बेटे सिद्धू मूसेवाला की हुई थी हार, क्या पिता बलकौर लेंगे बदला

बेटे सिद्धू मूसेवाला की हुई थी हार, क्या पिता बलकौर लेंगे बदला

पंजाब में आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक सरगर्मियां अपने चरम पर पहुंच गई हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी द्वारा संगरूर में आयोजित एक विशाल जनसभा के दौरान दिए गए संकेतों के बाद सूबे के सियासी गलियारों में एक नया मोड़ आ गया है। इस रैली के मंच पर पंजाब के चर्चित और दिवंगत पंजाबी गायक शुभदीप सिंह सिद्धू (सिद्धू मूसेवाला) के पिता बलकौर सिंह की विशेष मौजूदगी ने सभी का ध्यान खींचा। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में जहां सिद्धू मूसेवाला की हत्या के मामले में इंसाफ के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया, वहीं उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से यह संकेत भी दे दिए कि पार्टी बलकौर सिंह को चुनावी मैदान में उतारने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इसके बाद से यह सवाल तेजी से उठने लगा है कि क्या 2022 के मानसा विधानसभा चुनाव में बेटे सिद्धू मूसेवाला को मिली हार का राजनीतिक जवाब देने और इंसाफ की लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए बलकौर सिंह खुद चुनावी मैदान में उतरेंगे?

मानसा में बेटे की चुनावी हार और इंसाफ के लिए बलकौर सिंह का लंबा संघर्ष

साल 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में दिवंगत गायक सिद्धू मूसेवाला ने कांग्रेस के टिकट पर मानसा सीट से किस्मत आजमाई थी। हालांकि, उस चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) की लहर के चलते उन्हें डॉक्टर विजय सिंगला के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। उस हार के महज कुछ ही महीनों बाद 29 मई 2022 को मानसा जिले के जवाहरके गांव में सिद्धू मूसेवाला की दिनदिहाड़े अंधाधुंध गोलीबारी करके बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस दुखद घटना के बाद से ही सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह और माता चरण कौर अपने बेटे के लिए न्याय की गुहार लगा रहे हैं। बलकौर सिंह का कहना है कि वे अपने बेटे के हत्यारों और इस साजिश के पीछे छिपे मुख्य मास्टरमाइंड्स को बेनकाब करने तक चुप नहीं बैठेंगे। ऐसे में उनके चुनावी राजनीति में आने के कयासों को न्याय की इसी लड़ाई की अगली कड़ी माना जा रहा है।

संगरूर रैली में राहुल गांधी का संबोधन और बलकौर सिंह को चुनावी मैदान में उतारने का गणित

संगरूर की रैली में राहुल गांधी ने अपने भाषण के दौरान भगवंत मान सरकार और केंद्र की नीतियों पर तीखे हमले बोले। उन्होंने मूसेवाला परिवार के साथ खड़े होने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी सिद्धू मूसेवाला के परिवार को अकेला नहीं छोड़ेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस पंजाब में सिद्धू मूसेवाला की जनप्रिय छवि और उनके प्रशंसकों की भावनाओं को अपने पाले में लाने के लिए बलकौर सिंह को एक मजबूत प्रत्याशी के रूप में देख रही है। संगरूर या बठिंडा लोकसभा क्षेत्र से उनके चुनाव लड़ने की संभावनाओं पर मंथन जारी है। यदि बलकौर सिंह कांग्रेस के मंच से संसद या विधानसभा की दहलीज तक पहुंचने का रास्ता चुनते हैं, तो यह पंजाब की राजनीति में एक बेहद भावनात्मक और रणनीतिक दांव साबित हो सकता है।

आम आदमी पार्टी और विरोधी दलों की बढ़ी बेचैनी, पंजाब में क्या होगा सियासी असर?

बलकौर सिंह के संभावित राजनीतिक पदार्पण की चर्चाओं से सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) और विपक्षी शिरोमणि अकाली दल में भी सुगबुगाहट तेज हो गई है। 'आप' सरकार पर सिद्धू मूसेवाला की सुरक्षा घटाने और फिर उसकी जानकारी लीक करने के आरोप शुरू से लगते रहे हैं। अगर बलकौर सिंह सीधे चुनावी मैदान में उतरकर जनता के बीच अपनी बात रखते हैं, तो इससे सत्ताधारी पार्टी के लिए प्रशासनिक और सुरक्षा तंत्र के मोर्चे पर जवाब देना कठिन हो सकता है। फिलहाल बलकौर सिंह ने सार्वजनिक रूप से कोई अंतिम ऐलान नहीं किया है, लेकिन संगरूर रैली के बाद यह तय माना जा रहा है कि सिद्धू मूसेवाला का नाम और उनके परिवार का संघर्ष पंजाब के आगामी चुनावों का एक बहुत बड़ा केंद्रीय मुद्दा बनने जा रहा है।