पंजाब सरकार ने मजीठिया मामले की फाइल ED को सौंपी
पंजाब में आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले सूबे की राजनीति में एक बहुत बड़ा भूचाल आ गया है। सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) के नेतृत्व वाली भगवंत मान सरकार ने शिरोमणि अकाली दल (SAD) के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल के भाई बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ कानूनी शिकंजा और कस दिया है। पंजाब विजिलेंस ब्यूरो (VB) ने ड्रग मनी और 736.96 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट और फाइल आधिकारिक तौर पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) को सौंप दी है। पंजाब की राजनीति में इस कदम को बेहद रणनीतिक माना जा रहा है, क्योंकि एक तरफ जहां बीजेपी और अकाली दल के फिर से एक साथ आने और गठबंधन करने की जोरदार चर्चाएं चल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ AAP ने इस संवेदनशील फाइल को केंद्रीय एजेंसी ED को सौंपकर केंद्र की मोदी सरकार और बीजेपी को एक बड़ी सियासी दुविधा में डाल दिया है।
737 करोड़ की ड्रग मनी लॉन्ड्रिंग और शैल कंपनियों का नेटवर्क: विजिलेंस ब्यूरो की रिपोर्ट में क्या है?
पंजाब विजिलेंस ब्यूरो द्वारा ED को भेजी गई आधिकारिक फाइल और सिफारिश पत्र में बिक्रम सिंह मजीठिया को 736.96 करोड़ रुपये के विशालकाय वित्तीय नेटवर्क और मनी लॉन्ड्रिंग सिंडिकेट का 'मास्टरमाइंड' और मुख्य लाभार्थी करार दिया गया है। विजिलेंस जांच के अनुसार, नशे के कारोबार और अवैध लेनदेन से अर्जित की गई इस बेहिसाब रकम को दर्जनों फर्जी (Shell) कंपनियों के जरिए विदेश (साइप्रस और सिंगापुर) भेजा गया और फिर लीगल मनी के रूप में भारत वापस लाया गया। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इस काले धन का इस्तेमाल मजीठिया के करीबियों, रिश्तेदारों, एयरक्राफ्ट, रियल एस्टेट और लग्जरी संपत्तियों को खरीदने में किया गया। पंजाब पुलिस की विजिलेंस विंग ने धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के कड़े प्रावधानों के तहत ED से समानांतर वित्तीय जांच और आरोपी की संपत्तियां जब्त करने की मांग की है।
अकाली-बीजेपी गठबंधन की सुगबुगाहट पर 'आप' का मास्टरस्ट्रोक, बैकफुट पर आई विपक्ष की रणनीति
पंजाब में 2020 के कृषि कानूनों के विरोध में टूटे शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी के गठबंधन को दोबारा जीवित करने के लिए दोनों दलों के शीर्ष नेताओं के बीच पर्दे के पीछे मंथन चल रहा है। ऐसे माहौल में मुख्यमंत्री भगवंत मान का यह कदम सीधा निशाना साधता है। आम आदमी पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि यदि ED इस 737 करोड़ रुपये की ड्रग मनी की फाइल पर तेजी से कार्रवाई करती है, तो बिक्रम मजीठिया की कानूनी मुश्किलें बढ़ेंगी, जिससे अकाली दल की साख को बड़ा झटका लगेगा। वहीं दूसरी ओर, यदि केंद्र सरकार के अधीन काम करने वाली ED इस मामले में ढील बरतती है या कार्रवाई में देरी करती है, तो 'आप' जनता के बीच जाकर यह नैरेटिव सेट करेगी कि बीजेपी और अकाली दल आपस में मिले हुए हैं और बीजेपी नशीले पदार्थों के कथित सौदागरों को राजनीतिक संरक्षण दे रही है।
बिक्रम मजीठिया ने आरोपों को बताया 'राजनीतिक प्रतिशोध', पंजाब में गहराया सियासी घमासान
दूसरी तरफ, अकाली दल के फायरब्रांड नेता बिक्रम सिंह मजीठिया और अकाली दल के आलाकमान ने पंजाब सरकार के इन तमाम आरोपों और ED को फाइल सौंपने की कार्रवाई को पूरी तरह से 'राजनीतिक द्वेष' और 'बदले की कार्रवाई' करार दिया है। मजीठिया का कहना है कि भगवंत मान सरकार अपनी प्रशासनिक नाकामियों, कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति और हाल ही में 'आप' नेताओं के ठिकानों पर हुई केंद्रीय एजेंसियों की छापेमारी से ध्यान भटकाने के लिए पुरानी और खारिज हो चुकी बातों को दोबारा उछाल रही है। बहरहाल, 2027 के चुनावी समर से ठीक पहले मजीठिया की इस फाइल का ED के दफ्तर पहुंचना यह साफ संकेत दे रहा है कि आने वाले दिनों में पंजाब की राजनीति में शह और मात का खेल और भी ज्यादा तीखा और हिंसक मोड़ लेने वाला है।