पंजाब में ड्रग्स संकट और भगवंत मान सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल

पंजाब में ड्रग्स संकट और भगवंत मान सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल

उत्तर भारत के सीमावर्ती राज्य पंजाब में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार (डTrugs Racket) का नासूर दिन-प्रतिदिन विकराल रूप धारण करता जा रहा है, जिससे राज्य की युवा पीढ़ी का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है। इसी बीच, पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार और मुख्यमंत्री भगवंत मान की प्रशासनिक क्षमता पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने देश के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक अत्यंत महत्वपूर्ण और कड़ा पत्र लिखा है। इस पत्र में सुनील जाखड़ ने आरोप लगाया है कि पंजाब में ड्रग्स माफिया और अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि राज्य की स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक तंत्र इस संगठित अपराध पर अंकुश लगाने में पूरी तरह से विफल साबित हो रहा है। पंजाब के युवाओं को नशे के दलदल से बचाने और इस अंतरराष्ट्रीय और अंतर-राज्यीय सिंडिकेट की जड़ों तक पहुंचने के लिए अब केंद्रीय जांच एजेंसियों की सीधी दखलंदाजी की सख्त जरूरत आन पड़ी है।

एनआईए (NIA) और ईडी (ED) से जांच की मांग: क्यों पड़ी केंद्रीय एजेंसियों की जरूरत?

सुनील जाखड़ ने अपने पत्र में इस बात पर विशेष जोर दिया है कि पंजाब में फैले इस नशे के अवैध कारोबार के तार केवल स्थानीय तस्करों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसके पीछे बड़े वित्तीय लेन-देन (Money Laundering), हवाला कारोबार और सीमा पार से संचालित होने वाले आतंकी-तस्कर गठजोड़ का हाथ है। जब तक इस पूरे रैकेट की वित्तीय जड़ों और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का पर्दाफाश नहीं किया जाता, तब तक जमीनी स्तर पर ड्रग्स की सप्लाई को रोकना नामुमकिन है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध संपत्तियों की जब्ती में माहिर है, जबकि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़े मामलों की तह तक जाने के लिए जानी जाती है। ऐसे में, यदि इन दोनों केंद्रीय जांच एजेंसियों को पंजाब के ड्रग्स मामलों की जांच सौंपी जाती है, तो इस नेटवर्क को पोषित करने वाले बड़े राजनीतिक और सफेदपोश चेहरों बेनकाब किया जा सकेगा, जिन्हें कथित तौर पर स्थानीय स्तर पर संरक्षण मिल रहा है।

आप सरकार पर निशाना: वादों के उलट पंजाब में तेजी से फैला नशे का जाल

सुनील जाखड़ और विपक्षी दलों का यह आरोप है कि आम आदमी पार्टी ने सत्ता में आने से पहले पंजाब से नशे की समस्या को जड़ से उखाड़ फेंकने के बड़े-बड़े दावे और वादे किए थे, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है। पंजाब के गांवों और शहरों में आज भी सरेआम चिट्ठी, हेरोइन और सिंथेटिक ड्रग्स आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं, जिसके कारण आए दिन नौजवानों की ओवरडोज से मौत की दर्दनाक खबरें सामने आती रहती हैं। राज्य सरकार की लचर प्रशासनिक व्यवस्था और इच्छाशक्ति की कमी के चलते पुलिसिया कार्रवाई केवल छोटे-छोटे तस्करों तक सिमट कर रह गई है, जबकि इस अवैध कारोबार के असली किंगपिन और सिंडिकेट चलाने वाले मास्टरमाइंड कानून की पकड़ से कोसों दूर हैं। इसी प्रशासनिक नाकामी और कानून-व्यवस्था के पतन के कारण आज पंजाब की जनता और राजनीतिक दल केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की गुहार लगाने के लिए मजबूर हो गए हैं।

केंद्रीय गृह मंत्रालय का अगला कदम और पंजाब की सियासत पर असर

सुनील जाखड़ द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखे गए इस पत्र के बाद से पंजाब की सियासत में भूचाल आ गया है। आगामी चुनावों और राज्य की आंतरिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार इस मामले में क्या रुख अपनाती है, इस पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं। यदि गृह मंत्रालय इस मामले का संज्ञान लेते हुए एनआईए और ईडी को पंजाब में ड्रग्स रैकेट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के आदेश देता है, तो इससे राज्य की राजनीति में एक नया और बड़ा भूचाल आना तय माना जा रहा है। जनता भी अब यह चाहती है कि राजनीतिक बयानबाजी से ऊपर उठकर इस गंभीर सामाजिक संकट के खिलाफ ठोस और निर्णायक कार्रवाई हो ताकि पंजाब के नौनिहालों के भविष्य को बचाया जा सके और देवभूमि कहे जाने वाले इस राज्य को नशामुक्त किया जा सके।