हरियाणा: IAS रानी नागर की सेवाएं समाप्त करने की तैयारी; 5.5 साल से ड्यूटी से गायब, सरकार ने थमाया अंतिम नोटिस
चंडीगढ़: हरियाणा कैडर की 2014 बैच की विवादित आईएएस (IAS) अधिकारी रानी नागर की सरकारी सेवा समाप्त करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। पिछले साढ़े पांच सालों से बिना किसी सूचना के ड्यूटी से अनुपस्थित चल रही इस अधिकारी के खिलाफ अब प्रदेश सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। कार्मिक विभाग ने उन्हें 15 दिन का अंतिम अल्टीमेटम देते हुए जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
साढ़े पांच साल से लापता, कोई जवाब नहीं
रानी नागर को आखिरी बार 11 मार्च 2020 को अभिलेखागार विभाग में अतिरिक्त सचिव और निदेशक के पद पर नियुक्त किया गया था। रिकॉर्ड के अनुसार, उन्होंने 27 अक्टूबर 2020 तक ही अपनी सेवाएं दीं और उसके बाद से वह बिना किसी पूर्व सूचना या छुट्टी के गायब हैं।
सरकार की ओर से उन्हें लगातार ई-मेल और नोटिस भेजे गए, लेकिन उन्होंने आज तक किसी का भी संज्ञान नहीं लिया। मई 2022 में उनके खिलाफ औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary Action) शुरू की गई थी।
UPSC की सलाह और सरकार का कड़ा रुख
पिछले साल जुलाई में हरियाणा सरकार ने रानी नागर को जबरन सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement) देने का मन बना लिया था। हालांकि, तब संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने इस पर रोक लगा दी थी।
UPSC का सुझाव: आयोग ने सलाह दी थी कि उनका ग्रेड दो साल तक कम कर दिया जाए और उनका पक्ष सुना जाए।
अंतिम चेतावनी: अब सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि 15 दिनों के भीतर उन्होंने अपना पक्ष नहीं रखा, तो यह मान लिया जाएगा कि उन्हें कुछ नहीं कहना है। इसके बाद किसी और नोटिस के बिना उनकी सेवाएं समाप्त करने की सिफारिश केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय (DoPT) को भेज दी जाएगी।
विवादों से रहा है पुराना नाता
आईएएस रानी नागर अपनी सेवा के दौरान कई बार चर्चा और विवादों में रहीं:
इस्तीफे का ऐलान: उन्होंने मई 2020 में फेसबुक पर एक वीडियो पोस्ट कर अपनी जान को खतरा बताते हुए इस्तीफे की घोषणा की थी, हालांकि बाद में उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं हुआ था।
उत्पीड़न के आरोप: उन्होंने एक वरिष्ठ अधिकारी पर मानसिक उत्पीड़न के आरोप भी लगाए थे, जिसकी जांच लंबी चली थी।
लापता होना: अक्टूबर 2020 के बाद से उन्होंने न तो विभाग को अपनी लोकेशन बताई और न ही किसी मीटिंग में शामिल हुईं।
हरियाणा सरकार के इस कड़े कदम से प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज है। अब सबकी नजरें 15 दिन की इस समयसीमा पर टिकी हैं।