संगरूर में केवल सिंह ढिल्लों के काफिले को रोके जाने पर गरमाई पंजाब की सियासत

संगरूर में केवल सिंह ढिल्लों के काफिले को रोके जाने पर गरमाई पंजाब की सियासत

पंजाब के संगरूर जिले में उस समय राजनीतिक तापमान अचानक काफी बढ़ गया जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों (Kewal Singh Dhillon) के काफिले को रोके जाने का मामला सामने आया। यह घटना तब घटी जब भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल संगरूर के दिड़बा क्षेत्र के तूर बंजारा गांव जा रहा था। भाजपा नेताओं का यह दल हाल ही में आत्महत्या करने वाले मजदूर गुलजार सिंह के परिवार से मिलकर उनके प्रति संवेदना व्यक्त करने और उन्हें न्याय दिलाने की मांग को लेकर आगे बढ़ रहा था। इस दौरान रास्ते में उनके वाहनों को रोकने का प्रयास किया गया, जिससे राज्य की कानून-व्यवस्था और राजनीतिक माहौल को लेकर एक बार फिर तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है।

बीजेपी ने लगाया विपक्ष की आवाज दबाने और हमले का गंभीर आरोप

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने इस पूरी घटना को लेकर राज्य की सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर तीखा हमला बोला है। ढिल्लों के साथ इस दौरे पर भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनप्रीत सिंह बादल, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ और अश्वनी शर्मा जैसे कई दिग्गज नेता भी मौजूद थे। ढिल्लों का आरोप है कि उनके काफिले को सुनियोजित तरीके से घेरा गया और यह केवल किसी व्यक्ति विशेष पर नहीं, बल्कि सीधे तौर पर लोकतांत्रिक व्यवस्था और विपक्ष की आवाज को दबाने की घिनौनी कोशिश है। उन्होंने स्थानीय पुलिस प्रशासन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि घटनास्थल से महज कुछ ही दूरी पर पुलिस बल मौजूद होने के बावजूद मूकदर्शक बना रहा। भाजपा नेताओं ने यह भी दावा किया कि जब वे चंडीगढ़ वापस लौट रहे थे, तब भी उनके रास्ते में अवरोध पैदा किए गए, जिसके बाद नेताओं ने गाड़ियों से उतरकर पैदल ही उस रास्ते को पार किया।

आम आदमी पार्टी का पलटवार, कहा- यह स्थानीय लोगों का गुस्सा था

बीजेपी के इन तमाम आरोपों पर आम आदमी पार्टी (AAP) की तरफ से भी तुरंत पलटवार किया गया है। पंजाब सरकार के मंत्री और आप नेताओं ने स्पष्ट किया कि काफिले को रोकने वाले लोग पार्टी के अधिकृत कार्यकर्ता नहीं थे, बल्कि राज्य के आम लोग और पीड़ित परिवार के आसपास के स्थानीय नागरिक थे। आप नेताओं का कहना है कि भाजपा इस संवेदनशील और दुखद मामले को राजनीतिक मंच बनाकर केवल अपनी रोटियां सेकने का प्रयास कर रही है। पार्टी प्रवक्ताओं ने इसे 'लाशों की राजनीति' करार देते हुए कहा कि विपक्षी दल इस तरह के हादसों पर केवल सस्ती लोकप्रियता हासिल करना चाहते हैं, जिसे पंजाब की जनता भली-भांति समझती है और ऐसी ओछी राजनीति को कभी स्वीकार नहीं करेगी।

क्या है पूरा मामला और क्यों सुलग रहा है संगरूर का यह मुद्दा

यह पूरा विवाद मूल रूप से मजदूर गुलजार सिंह की संदिग्ध मौत और आत्महत्या से जुड़ा हुआ है, जिनके बेटे को ड्रग्स की लत थी और वे लगातार इस सामाजिक व प्रशासनिक समस्या के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। गुलजार सिंह की मौत के बाद से ही पंजाब में सियासत उफान पर है और विपक्षी दल लगातार भगवंत मान सरकार को कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर घेर रहे हैं। इस घटना के बाद से राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NSC) ने भी संज्ञान लिया है और पंजाब के प्रशासनिक अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की है। बहरहाल, काफिले को रोके जाने और हंगामे की इस घटना ने आगामी राजनीतिक माहौल को और अधिक गर्मा दिया है तथा आने वाले दिनों में यह मुद्दा पंजाब की राजनीति के केंद्र में रहने वाला है।