ड्रग्स तस्करी मामले में पंजाब पुलिस के पूर्व AIG राजजीत सिंह ने किया सरेंडर
पंजाब की राजनीति और कानून-व्यवस्था से जुड़ी एक बहुत बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है, जहां ड्रग्स और पुलिस-तस्कर गठजोड़ के बहुचर्चित मामले में लंबे समय से फरार चल रहे पंजाब पुलिस के पूर्व एआईजी (AIG) राजजीत सिंह हुंडूर ने आखिरकार अदालत या पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण (सरेंडर) कर दिया है। ड्रग्स तस्करी के इस हाई-प्रोफाइल मामले में पिछले करीब 6 वर्षों से कानून की आंख में धूल झोंक रहे पूर्व पुलिस अधिकारी की इस नाटकीय गिरफ्तारी के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। कभी कानून की रखवाली करने वाली वर्दी पहनने वाले एक सीनियर आईपीएस स्तर के अधिकारी का इस तरह ड्रग्स सिंडिकेट से जुड़ना और फिर गिरफ्तारी से बचने के लिए वर्षों तक छुपते फिरना देश भर के सुरक्षा तंत्र पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर से पंजाब के पुराने और संवेदनशील ड्रग्स नेटवर्क की परतों को खोलकर रख दिया है, जिस पर पूरे राज्य की निगाहें टिकी हुई हैं।
क्या था पूरा ड्रग्स और पुलिस गठजोड़ मामला जिसमें फंसे पूर्व AIG राजजीत सिंह
यह पूरा हाई-प्रोफाइल मामला उस समय उजागर हुआ था जब पंजाब में ड्रग्स तस्करी के एक बड़े नेटवर्क की जांच के दौरान स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने कुछ सनसनीखेज खुलासे किए थे। एसटीएफ की शुरुआती जांच रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी कि राज्य के कई रसूखदार पुलिस अधिकारियों और तस्करों के बीच गहरी मिलीभगत थी, जिसके संरक्षण में अवैध नशीले पदार्थों का कारोबार फल-फूल रहा था। इस पूरे सिंडिकेट में पूर्व एआईजी राजजीत सिंह की भूमिका को बेहद संदिग्ध और मुख्य बताया गया था। आरोप यह था कि उन्होंने तस्करों को बचाने और उनके अवैध कारोबार को फलने-फूलने में मदद करने के एवज में भारी मात्रा में काली कमाई की थी। जैसे ही इस मामले की आंच उन तक पहुंची, वे जांच एजेंसियों की पकड़ से दूर होने के लिए भूमिगत हो गए और अदालत द्वारा उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया गया। पिछले छह सालों से उनकी तलाश में राज्य और केंद्रीय एजेंसियां लगातार दबिश दे रही थीं, लेकिन वे हर बार चकमा देने में कामयाब हो रहे थे।
गिरफ्तारी से बचने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई और आखिरकार सरेंडर करने की मजबूरी
पिछले छह वर्षों के दौरान राजजीत सिंह और उनके वकीलों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए निचली अदालत से लेकर उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय तक कई कानूनी दांव-पेंच आजमाए। उनकी तरफ से लगातार अग्रिम जमानत और मामलों को खारिज कराने की कोशिशें की जाती रहीं, ताकि उन्हें पुलिस हिरासत में न जाना पड़े। हालांकि, अदालत के कड़े रुख और जांच एजेंसियों द्वारा लगातार कसे जा रहे शिकंजे के कारण उनके पास कानूनी विकल्प लगभग समाप्त हो चुके थे। जब उन्हें यह महसूस हुआ कि अब कानून के लंबे हाथों से बचना नामुमकिन है और कभी भी उनकी संपत्ति की जब्ती या और अधिक कठोर कार्रवाई हो सकती है, तो उन्होंने बेहद नाटकीय ढंग से आत्मसमर्पण करने का रास्ता चुना। इस आत्मसमर्पण के बाद अब जांच एजेंसियों को उनसे पूछताछ करने और इस पूरे ड्रग्स रैकेट के अन्य छिपे हुए चेहरों और काले राजों का पर्दाफाश करने का सुनहरा मौका मिल गया है।
पंजाब में ड्रग्स माफिया और खाकी के रिश्ते पर उठते रहे हैं गंभीर सवाल
पंजाब राज्य पिछले कई दशकों से ड्रग्स की समस्या से जूझ रहा है, और इस सामाजिक अभिशाप के खिलाफ कई सरकारें और एजेंसियां लड़ती आई हैं। लेकिन जब पुलिस विभाग के भीतर से ही कोई जिम्मेदार अधिकारी तस्करों का संरक्षक बन जाए, तो आम जनता का सिस्टम पर से भरोसा उठने लगता है। राजजीत सिंह का यह मामला इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है कि कैसे राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण पाकर कुछ भ्रष्ट अधिकारी अपने ही देश और समाज की पीढ़ी को नशे की आग में झोंकने का काम करते हैं। इस गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर से इस बात की मांग जोर पकड़ने लगी है कि ड्रग्स तस्करी से जुड़े जितने भी अन्य सफेदपोश और अधिकारी छिपे हुए हैं, उनके खिलाफ भी बिना किसी देरी के सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी अधिकारी कानून के साथ इस तरह का खिलवाड़ करने की हिम्मत न जुटा सके।
आगामी कानूनी प्रक्रिया और एसआईटी की पूछताछ से खुलने वाले हैं कई बड़े राज
पूर्व एआईजी राजजीत सिंह के सरेंडर करने के बाद अब इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) और अन्य केंद्रीय एजेंसियां पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गई हैं। उन्हें अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया जाएगा ताकि उनसे गहन पूछताछ की जा सके। जांच एजेंसियों का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि इन छह सालों की फरारी के दौरान उन्हें किन-किन लोगों ने शरण दी थी, उनकी आर्थिक मदद किसने की थी और इस ड्रग्स सिंडिकेट के तार देश के बाहर किन-किन बड़े माफियाओं से जुड़े हुए थे। इस पूछताछ में कई और बड़े पुलिस अधिकारियों, नेताओं और कारोबारियों के नाम सामने आने की प्रबल संभावना है। इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी ने पंजाब की कानून-व्यवस्था को एक नया मोड़ दे दिया है और आने वाले दिनों में इस मामले में कई और चौंकाने वाले खुलासे होने की पूरी उम्मीद है।