चन्नी और रंधावा ने बनाई दूरी! भूपेश बघेल के स्वागत में नहीं पहुंचे दिग्गज, पंजाब कांग्रेस की कलह फिर आई सामने

चन्नी और रंधावा ने बनाई दूरी! भूपेश बघेल के स्वागत में नहीं पहुंचे दिग्गज, पंजाब कांग्रेस की कलह फिर आई सामने

पंजाब कांग्रेस के भीतर सुलग रही अंदरूनी सियासत की आग एक बार फिर पूरी तरह भड़क उठी है। पार्टी आलाकमान की तमाम कोशिशों के बावजूद राज्य के शीर्ष नेताओं के बीच की कड़वाहट और गुटबाजी कम होने का नाम नहीं ले रही है। ताजा विवाद कांग्रेस के वरिष्ठ राष्ट्रीय नेता और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पंजाब दौरे के दौरान सामने आया है। पंजाब में पार्टी की कमान और समन्वय को मजबूत करने पहुंचे भूपेश बघेल के स्वागत के लिए आयोजित बेहद महत्वपूर्ण कार्यक्रम से सूबे के दो सबसे बड़े कांग्रेसी चेहरों—पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा—ने पूरी तरह दूरी बना ली। इन दोनों दिग्गजों की अनुपस्थिति ने पार्टी के भीतर मचे घमासान को एक बार फिर सरेआम उजागर कर दिया है।

बघेल का स्वागत और बड़े चेहरों की रहस्यमयी अनुपस्थिति

पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व द्वारा पंजाब में गुटबाजी खत्म करने के लिए भेजे गए भूपेश बघेल का स्वागत करने के लिए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कई नेता और कार्यकर्ता पहुंचे थे। लेकिन जैसे ही कार्यक्रम शुरू हुआ, वहां मौजूद नेताओं और मीडिया की नजरें उन खाली कुर्सियों पर टिक गईं जो चरणजीत सिंह चन्नी और सुखजिंदर सिंह रंधावा के लिए सुरक्षित रखी गई थीं। इन दोनों कद्दावर नेताओं का ऐन वक्त पर स्वागत समारोह से नदारद रहना केवल एक संयोग नहीं, बल्कि पार्टी आलाकमान और प्रदेश नेतृत्व के फैसलों के खिलाफ एक बड़ा और सीधा सियासी संदेश माना जा रहा है।

चन्नी और रंधावा की इस नाराजगी के पीछे की असली वजह

राजनीतिक गलियारों और अंदरूनी सूत्रों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, पंजाब कांग्रेस के भीतर टिकट बंटवारे, संगठनात्मक नियुक्तियों और हालिया सांगठनिक फेरबदल को लेकर पुराने दिग्गजों में भारी असंतोष पनप रहा है। चरणजीत सिंह चन्नी और सुखजिंदर सिंह रंधावा का धड़ा पिछले काफी समय से महसूस कर रहा है कि राज्य के महत्वपूर्ण रणनीतिक फैसलों में उनकी राय को तवज्जो नहीं दी जा रही है। भूपेश बघेल के स्वागत कार्यक्रम से दूरी बनाकर इन दोनों नेताओं ने साफ कर दिया है कि वे दिल्ली दरबार या केंद्रीय पर्यवेक्षकों के एकतरफा फैसलों को आसानी से स्वीकार करने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं।

केंद्रीय आलाकमान की सुलह की कोशिशों को लगा करारा झटका

कांग्रेस आलाकमान ने भूपेश बघेल जैसे सुलझे हुए और अनुभवी नेता को पंजाब की गुटबाजी पर काबू पाने और आगामी स्थानीय व आम चुनावों के लिए जमीन तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। लेकिन चन्नी और रंधावा के इस खुले 'बायकॉट' ने केंद्रीय नेतृत्व की इन कोशिशों को बहुत बड़ा झटका दिया है। पार्टी के भीतर चल रही यह खींचतान तब और गंभीर हो जाती है, जब सामने आम आदमी पार्टी (AAP) और शिरोमणि अकाली दल जैसे मजबूत सियासी प्रतिद्वंद्वी खड़े हों। नेताओं के इस रवैये से साफ है कि कांग्रेस को बाहर से ज्यादा अपने ही घर के भीतर छिड़े 'अपनों के युद्ध' से निपटना होगा।

विपक्षी दलों को मिला बैठे-बिठाए बड़ा राजनीतिक मुद्दा

पंजाब कांग्रेस के इस ताजा घटनाक्रम ने राज्य की विपक्षी पार्टियों को हमला करने का एक और सुनहरा मौका दे दिया है। सत्ताधारी आम आदमी पार्टी और भाजपा ने तंज कसते हुए कहा है कि जो पार्टी अपने शीर्ष नेताओं को एक मंच पर नहीं ला सकती, वह पंजाब की जनता का भला क्या करेगी। बहरहाल, भूपेश बघेल अब पंजाब के इस सियासी हालात की पूरी रिपोर्ट कांग्रेस आलाकमान को सौंपने की तैयारी में हैं, जिसके बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी हाईकमान इन नाराज दिग्गजों को मनाने के लिए क्या कदम उठाता है।

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