पंजाब चुनाव से पहले सुगबुगाहट तेज, हरसिमरत कौर के बाद बिक्रम मजीठिया का बड़ा बयान- बीजेपी-अकाली दल साथ आएं
पंजाब की राजनीतिक फिजा में एक बार फिर पुराने सियासी समीकरणों को पुनर्जीवित करने की चर्चाएं जोर पकड़ने लगी हैं। राज्य में आने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक दल अपनी-अपनी जमीन मजबूत करने में जुटे हैं। इसी बीच शिरोमणि अकाली दल (SAD) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने एक बड़ा बयान देकर सूबे की सियासत में हलचल पैदा कर दी है। मजीठिया ने खुलकर कहा है कि पंजाब के मौजूदा हालात और जनभावनाओं को देखते हुए जनता यह चाहती है कि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी (BJP) एक बार फिर से साथ मिलकर काम करें। उनके इस बयान से पहले बठिंडा से सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने भी इसी तरह के संकेत दिए थे, जिसके बाद से दोनों दलों के बीच संभावित गठबंधन को लेकर कयासों का बाजार गर्म हो गया है।
पुराने रिश्तों और ऐतिहासिक साझेदारियों को याद कर रहे नेता
बिक्रम सिंह मजीठिया ने मीडिया से बातचीत करते हुए अकाली दल और बीजेपी के पुराने ऐतिहासिक रिश्तों का विशेष तौर पर जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के समय से दोनों दलों का यह गठबंधन बेहद मजबूत रहा है। नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के शुरुआती कार्यकाल में भी यह साझेदारी पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ी थी। हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन विवादास्पद कृषि कानूनों के विरोध में अकाली दल ने एनडीए से अपने रास्ते अलग कर लिए थे और हरसिमरत कौर ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। मजीठिया का कहना है कि वे परिस्थितियां अब बदल चुकी हैं और पंजाब के व्यापक हित सर्वोपरि हैं।
पंजाब के सीमावर्ती राज्य होने और सुरक्षा पर दिया जा रहा जोर
अपने बयान में अकाली दल के नेता ने इस बात पर जोर दिया कि पंजाब एक संवेदनशील सीमावर्ती राज्य है। राज्य की आंतरिक सुरक्षा, कानून-व्यवस्था, सांप्रदायिक सौहार्द और आपसी भाईचारे को बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि सभी राष्ट्रवादी और क्षेत्रीय ताकतें मिलकर काम करें। मजीठिया के मुताबिक, आम लोग और मतदाता भी यही चाहते हैं कि दोनों दल आपसी गिले-शिकवे भुलाकर एक मजबूत और स्थिर राजनीतिक विकल्प प्रदान करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संबंध में अंतिम और निर्णायक फैसला दोनों पार्टियों के शीर्ष नेतृत्व को ही लेना है, लेकिन जमीन पर जनता की यही मांग उभरकर सामने आ रही है।
हरसिमरत कौर बादल के संकेतों और सियासी हलचलों के मायने
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत हाल ही में संगरूर और लोंगोवाल के पास हरसिमरत कौर बादल के दिए गए उस बयान से हुई थी जिसमें उन्होंने परोक्ष रूप से विकास और प्रगति के पुराने दौर को वापस लाने की बात कही थी। इसके अलावा, हाल ही में अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात ने इन अटकलों को और अधिक हवा दे दी है। हालांकि दूसरी तरफ, पंजाब बीजेपी के कई स्थानीय नेता और पदाधिकारी अपने दम पर राज्य की सभी विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की बात दोहरा चुके हैं। ऐसे में देखना यह दिलचस्प होगा कि क्या आगामी चुनावों से पहले यह पुराना गठबंधन दोबारा पटरी पर लौटता है या दोनों दल स्वतंत्र रूप से चुनावी मैदान में ताल ठोकते हैं।