Punjab Politics : ज्ञानी रघबीर सिंह की अकाली दल पुनर्जीवित में एंट्री? शिरोमणि कमेटी से विदाई के बाद रूपनगर कांफ्रेंस में दी दस्तक

Post

News India Live, Digital Desk: पंजाब की पंथक राजनीति में एक नया और बड़ा मोड़ आ गया है। श्री हरिमंदिर साहिब के पूर्व मुख्य ग्रंथी और श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) से सेवामुक्त किए जाने के बाद अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। ताज़ा जानकारी के अनुसार, ज्ञानी रघबीर सिंह ने रूपनगर (रोपड़) में आयोजित 'शिरोमणि अकाली दल पुनर्जीवित' (Akali Dal Punar Surjit) की राजनीतिक कांफ्रेंस में शिरकत की है। इस कदम को शिरोमणि अकाली दल (बादल) के लिए एक बड़ी चुनौती और पंजाब में नए राजनीतिक ध्रुवीकरण के रूप में देखा जा रहा है।

1. SGPC से विदाई और 'अनुशासनहीनता' के आरोप (The Dismissal)

ज्ञानी रघबीर सिंह और शिरोमणि कमेटी के बीच लंबे समय से चल रही तनातनी 26 फरवरी 2026 को चरम पर पहुँच गई:

सेवामुक्ति: SGPC ने अनुशासनहीनता और प्रबंधन के खिलाफ सार्वजनिक बयानबाजी करने के आरोप में ज्ञानी रघबीर सिंह को मुख्य ग्रंथी के पद से हटाकर जबरन रिटायर कर दिया है।

72 घंटे का अल्टीमेटम: इससे पहले कमेटी ने उन्हें अपने आरोपों (लंगर घोटाला और भ्रष्टाचार) के सबूत पेश करने के लिए 72 घंटे का समय दिया था, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया था।

2. रूपनगर कांफ्रेंस: अकाली दल (पुनर्जीवित) का साथ (Rupnagar Conference)

पद से हटने के महज कुछ दिनों के भीतर ही ज्ञानी रघबीर सिंह का 'अकाली दल पुनर्जीवित' के मंच पर दिखना कई संकेत दे रहा है:

सियासी एंट्री का संकेत: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ज्ञानी रघबीर सिंह अब सीधे तौर पर सियासत में कदम रख सकते हैं।

बादल परिवार पर हमला: इस कांफ्रेंस के दौरान बादल परिवार और SGPC के वर्तमान ढांचे को लेकर कड़ा रुख अपनाया गया, जिसमें ज्ञानी रघबीर सिंह की मौजूदगी ने विपक्ष को और मजबूती दी है।

3. भ्रष्टाचार के आरोपों ने बढ़ाई हलचल (The Allegations)

ज्ञानी रघबीर सिंह ने SGPC और बादल परिवार पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जो चर्चा का विषय बने हुए हैं:

लंगर और गोलक घोटाला: उन्होंने दावा किया है कि गुरु की गोलक और लंगर की रसद में करोड़ों रुपयों का भ्रष्टाचार हुआ है, जिसके दस्तावेजी सबूत उनके पास मौजूद हैं।

सिख भावनाओं से खिलवाड़: उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक फायदों के लिए सिख धार्मिक संस्थानों का दुरुपयोग किया जा रहा है।

4. 2 दिसंबर का हुक्मनामा: विवाद की असली जड़?

पंथक राजनीति के जानकारों के अनुसार, इस पूरे विवाद की शुरुआत 2 दिसंबर 2024 के उस ऐतिहासिक हुक्मनामे से हुई थी:

तनखैया घोषित: तब अकाल तख्त के जत्थेदार रहते हुए ज्ञानी रघबीर सिंह ने अकाली दल (बादल) के नेतृत्व को तनखैया घोषित किया था।

फख्र-ए-कौम खिताब: पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को दिया गया 'फख्र-ए-कौम' खिताब वापस लेने के फैसले ने बादल परिवार और ज्ञानी रघबीर सिंह के बीच की खाई को गहरा कर दिया था।

5. पंजाब की राजनीति पर क्या होगा असर?

ज्ञानी रघबीर सिंह की नई पारी पंजाब में एक तीसरे पंथक विकल्प की नींव रख सकती है:

वोट बैंक: उनके साथ सिख संगत का एक बड़ा हिस्सा जुड़ सकता है, जो वर्तमान व्यवस्था से नाराज है।

आने वाले चुनाव: रूपनगर और आनंदपुर साहिब क्षेत्र में हुई इस हलचल का असर आने वाले स्थानीय निकाय और विधानसभा चुनावों पर पड़ना तय है।