अमृतसर: बंदी छोड़ दिवस और दीपावली पर स्वर्ण मंदिर का अलौकिक नजारा

अमृतसर: बंदी छोड़ दिवस और दीपावली पर स्वर्ण मंदिर का अलौकिक नजारा

सिखों के पवित्र तख्त और रूहानी केंद्र श्री हरमंदिर साहिब यानी स्वर्ण मंदिर में दीपावली और बंदी छोड़ दिवस का पर्व पूरी भव्यता, श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस पावन अवसर पर अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर का पूरा परिसर दीपों की जगमगाहट और रंग-बिरंगी भव्य रोशनी से सराबोर नजर आ रहा है। सरोवर के चारों ओर टिमटिमाते दीये और ऐतिहासिक इमारतों पर की गई आकर्षक सजावट इस स्थल के सौंदर्य में चार चांद लगा रही है, जिसे देखने के लिए दुनिया भर से लाखों की संख्या में संगत यानी श्रद्धालु अमृतसर पहुंचे हैं। बंदी छोड़ दिवस के ऐतिहासिक दिन पर गुरु घर में मत्था टेकने के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है, और पूरा परिसर 'वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह' के जयकारों से गूंज रहा है।

#स्वर्ण मंदिर में बंदी छोड़ दिवस का ऐतिहासिक महत्व और दीपोत्सव की अद्भुत छटा

बंदी छोड़ दिवस सिख इतिहास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और गौरवशाली दिन के रूप में दर्ज है। आज के ही दिन सिखों के छठे गुरु श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी ग्वालियर के किले से 52 हिंदू राजाओं को मुगल कैद से रिहा करवाकर अमृतसर वापस लौटे थे, जिसके बाद से इस दिन को प्रकाश पर्व यानी बंदी छोड़ दिवस के रूप में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इसी ऐतिहासिक प्रसंग की याद में आज स्वर्ण मंदिर में पारंपरिक तरीके से घी के दीये जलाए गए और आतिशबाजी का ऐसा विहंगम नजारा पेश किया गया, जिसने देखने वालों का मन मोह लिया। पानी के बीचों-बीच स्थित स्वर्ण मंदिर की सुनहरी परत पर जब रंग-बिरंगी रोशनी पड़ती है, तो उसकी चमक और भी अधिक बढ़ जाती है, और यह नजारा किसी अलौकिक लोक जैसा प्रतीत होता है।

#देश-विदेश से पहुंचे लाखों श्रद्धालु, स्वर्ण मंदिर में उमड़ा आस्था का महासागर

दीपावली और बंदी छोड़ दिवस के इस पावन पर्व पर केवल देश के विभिन्न राज्यों से ही नहीं, बल्कि अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और यूरोप समेत दुनिया के कोने-कोने से श्रद्धालु अमृतसर पहुंचे हैं। श्री हरमंदिर साहिब आने वाले हर एक व्यक्ति के चेहरे पर एक अलग ही आध्यात्मिक संतोष और खुशी साफ झलक रही है। पवित्र सरोवर में आस्था की डुबकी लगाने के बाद श्रद्धालुओं ने केंद्रीय गुरुद्वारे में माथा टेका और देश-दुनिया में अमन-चैन, शांति और भाईचारे की अरदास की। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) और स्थानीय प्रशासन की तरफ से भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा और सहायता के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा का सामना न करना पड़े। लंगर हॉल में लगातार चौबीसों घंटे अटूट लंगर चल रहा है, जहां जाति और धर्म के भेदभाव से ऊपर उठकर लाखों लोग एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं।

#दीपों की रोशनी से जगमगाया अमृतसर शहर, अटूट श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा प्रकाश पर्व

स्वर्ण मंदिर के साथ-साथ पूरे अमृतसर शहर में भी दीपावली और बंदी छोड़ दिवस को लेकर जबरदस्त उत्साह और रौनक देखने को मिल रही है। शहर के बाजारों, हेरिटेज स्ट्रीट और ऐतिहासिक इमारतों को दुल्हन की तरह सजाया गया है। रात के वक्त जब स्वर्ण मंदिर में आतिशबाजी की गई, तो आसमान का नजारा देखने लायक था और हर तरफ रोशनी की एक अद्भुत छटा बिखर गई। यह पर्व हमें अज्ञानता के अंधेरे को मिटाकर ज्ञान और सच्चाई के प्रकाश को अपने जीवन में अपनाने का संदेश देता है। स्वर्ण मंदिर से उठने वाली रूहानी वाणी और कीर्तन की गूंज इस पावन रात को और अधिक पवित्र बना रही है, जो हर आने वाले श्रद्धालु के दिल में एक गहरी और कभी न भूलने वाली आध्यात्मिक छाप छोड़ जाती है।