200 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर पिछले 11 दिनों से लगातार डटे हैं 82 और 72 साल के दो बुजुर्ग, प्रशासन और पुलिस के उड़े होश

200 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर पिछले 11 दिनों से लगातार डटे हैं 82 और 72 साल के दो बुजुर्ग, प्रशासन और पुलिस के उड़े होश

पंजाब के पठानकोट जिले से एक ऐसा हैरान करने वाला और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसे सुनकर हर कोई अचंभित है। जहाँ आज के दौर में लोग छोटी-छोटी परेशानियों से घबरा जाते हैं, वहीं पठानकोट में न्याय की आस में दो ऐसे बुजुर्गों ने मोर्चा संभाल रखा है जिनकी उम्र देखकर हर कोई हैरान है। यहाँ लगभग 82 वर्ष और 72 वर्ष की उम्र के दो बुजुर्ग पिछले 11 दिनों से आसमान चूमते करीब 200 फीट ऊंचे मोबाइल टॉवर पर अनशन और धरने पर बैठे हुए हैं। कड़ाके की धूप, सर्द हवाएं और उम्र के इस पड़ाव पर शारीरिक कमजोरियों को दरकिनार करते हुए इन दोनों बुजुर्गों ने अपनी मांगों के समर्थन में ऐसा सख्त कदम उठाया है कि जिला प्रशासन, पुलिस और स्थानीय अधिकारियों के होश उड़े हुए हैं। जमीन पर नीचे खड़े परिवारवाले और समर्थक लगातार उनकी सलामती की दुआ मांग रहे हैं, लेकिन बुजुर्ग अपनी जिद पर अड़े हैं कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे टावर से नीचे कदम नहीं रखेंगे।

आखिर क्या है पूरा मामला और क्यों जमीन के इस विवाद ने ले लिया इतना बड़ा रूप

इस अनोखे और खतरनाक प्रदर्शन के पीछे की कहानी लंबी और प्रशासनिक लापरवाही की एक दास्तान है। पीड़ित बुजुर्गों का आरोप है कि उनकी पुश्तैनी और मालिकाना हक वाली जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है, और स्थानीय प्रशासन तथा संबंधित विभागों के चक्कर काट-काटकर उनके जूते घिस चुके हैं, लेकिन किसी भी स्तर पर उनकी सुनवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि सरकारी फाइलों में धूल फांक रही उनकी शिकायतों पर जब कोई ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं हुई, तो मजबूर होकर उन्हें अपनी आवाज ऊपर तक पहुंचाने के लिए इस खतरनाक रास्ते को चुनना पड़ा। उम्र के इस पड़ाव पर जहाँ लोगों को आराम और सुकून की जरूरत होती है, वहाँ ये दोनों बुजुर्ग न्याय की भीख मांगते हुए 200 फीट की ऊंचाई पर बिना खाए-पिए जीवन की बाजी लगाकर बैठे हैं। इस घटना ने पूरे पंजाब में सनसनी फैला दी है और स्थानीय प्रशासन के निकम्मेपन पर भी सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

स्वास्थ्य बिगड़ने के बावजूद पीछे हटने को तैयार नहीं बुजुर्ग, प्रशासन लगातार कर रहा मनाने की कोशिश

पिछले 11 दिनों से लगातार टावर पर बैठे होने के कारण दोनों बुजुर्गों की शारीरिक स्थिति अब तेजी से बिगड़ने लगी है। जमीन पर मौजूद डॉक्टरों की टीम और मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक, लगातार भूखे रहने और खुले आसमान के नीचे रहने से उनका ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल बेहद खतरनाक स्तर तक नीचे आ चुका है, जिससे किसी भी अनहोनी की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंच चुकी हैं और लगातार इन बुजुर्गों को नीचे उतारने के लिए मिन्नतें कर रही हैं। अधिकारियों द्वारा उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने और उचित जांच कराने का भरोसा भी दिलाया जा रहा है, लेकिन बुजुर्गों का साफ कहना है कि वे मौखिक आश्वासनों पर अब भरोसा नहीं करेंगे, बल्कि जब तक लिखित और ठोस कार्रवाई जमीन पर नहीं दिखती, उनका यह संघर्ष जारी रहेगा।

परिवार की चिंताएं और स्थानीय लोगों का भारी समर्थन, कब निकलेगा इस अनोखे प्रदर्शन का हल

इस घटना के बाद से पठानकोट के उस इलाके में भारी भीड़ जमा हो गई है और हर कोई इन बुजुर्गों के जज्बे के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंतित है। बुजुर्गों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे लगातार प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं कि किसी तरह उनके बुजुर्गों की जान बचाई जाए और उनकी जायज मांगों को तुरंत पूरा किया जाए। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का भी इन बुजुर्गों को भरपूर समर्थन मिल रहा है, जो प्रशासन की कार्यशैली के खिलाफ रोष प्रकट कर रहे हैं। एक तरफ जहाँ न्याय पाने के लिए इस प्रकार की जिद प्रशासनिक व्यवस्था पर एक बड़ा तमाचा है, वहीं दूसरी तरफ यह इस बात का भी प्रमाण है कि जब आम आदमी का सिस्टम से भरोसा उठ जाता है, तो वह अपनी जान की परवाह किए बिना भी बगावत करने पर उतर आता है। फिलहाल प्रशासन के बड़े अधिकारी मौके पर डेरा डाले हुए हैं और इस गतिरोध को खत्म करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।