सिख कैदियों की रिहाई की मांग को लेकर पंजाब में बंद का मिला-जुला असर, निजी स्कूलों में छुट्टी और सुरक्षा के कड़े इंतजाम

सिख कैदियों की रिहाई की मांग को लेकर पंजाब में बंद का मिला-जुला असर, निजी स्कूलों में छुट्टी और सुरक्षा के कड़े इंतजाम

पंजाब में सिख कैदियों यानी 'बंदी सिंहों' की रिहाई की मांग और हालिया मोहाली बॉर्डर घटना के विरोध में विभिन्न पंथिक संगठनों और कौमी इंसाफ मोर्चा द्वारा बुलाए गए राज्यव्यापी पंजाब बंद का मिला-जुला असर देखने को मिला। इस बंद के दौरान सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए थे ताकि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में रहे। आइए जानते हैं इस पूरे घटनाक्रम और इसके प्रभावों से जुड़ी हर एक महत्वपूर्ण बात विस्तार से।

क्यों बुलाया गया था पंजाब बंद और क्या थीं प्रमुख मांगें

कौमी इंसाफ मोर्चा और कई अन्य सिख संगठनों ने लंबी सजाएं काट चुके उन सिख कैदियों की तुरंत रिहाई की मांग को लेकर इस बंद का आह्वान किया था, जो अपनी विधिक कैद की अवधि पूरी कर चुके हैं। इसके अलावा प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों में जगतार सिंह हवारा की पैरोल और अन्य बंदी सिंहों के मामलों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करना शामिल था। यह बंद मुख्य रूप से 15 अगस्त को चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर गवर्नर हाउस की तरफ मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज और वाटर कैनन के इस्तेमाल के विरोध में बुलाया गया था।

शिक्षण संस्थानों और प्राइवेट स्कूलों पर दिखा सीधा असर

छात्रों और अभिभावकों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए पंजाब में प्राइवेट स्कूलों की फेडरेशन ने एहतियातन सभी निजी शिक्षण संस्थानों में एक दिन के अवकाश की घोषणा की थी। इसके साथ ही पंजाब यूनिवर्सिटी ने भी आज होने वाली अपनी कुछ परीक्षाओं को स्थगित कर दिया, जिन्हें अब आगामी तारीखों पर आयोजित किया जाएगा। हालांकि, सरकारी स्कूल और कार्यालय खुले रहे, लेकिन बंद के आह्वान के चलते वहां छात्र-छात्राओं और कर्मचारियों की उपस्थिति अपेक्षाकृत कम दर्ज की गई।

राजनीतिक दलों, SGPC और किसान संगठनों का मिला समर्थन

इस बंद को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC), किसान मजदूर मोर्चा, भारती किसान यूनियन (राजेशवाल) समेत कई बड़े किसान संगठनों और राजनीतिक धड़ों का भरपूर समर्थन मिला। SGPC ने एकजुटता दिखाते हुए अपने मुख्य कार्यालयों और संस्थानों को बंद रखा तथा अपनी कार्यकारी समिति की बैठक को भी स्थगित कर दिया। हालांकि, आपातकालीन सेवाओं, मेडिकल एमरजेंसी, एंबुलेंस, शादियों और परीक्षाार्थियों को इस बंद की पाबंदियों से पूरी तरह मुक्त रखा गया था ताकि आम जनता को किसी बड़ी असुविधा का सामना न करना पड़े।

राज्यभर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और जनजीवन की स्थिति

पंजाब के विभिन्न जिलों जैसे अमृतसर, पटियाला, जालंधर और मोहाली में सुरक्षा के अत्यंत कड़े इंतजाम किए गए थे। संवेदनशील चौराहों और अंतरराज्यीय सीमाओं पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। शुरुआती घंटों में कुछ बाजारों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर बंद का असर दिखा, लेकिन दोपहर 2 बजे के बाद स्थिति पूरी तरह सामान्य हो गई। पुलिस प्रशासन के अनुसार, पूरे राज्य में बंद शांतिपूर्ण रहा और किसी भी अप्रिय घटना की कोई सूचना नहीं मिली है।

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