Punjab Politics : अमृतपाल सिंह का तीखा प्रहार आजादी के बाद कुछ स्वार्थी लोगों ने सत्ता के गलियारों पर कब्जा किया
News India Live, Digital Desk: लोकसभा सांसद और 'वारिस पंजाब दे' के प्रमुख अमृतपाल सिंह ने एक बार फिर अपने बयानों से पंजाब की राजनीति में हलचल मचा दी है अमृतपाल ने देश की व्यवस्था और आजादी के बाद के घटनाक्रमों पर सवाल उठाते हुए कहा कि 1947 की आजादी के बाद कुछ 'स्वार्थी तत्वों' (Self-serving individuals) ने सत्ता के गलियारों पर कब्जा कर लिया, जिसके कारण आम जनता और विशेष रूप से पंजाब के हक हाशिये पर चले गए। डिब्रूगढ़ जेल से अपनी कानूनी लड़ाई और राजनीतिक सक्रियता के बीच अमृतपाल का यह बयान एक बड़े वैचारिक टकराव की ओर संकेत कर रहा है।
1. "गलियारों पर कब्जा": अमृतपाल का मुख्य तर्क
अमृतपाल सिंह ने ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में बात करते हुए आरोप लगाया कि आजादी के असली हकदारों को वह सम्मान और अधिकार नहीं मिले जिसके वे पात्र थे।
स्वार्थी नेतृत्व: उन्होंने तर्क दिया कि सत्ता उन लोगों के हाथ में चली गई जिन्होंने केवल अपने हितों को साधा, न कि देश और पंजाब की मूल भावनाओं को।
पंजाब की अनदेखी: अमृतपाल के अनुसार, इन 'स्वार्थी' लोगों की नीतियों के कारण ही पंजाब आज आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों (जैसे नशा और पलायन) से जूझ रहा है।
2. संसद और गणतंत्र दिवस की अनुमति पर कानूनी जंग
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमृतपाल सिंह ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर संसद के बजट सत्र (2026) में शामिल होने और गणतंत्र दिवस समारोह में हिस्सा लेने की अनुमति मांगी थी।
लोकतांत्रिक अधिकार: उनकी याचिका में कहा गया था कि खदूर साहिब की जनता ने उन्हें अपना प्रतिनिधि चुना है, इसलिए उन्हें सदन में उनकी आवाज उठाने से रोकना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
हाईकोर्ट का रुख: हाईकोर्ट ने इस मामले में पंजाब सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह तय समय सीमा (7 दिन) के भीतर उनकी भागीदारी पर उचित निर्णय ले।
3. सियासी गलियारों में प्रतिक्रिया
अमृतपाल के इस 'स्वार्थी कब्जा' वाले बयान पर पंजाब की अन्य पार्टियों ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है:
बीजेपी और आप: सत्ता पक्ष और भाजपा ने इसे 'भड़काऊ' और 'विभाजनकारी' राजनीति करार दिया है। उनका कहना है कि अमृतपाल संवैधानिक संस्थाओं का अपमान कर रहे हैं।
कांग्रेस: पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी जैसे नेताओं ने संसद में अमृतपाल की 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' का मुद्दा उठाया है, हालांकि कांग्रेस के भीतर भी इस पर अलग-अलग राय है।
4. 2026 की रणनीति: जेल से संसद तक का सफर
अमृतपाल सिंह फिलहाल असम की डिब्रूगढ़ जेल में एनएसए (NSA) के तहत बंद हैं, लेकिन उनके समर्थकों का मानना है कि उनका राजनीतिक ग्राफ बढ़ रहा है। उनके बयानों को अक्सर 'पंजाब बनाम केंद्र' के नैरेटिव के रूप में देखा जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमृतपाल सिंह अब एक धार्मिक नेता से बदलकर एक 'राजनीतिक विद्रोही' की छवि मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।