भाजपा का बड़ा सियासी दांव, तजिंदर सिंह बिट्टू बने प्रदेश उपाध्यक्ष, कांग्रेस की गुटबाजी पर सीधी नजर
पंजाब की राजनीति में अपनी पकड़ को और मजबूत करने तथा आगामी राजनीतिक लड़ाइयों के लिए रणनीतिक बिसात बिछाते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक चला है। पार्टी ने कांग्रेस के पूर्व दिग्गज नेता और अब भाजपा के अहम चेहरे तजिंदर सिंह बिट्टू को पंजाब प्रदेश उपाध्यक्ष की बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी है। भाजपा का यह कदम सीधे तौर पर राज्य में अपने संगठनात्मक ढांचे को धार देने और विरोधी दलों, विशेषकर कांग्रेस के भीतर चल रही आंतरिक कलह और गुटबाजी का पूरा राजनीतिक लाभ उठाने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इस अहम और चौंकाने वाली नियुक्ति के बाद पंजाब के सियासी गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है और तमाम दल इस नए राजनीतिक समीकरण के दूरगामी परिणामों का गहराई से आकलन करने में जुट गए हैं।
तजिंदर सिंह बिट्टू की नियुक्ति के अहम सियासी मायने
तजिंदर सिंह बिट्टू को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाए जाने के इस कड़े फैसले को पंजाब में भाजपा के विस्तार अभियान की एक बेहद महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। एक समय में कांग्रेस के वफादार और प्रभावशाली नेता रहे बिट्टू का जालंधर और दोआबा क्षेत्र सहित पूरे पंजाब में अच्छा खासा राजनीतिक रसूख है, जिसका सीधा फायदा अब आगामी रणनीति में भगवा पार्टी को मिलने वाला है। राजनीतिक जानकारों का स्पष्ट रूप से मानना है कि भाजपा उनके लंबे सियासी अनुभव और मजबूत जमीनी पकड़ का इस्तेमाल करते हुए राज्य के उन अहम वोट बैंकों में बड़ी सेंध लगाने की तैयारी कर रही है, जहां अभी तक उसका प्रभाव अपेक्षाकृत सीमित रहा है। इसके साथ ही इस कदम से पार्टी ने राज्य में शहरी वोटर्स और अन्य प्रमुख समुदायों के बीच भी एक मजबूत सकारात्मक संदेश देने का प्रयास किया है, जो आने वाले समय में पूरी तरह से गेमचेंजर साबित हो सकता है।
कांग्रेस की अंदरूनी कलह और गुटबाजी का फायदा उठाने की रणनीति
इस नई राजनीतिक नियुक्ति के पीछे भाजपा का सबसे बड़ा और प्राथमिक लक्ष्य राज्य के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के भीतर लंबे समय से मचे अंदरूनी घमासान को पूरी तरह से भुनाना है। पंजाब कांग्रेस पिछले कुछ समय से विभिन्न वरिष्ठ नेताओं की आपसी गुटबाजी, बयानबाजी और खींचतान का सामना कर रही है, जिससे उसके कई समर्पित नेता और कार्यकर्ता खुद को पार्टी में हाशिए पर महसूस कर रहे हैं। भाजपा आलाकमान तजिंदर सिंह बिट्टू जैसे कद्दावर और अनुभवी नेता को संगठन में आगे करके कांग्रेस के उन तमाम असंतुष्ट और नाराज नेताओं को अपने पाले में खींचने की मजबूत रणनीति पर तेजी से काम कर रहा है ताकि पंजाब में खुद को एक सबसे सशक्त विकल्प के रूप में स्थापित किया जा सके। दल-बदल और असंतोष के इस दौर में भाजपा की यह आक्रामक चाल कांग्रेस के लिए एक नई और बहुत बड़ी राजनीतिक चुनौती बनकर खड़ी हो गई है।