post-slider

Punjab Politics: अकाल तख्त बनाम सीएम भगवंत मान, 'पंथ विरोधी' करार दिए जाने के बाद गरमाई पंजाब की सियासत

पंजाब की राजनीति एक बार फिर धर्म और राजनीति के चौराहे पर खड़ी है। श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा मुख्यमंत्री भगवंत मान को 'पंथ विरोधी' और 'गुरु का दोषी' करार दिए जाने के बाद राज्य का सियासी माहौल पूरी तरह बदल गया है। इस घटनाक्रम ने न केवल सीएम मान की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि राज्य के आगामी विधानसभा चुनावों से पहले धार्मिक मुद्दों को एक बार फिर राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है।

अकाल तख्त बनाम सीएम मान: राजनीतिक साज़िश या धार्मिक न्याय

अकाल तख्त के जत्थेदार द्वारा मुख्यमंत्री भगवंत मान पर कार्रवाई के बाद सियासत गरम है। सीएम मान ने इस पूरे प्रकरण को एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश करार दिया है। उनका आरोप है कि उन्हें बदनाम करने के लिए धार्मिक संस्थाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है और वे 'राजनीतिक आकाओं' के इशारे पर निशाना बनाए जा रहे हैं। वहीं, शिरोमणि अकाली दल पर भी लंबे समय से यह आरोप लगते रहे हैं कि वे एसजीपीसी (SGPC) के माध्यम से अकाल तख्त का इस्तेमाल अपने राजनीतिक हितों के लिए करते हैं।

सुखबीर बादल पर कसेगा शिकंजा

धार्मिक मुद्दों के साथ-साथ 2015 की बेअदबी और फरीदकोट के बेहबल कलां में हुई पुलिस फायरिंग का मामला फिर से तूल पकड़ रहा है। दिसंबर 2025 में सुखबीर सिंह बादल द्वारा अपनी गलतियां कबूलने के बाद अब जांच का दायरा बढ़ गया है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह के बयान दर्ज किए हैं, जिससे माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में अकाली दल के शीर्ष नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

क्या फिर दोहराया जाएगा 'बेअदबी' का इतिहास

पंजाब के चुनावी इतिहास को देखें तो 'धार्मिक कार्ड' हमेशा से गेम चेंजर रहा है।

  • 2017 का चुनाव: गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी और बेहबल कलां कांड पर अकाली-भाजपा सरकार को कड़ी आलोचना झेलनी पड़ी थी।

  • 2022 का चुनाव: कांग्रेस के कार्यकाल के दौरान भी यही मुद्दे हावी रहे। सरकार की विफलता के कारण कैप्टन अमरिंदर सिंह को सत्ता से बाहर होना पड़ा था। अब विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर इन्हीं मुद्दों का वापस आना संकेत है कि पंजाब में अगले कुछ महीने धार्मिक और राजनीतिक रस्साकशी के नाम रहेंगे।

विपक्ष का जोरदार हमला, इस्तीफे की मांग

सीएम भगवंत मान को अकाल तख्त द्वारा दोषी घोषित किए जाने के बाद विपक्ष ने हमला तेज कर दिया है। शिरोमणि अकाली दल और अन्य विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री से तत्काल इस्तीफे की मांग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, हर राजनीतिक दल अपने-अपने 'वोट बैंक' को साधने के लिए धर्म के इन पुराने घावों को कुरेदने की कोशिश करेगा। पंजाब की जनता के बीच अब यह बहस तेज हो गई है कि क्या राज्य की राजनीति विकास पर केंद्रित होगी या एक बार फिर भावनाओं के भंवर में फंस जाएगी।

Tags:

Latest Posts