एलपीयू में लड़कियों की सुरक्षा को लेकर सीजेपी प्रमुख अभिजीत दिपके ने जताई गहरी चिंता

एलपीयू में लड़कियों की सुरक्षा को लेकर सीजेपी प्रमुख अभिजीत दिपके ने जताई गहरी चिंता

देश के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित निजी विश्वविद्यालयों में शुमार लवली प्रोफेशनल University यानी एलपीयू (Lovely Professional University - LPU) परिसर में हाल ही में हुए भारी बवाल और हिंसक घटनाओं के बाद अब चारों तरफ से प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। हाल ही में इस उच्च शिक्षण संस्थान में हुई तोड़फोड़, आगजनी और अफरातफरी के माहौल के बीच अब विभिन्न संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने परिसरों में पढ़ रहे लाखों छात्र-छात्राओं, विशेषकर दूर-दराज से अपनी पढ़ाई पूरी करने आई छात्राओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। इसी कड़ी में सीजेपी (CJP) प्रमुख अभिजीत दिपके (Abhijeet Dipke) ने एलपीयू परिसर में बिगड़ती व्यवस्था और छात्राओं की सुरक्षा (Safety of Female Students) को लेकर बहुत गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान की सफलता का सबसे बड़ा पैमाना वहां पढ़ने वाली बेटियों और छात्रों की शारीरिक तथा मानसिक सुरक्षा होता है, लेकिन जिस तरह से हालिया उपद्रव के दौरान हालात बेकाबू हुए, उसने अभिभावकों के मन में भय का एक गंभीर माहौल पैदा कर दिया है। इस बयान के सामने आने के बाद से विश्वविद्यालय प्रशासन और स्थानीय प्रशासनिक महकमे में एक बार फिर से खलबली मच गई है।

जानिए क्या है पूरा मामला और क्यों गरमाई है एलपीयू परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर बहस

पंजाब के जालंधर के पास स्थित एलपीयू एक ऐसा विशाल कैंपस है जहां देश के कोने-कोने से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी हजारों की संख्या में छात्र और छात्राएं हॉस्टल्स में रहकर अपनी उच्च शिक्षा प्राप्त करते हैं। हाल ही में जब इस कैंपस के भीतर किसी बात को लेकर छात्रों का असंतोष अचानक हिंसक प्रदर्शन में बदला, तो हालात इस हद तक बिगड़ गए कि सुरक्षाकर्मियों को भी पीछे हटना पड़ गया था। इस अप्रत्याशित हिंसा के दौरान परिसरों में संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ जो अराजक माहौल देखा गया, उसने कैंपस में रह रही छात्राओं और उनके अभिभावकों को सबसे ज्यादा डरा दिया। हॉस्टल्स में रहने वाली कई छात्राओं ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उस रात जिस तरह की अफरातफरी मची थी, उससे वे पूरी तरह सहम गई थीं। इसी संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए सीजेपी प्रमुख अभिजीत दिपके ने मुखर होकर इस मुद्दे को उठाया है और मांग की है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन को अपनी आंतरिक सुरक्षा प्रणाली की तुरंत उच्च स्तरीय समीक्षा करनी चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी बेटी की सुरक्षा पर आंच न आ सके।

CJP प्रमुख अभिजीत दिपके के तीखे सवाल: "बेटियों की सुरक्षा से कोई समझौता बर्दाश्त नहीं"

मीडिया और विभिन्न मंचों के माध्यम से अपनी बात रखते हुए सीजेपी प्रमुख अभिजीत दिपके ने दो टूक शब्दों में कहा कि किसी भी यूनिवर्सिटी का मुख्य उद्देश्य केवल ऊंची इमारतों और विज्ञापनों से अपनी चमक-दमक दिखाना नहीं होता, बल्कि वहां रहने वाले प्रत्येक छात्र और छात्रा की पूर्ण सुरक्षा की गारंटी लेना उसकी सबसे पहली और नैतिक जिम्मेदारी होती है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कैंपस के भीतर इस तरह का भारी उपद्रव और हिंसा भड़की, तो वहां की आंतरिक सुरक्षा विंग और वार्डन सिस्टम क्या कर रहा था? समय रहते भीड़ को नियंत्रित क्यों नहीं किया गया? उन्होंने विशेष रूप से महिला सुरक्षा (Women Safety in Campuses) का जिक्र करते हुए कहा कि भारत जैसे देश में जहां माता-पिता अपनी बेटियों को बड़े सपनों के साथ हजारों किलोमीटर दूर बड़े शहरों के विश्वविद्यालयों में भेजते हैं, यदि वहां उन्हें असुरक्षा का सामना करना पड़े, तो यह पूरे समाज और उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए एक बहुत बड़ा कलंक है। उनके इन तीखे और स्पष्ट बयानों ने सोशल मीडिया पर बहस को एक नया मोड़ दे दिया है और लोग उनके समर्थन में अपनी आवाज उठा रहे हैं।

विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रतिक्रिया और सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के कड़े निर्देश

इस प्रकार के गंभीर बयानों और चौतरफा आलोचनाओं के बाद लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के प्रबंधन ने भी स्थिति की नजाकत को समझते हुए कई कड़े प्रशासनिक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि वे अपने परिसरों में पढ़ने वाले हर एक छात्र और विशेष रूप से छात्राओं की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और किसी भी स्तर पर लापरवाही को सहन नहीं किया जाएगा। घटना के बाद से हॉस्टल्स के आसपास सुरक्षा के घेरे को और अधिक मजबूत कर दिया गया है, एंट्री और एग्जिट गेट्स पर सख्त चेकिंग की जा रही है तथा बाहरी तत्वों के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके अलावा, छात्राओं की किसी भी आपातकालीन शिकायत के लिए एक विशेष 24 घंटे काम करने वाली हेल्पडेस्क और रैपिड रिस्पांस टीम का गठन भी किया गया है ताकि किसी भी अनहोनी या संकट की स्थिति में तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके।

देश भर के शैक्षणिक संस्थानों के लिए एक बड़ी सीख और चेतावनी

एलपीयू की यह पूरी घटना और उसके बाद सीजेपी प्रमुख अभिजीत दिपके द्वारा उठाया गया यह गंभीर मुद्दा केवल एक विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के तमाम बड़े और छोटे शिक्षण संस्थानों के लिए एक बहुत बड़ी चेतावनी और सीख है। आज के समय में जब सोशल मीडिया के जरिए अफवाहें पलभर में फैल जाती हैं और भीड़ को आसानी से उकसाया जा सकता है, तब परिसरों के भीतर डिजिटल और शारीरिक सुरक्षा दोनों मोर्चों पर अत्यधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। अभिभावकों का भरोसा किसी भी संस्थान की सबसे बड़ी पूंजी होता है, और जब वह भरोसा डगमगाने लगता है, तो उसकी भरपाई करना आसान नहीं होता। उम्मीद की जानी चाहिए कि इस पूरे प्रकरण से सबक लेते हुए न केवल एलपीयू बल्कि देश के सभी शैक्षणिक संस्थान छात्राओं की सुरक्षा और अनुशासन को लेकर और अधिक कड़े, पारदर्शी और संवेदनशीलता से भरे कदम उठाएंगे, ताकि भविष्य में कभी किसी बेटी को इस प्रकार के खौफनाक माहौल का सामना न करना पड़े।