परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड की सीबीआई जांच के आदेश
पंजाब की राजनीति और कानून-व्यवस्था के गलियारों में इस समय एक बहुत बड़ा भूचाल आया हुआ है। राज्य की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के मुखिया और मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक बेहद संवेदनशील और बहुचर्चित मामले में बड़ा कदम उठाते हुए परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड की उच्चस्तरीय जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। पिछले कई हफ्तों से इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस को लेकर राज्यभर में भारी तनाव, विरोध प्रदर्शन और विपक्षी दलों की ओर से लगातार दबाव बनाया जा रहा था। पीड़ित परिवार और स्थानीय संगठनों की मांग थी कि राज्य पुलिस इस मामले में निष्पक्ष जांच करने में असमर्थ साबित हो रही है, इसलिए इसकी पारदर्शी जांच केवल केंद्रीय एजेंसी से ही कराई जानी चाहिए। मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस फैसले के सामने आते ही सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है, और मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे सरकार के अहंकार की हार करार दिया है।
क्या था परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड और क्यों गरमाया था पूरा पंजाब
परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड ने पिछले कुछ समय से पंजाब के प्रशासनिक और सामाजिक ताने-बाने को झकझोर कर रख दिया था। परविंदर सिंह झोटा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत और उसके शरीर पर मिले गंभीर चोट के निशान इस बात की गवाही दे रहे थे कि यह मामला सामान्य नहीं बल्कि एक सुनियोजित साजिश या क्रूरता का परिणाम था। इस घटना के सामने आने के बाद से ही पंजाब के युवाओं, विभिन्न सामाजिक संगठनों और किसानों में भारी गुस्सा देखने को मिला था। जगह-जगह सड़क जाम, पुलिस थानों के घेराव और मोर्चों ने मान सरकार की नींद उड़ा दी थी। परिवार का आरोप था कि स्थानीय पुलिस और प्रशासन इस मामले में लिप्त प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश कर रहा है और असली हत्यारों को पर्दे के पीछे छिपाया जा रहा है। बढ़ते जनआक्रोश और बिगड़ती कानून व्यवस्था को देखते हुए सरकार पर नैतिक और राजनीतिक दोनों दबाव चरम सीमा पर पहुंच चुके थे।
बीजेपी का तीखा हमला: 'हिटलरी और अहंकारी सरकार आखिरकार जनता के सामने झुकी'
मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपे जाने के तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आक्रामक रुख अपनाते हुए सरकार पर जोरदार राजनीतिक हमला बोला है। प्रदेश के वरिष्ठ बीजेपी नेताओं ने मीडिया के सामने बयान देते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार शुरू से ही इस मामले को दबाने और लीपापोती करने में जुटी हुई थी। बीजेपी नेताओं ने कहा कि पंजाब की यह हिटलरी और अहंकारी सरकार तभी जागी जब राज्य की जनता, युवाओं और पीड़ित परिवार ने सड़कों पर उतरकर सरकार की ईंट से ईंट बजाने का संकल्प लिया। बीजेपी ने तंज कसते हुए कहा कि आखिरकार सरकार को जनता के भारी दबाव और इंकार न किए जा सकने वाले सबूतों के आगे झुकना ही पड़ा। विपक्षी दलों का कहना है कि अगर सरकार ने पहले ही दिन इस मामले में निष्पक्षता दिखाई होती और एसआईटी (SIT) के बजाय सीधे सीबीआई जांच की संस्तुति कर दी होती, तो आज राज्य को इस प्रकार की अशांति और विरोध का सामना न करना पड़ता।
सीबीआई जांच से क्या उम्मीदें हैं और आगे की कानूनी प्रक्रिया क्या होगी
राज्य सरकार की सिफारिश मिलने के बाद अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) इस बहुचर्चित हत्याकांड की फाइल अपने हाथ में लेने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर चुका है। सीबीआई की टीमें जल्द ही पंजाब का दौरा कर सकती हैं, घटनास्थल का मुआयना करेंगी और स्थानीय पुलिस से अब तक की गई सभी केस डायरी, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट्स, सीसीटीवी फुटेज और फॉरेंसिक साक्ष्य अपने कब्जे में लेंगी। इस जांच के केंद्रीय एजेंसी के पास जाने से अब यह उम्मीद बंध गई है कि इस हत्याकांड के पीछे छिपे असली मास्टरमाइंड, साजिशकर्ताओं और राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त लोगों के चेहरों से भी पर्दा उठ सकेगा। पीड़ित परिवार ने भी सीबीआई जांच के फैसले पर संतोष व्यक्त किया है, हालांकि उनका यह भी कहना है कि जब तक सभी दोषियों को फांसी या उम्रकैद की सजा नहीं मिल जाती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
पंजाब की राजनीति और आगामी चुनावों पर इस फैसले का क्या पड़ेगा असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड में सीबीआई जांच का यह दांव भगवंत मान सरकार के लिए एक बड़ा डैमेज कंट्रोल साबित हो सकता है। जिस तरह से लगातार विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेर रहा था और कानून-व्यवस्था के मोर्चरी पर आप सरकार की साख दांव पर लगी थी, ऐसे में केंद्रीय एजेंसी को जांच सौंपकर मुख्यमंत्री ने गेंद अब केंद्र और सीबीआई के पाले में डाल दी है। हालांकि, यह देखना भी बेहद दिलचस्प होगा कि सीबीआई अपनी जांच में किन-किन नए तथ्यों को सामने लाती है और क्या पंजाब पुलिस पर लगे लापरवाही के आरोपों की भी कोई गाज गिरती है या नहीं। फिलहाल, इस बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक फैसले के बाद पंजाब की सियासत में गर्माहट बनी हुई है और सबकी निगाहें अब सीबीआई की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।