ड्रग्स के खिलाफ जंग में पंजाब ने अपने अनमोल बेटों को गंवाया
भारत के सीमावर्ती राज्य पंजाब में इन दिनों नशे के काले कारोबार और उसके खिलाफ उठने वाली आवाजों को लेकर माहौल बेहद संवेदनशील बना हुआ है। नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की दर्दनाक हत्या और राज्य में बढ़ते ड्रग्स के साम्राज्य ने एक बार फिर से देश की सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पंजाब के मानसा जिले का दौरा किया और पीड़ित परिवार से मिलकर उन्हें सांत्वना दी। केंद्रीय गृह मंत्री ने इस दौरान पंजाब की जमीनी हकीकत का जिक्र करते हुए बेहद कड़े शब्दों में कहा कि ड्रग्स के खिलाफ इस लंबी और दर्दनाक लड़ाई में पंजाब ने अपने कई होनहार बेटों को खो दिया है, जिसे अब और अधिक सहन नहीं किया जा सकता है। गृह मंत्री ने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री भगवंत मान को इस गंभीर खतरे से निपटने के लिए कड़े प्रशासनिक और कानूनी निर्देश दिए हैं, जिससे पंजाब के राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है।
Amit Shah Visit to Mansa: पीड़ित परिवार से मिले गृह मंत्री, हर संभव न्याय का दिलाया पूरा भरोसा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जब मानसा पहुंचे, तो उन्होंने सबसे पहले शहीद कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा के घर जाकर उनके शोकसंतप्त परिजनों से मुलाकात की और ढांढस बंधाया। परिवार के सदस्यों ने रोते हुए गृह मंत्री को अपनी आपबीती सुनाई और बताया कि कैसे उनके बेटे ने समाज को नशामुक्त बनाने के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी, लेकिन सिस्टम की लापरवाही के कारण आज उन्हें यह दिन देखना पड़ रहा है। गृह मंत्री ने परिवार को आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार और देश की न्याय प्रणाली इस दुख की घड़ी में उनके साथ चट्टान की तरह खड़ी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस हत्याकांड के पीछे जो भी लोग या बड़े चेहरे शामिल हैं, उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और कानून अपना सख्त काम करेगा। परिवार से मिलने के बाद गृह मंत्री के तेवर पूरी तरह सख्त नजर आए और उन्होंने राज्य की कानून व्यवस्था की समीक्षा की।
Central Intervention and CBI Inquiry: केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपी गई कमान, भगवंत मान सरकार को सख्त संदेश
परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड के तूल पकड़ने और लगातार बढ़ते जनआक्रोश के बाद केंद्र सरकार ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई (CBI) जांच के आदेश पहले ही दे दिए थे। गृह मंत्री अमित शाह के दौरे के बाद केंद्रीय एजेंसी ने मानसा पहुंचकर अपनी औपचारिक एफआईआर दर्ज कर ली है और अपनी जांच को तेजी से आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि केंद्र सरकार द्वारा इस तरह सीधे तौर पर दखल देना और केंद्रीय जांच एजेंसी को मैदान में उतारना इस बात का संकेत है कि पंजाब में ड्रग माफियाओं और अपराधियों के गठजोड़ को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। गृह मंत्री ने राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत मान और प्रशासनिक अधिकारियों को दो टूक शब्दों में निर्देश दिया है कि पुलिस और खुफिया तंत्र को पूरी तरह से राजनीति से मुक्त रखकर केवल और केवल नशा तस्करों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करना होगा।
Punjab Drug Menace and Youth Crisis: सीमावर्ती राज्य में नशे का जाल और बर्बाद होती युवा पीढ़ी का दर्द
पंजाब पिछले कई दशकों से ड्रग्स यानी चिट्टा और हेरोइन जैसी खतरनाक नशीली दवाओं के अवैध कारोबार से बुरी तरह जूझ रहा है। राज्य के युवाओं का एक बड़ा हिस्सा इस दलदल में फंसकर अपनी जिंदगी और भविष्य तबाह कर चुका है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम जनता का आरोप है कि छोटे-छोटे तस्कर तो कभी-कभार पकड़े जाते हैं, लेकिन इस पूरे नेक्सस को चलाने वाले बड़े राजनीतिक और सिंडिकेट के चेहरे हमेशा पर्दे के पीछे सुरक्षित रहते हैं। परविंदर सिंह झोटा जैसे युवा जब इस अवैध नेटवर्क के खिलाफ आवाज उठाते हैं और पुलिस-प्रशासन को सबूत देते हैं, तो उन पर हमले किए जाते हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने इसी दर्द को बयां करते हुए कहा कि पंजाब जैसे महान और वीर भूमि वाले राज्य के नौजवानों को ड्रग्स की इस आग में झुलसने से बचाने के लिए केंद्र और राज्य को मिलकर सामूहिक और निर्णायक युद्ध लड़ना होगा।
Future Action Plan against Drug Cartels: ड्रग्स के खात्मे के लिए अब आर-पार की लड़ाई की तैयारी
गृह मंत्री के इस दौरे और कड़े बयानों के बाद पंजाब पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों पर भी दबाव काफी बढ़ गया है। राज्यभर में ड्रग्स के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों को और अधिक तीव्र करने के निर्देश दिए गए हैं। सीमावर्ती इलाकों में ड्रोन के जरिए होने वाली हथियारों और ड्रग्स की तस्करी को रोकने के लिए बीएसएफ (BSF) और राज्य पुलिस के बीच आपसी तालमेल को और ज्यादा मजबूत किया जा रहा है। परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड की सीबीआई जांच के शुरू होने से अब यह उम्मीद भी बंधने लगी है कि इस पूरे मामले के तार कहां-कहां जुड़े हैं, इसका पर्दाफाश जल्द ही सामने आ जाएगा। पंजाब की जनता अब यही चाहती है कि बयानबाजी से ऊपर उठकर धरातल पर ऐसे ठोस कदम उठाए जाएं ताकि भविष्य में किसी और मां को अपना बेटा न खोना पड़े और नशा तस्करों के मन में कानून का खौफ पूरी तरह कायम हो सके।