जालंधर में दलित समाज का संपूर्ण बंद, सन्नाटे में डूबे बाजार और भीषण ट्रैफिक जाम में फंसी एंबुलेंस

जालंधर में दलित समाज का संपूर्ण बंद, सन्नाटे में डूबे बाजार और भीषण ट्रैफिक जाम में फंसी एंबुलेंस

पंजाब के प्रमुख औद्योगिक और सांस्कृतिक केंद्र जालंधर शहर से इस समय एक बेहद संवेदनशील और तनावपूर्ण खबर सामने आ रही है, जहाँ बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के अपमान की घटना के विरोध में दलित समाज और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने उग्र प्रदर्शन करते हुए आज जालंधर बंद का आह्वान किया है। इस अचानक बुलाए गए बंद का असर शहर के चप्पे-चप्पे पर साफ तौर पर देखने को मिल रहा है, जहाँ सुबह से ही प्रमुख बाजार, व्यापारिक प्रतिष्ठान और दुकानें पूरी तरह से बंद नजर आ रही हैं। विरोध प्रदर्शनकारियों ने शहर के कई मुख्य चौराहों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर टायर जलाकर और धरने पर बैठकर आवाजाही पूरी तरह से ठप कर दी है, जिसके चलते सड़कों पर गाड़ियों की लंबी-लंबी कतारें लग गई हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल मौके पर मुस्तैद हो चुका है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना या हिंसक झड़प को रोका जा सके और स्थिति को नियंत्रण में लाया जा सके।

#डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा के अपमान से पूरे दलित समाज में है भारी आक्रोश

किसी भी समाज के लिए उनके महापुरुषों और आस्था के केंद्रों का सम्मान सर्वोपरि होता है, और जब जालंधर में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के साथ अपमानजनक कृत्य की खबर फैली, तो पलभर में पूरे इलाके में आग की तरह आक्रोश फैल गया। दलित संगठनों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि असामाजिक तत्वों द्वारा इस प्रकार की नीच हरकतें करके समाज की शांति और आपसी सौहार्द को बिगाड़ने की गहरी साजिश रची जा रही है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। सुबह होते ही सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए और उन्होंने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए आरोपियों की तुरंत और सख्त गिरफ्तारी की मांग उठाई। इस विरोध प्रदर्शन में युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक ने भारी संख्या में हिस्सा लिया और एक स्वर में यह चेतावनी दी कि जब तक दोषियों को बेनकाब करके कानून के शिकंजे में नहीं कसा जाता, तब तक उनका यह संघर्ष और विरोध प्रदर्शन इसी प्रकार जारी रहेगा।

#जालंधर बंद के दौरान सन्नाटे में डूबे बाजार और ठप पड़ी आम जनजीवन की रफ्तार

इस स्वतःस्फूर्त और व्यापक जालंधर बंद के प्रभाव से शहर की अर्थव्यवस्था और रोजमर्रा की रफ्तार पूरी तरह से थम सी गई है। शहर के मशहूर और व्यस्ततम बाजार, जो आम दिनों में ग्राहकों की भीड़ और खरीदारों की चहल-पहल से गुलजार रहते थे, आज पूरी तरह से बंद और वीरान नजर आ रहे हैं। दुकानदारों और व्यापारियों ने भी खुद आगे आकर इस बंद को अपना समर्थन दिया है, जिससे साफ पता चलता है कि इस अपमान की घटना ने हर वर्ग के दिल को ठेस पहुंचाई है। सड़कों पर सार्वजनिक परिवहन के साधन, ऑटो-रिक्शा और निजी वाहन या तो न के बराबर चल रहे हैं या फिर प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए जाम के कारण बीच रास्ते में ही फंसे हुए हैं। स्कूल, कॉलेज और शिक्षण संस्थानों के आसपास भी सन्नाटा पसरा हुआ है क्योंकि अभिभावकों ने सुरक्षा की दृष्टि से बच्चों को घरों से बाहर भेजने से परहेज किया है। शहर के चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल के जवान तैनात हैं जो स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं ताकि कोई भी उपद्रवी तत्व माहौल का फायदा उठाकर कानून व्यवस्था को अपने हाथ में न ले सके।

#प्रदर्शन के बीच फंसे मरीज, भीषण ट्रैफिक जाम में तड़पती रही एंबुलेंस

हर बड़े आंदोलन और विरोध प्रदर्शन का एक कड़वा सच यह होता है कि इसके कारण कई बार आम और बेकसूर नागरिकों को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है, और जालंधर के इस बंद के दौरान भी कुछ ऐसा ही दर्दनाक मंजर देखने को मिला। शहर के मुख्य मार्गों और चौराहों पर भारी ट्रैफिक जाम लग जाने के कारण गंभीर रूप से बीमार मरीजों को ले जा रही एंबुलेंस भी घंटों तक गाड़ियों के रेले में फंसी रही, जिससे मरीजों और उनके परिजनों की सांसें अटकी रहीं। सायरन बजाती हुई एंबुलेंस को निकालने के लिए जब कुछ स्थानीय लोगों और पुलिसकर्मियों ने मशक्कत की, तो किसी तरह रास्ता बनाकर उन्हें अस्पताल तक पहुँचाया गया, लेकिन इस अव्यवस्था ने एक बार फिर से इस बात पर बहस छेड़ दी है कि क्या विरोध प्रदर्शनों के दौरान आपातकालीन सेवाओं को छूट देने के नियमों का कड़ाई से पालन होना चाहिए या नहीं। बहरहाल, प्रशासनिक अधिकारी लगातार विभिन्न संगठनों के नेताओं के साथ बातचीत करने का प्रयास कर रहे हैं ताकि स्थिति को जल्द से जल्द सामान्य किया जा सके और शहर में शांति एवं व्यवस्था बहाल हो सके।