य सभी संवेदनशील तटबंधों की दोबारा से उच्च स्तरीय जांच करवाएं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं और तो इस तरह की लापरवाही नहीं बरती जा रही है. गोपालगंज और छपरा के इंजीनियरों पर हुई इस कार्रवाई के बाद से पूरे राज्य के इंजीनियरिंग और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है और सभी अधिकारी अब अपने-अपने क्षेत्रों में तटबंधों की निगरानी को लेकर पूरी तरह मुस्तैद हो गए हैं. जनता को उम्मीद है कि इस प्रकार की सख्ती से न केवल बाढ़ के खतरों को समय रहते टाला जा सकेगा, बल्कि सरकारी तंत्र में जवाबदेही की संस्कृति भी मजबूत होगी.