बिहार की राजनीति में प्रशांत किशोर का बड़ा दांव ,क्या 25 सीटों पर टिक गया है राजनीतिक भविष्य?
News India Live, Digital Desk: बिहार की सियासी गलियारों में इन दिनों प्रशांत किशोर (पीके) के एक बयान ने हलचल मचा दी है। चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर, जो अपनी 'जन सुराज' यात्रा के जरिए बिहार में जमीन तलाश रहे हैं, उन्होंने एक ऐसा बड़ा दावा किया है जिस पर सभी की नज़रें टिकी हैं। उन्होंने कहा है कि अगर नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू (जनता दल यूनाइटेड) आगामी विधानसभा चुनाव में 25 से ज्यादा सीटें ले आई तो वह राजनीति छोड़ देंगे।
अब सवाल यह उठता है कि क्या यह उनका आत्मविश्वास है या फिर कोई सोची-समझी राजनीतिक चाल?
प्रशांत किशोर ने आखिर ऐसा क्यों कहा?
राजनीति के जानकार मानते हैं कि प्रशांत किशोर के इस बयान के पीछे कई गहरे मतलब हो सकते हैं।
- दबाव की रणनीति: पीके शायद नीतीश कुमार और उनकी पार्टी पर एक मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना चाहते हैं। वह जनता के बीच यह संदेश देना चाहते हैं कि जेडीयू की राजनीतिक जमीन खिसक चुकी है।
- खुद को स्थापित करना: इस तरह के बोल्ड बयानों से वह खुद को बिहार की राजनीति में एक गंभीर खिलाड़ी के तौर पर स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। अगर उनकी भविष्यवाणी सही साबित होती है, तो उनकी crédibilité काफी बढ़ जाएगी।
- एंटी-इनकंबेंसी को हवा देना: प्रशांत किशोर का मानना है कि नीतीश कुमार के खिलाफ राज्य में एंटी-इनकंबेंसी यानी सत्ता विरोधी लहर है और वह लोगों के इसी गुस्से को अपने पक्ष में करना चाहते हैं।
क्या कहते हैं राजनीतिक समीकरण?
प्रशांत किशोर का तर्क है कि पिछली बार जेडीयू को 42 सीटें तब मिली थीं, जब चिराग पासवान की पार्टी ने जेडीयू के खिलाफ कई सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। उनका कहना है कि इस बार हालात अलग हैं और नीतीश कुमार शारीरिक व मानसिक तौर पर पहले से कमजोर हुए हैं, जिसका असर चुनाव पर पड़ेगा। वहीं दूसरी तरफ, कई एग्जिट पोल्स और राजनीतिक विश्लेषक एनडीए गठबंधन को बढ़त दिखा रहे हैं, जिसमें जेडीयू को 50 से ज़्यादा सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है।अगर ये अनुमान सही साबित हुए तो प्रशांत किशोर के सामने अपने बयान पर टिके रहने की चुनौती होगी।
आगे क्या होगा: दो संभावनाएं
अब दो ही बातें हो सकती हैं:
- अगर जेडीयू 25 से ज़्यादा सीटें जीतती है: ऐसी स्थिति में प्रशांत किशोर पर अपने शब्द वापस लेने या राजनीति से संन्यास लेने का भारी दबाव होगा। क्या वो वाकई ऐसा करेंगे, या इसे भी एक 'चुनावी जुमला' बताकर नई दलील पेश करेंगे, यह देखना दिलचस्प होगा।
- अगर जेडीयू 25 से कम सीटों पर सिमट जाती है: अगर ऐसा हुआ तो प्रशांत किशोर बिहार की राजनीति में एक 'चाणक्य' के रूप में उभरेंगे। यह उनकी 'जन सुराज' पार्टी के लिए एक बहुत बड़ी जीत होगी और उन्हें 2025 के विधानसभा चुनावों के लिए एक मजबूत दावेदार बना देगी।
फिलहाल, बिहार की जनता और राजनीतिक विशेषज्ञ दोनों ही चुनाव के नतीजों का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं। यह चुनाव न केवल राज्य की अगली सरकार तय करेगा, बल्कि प्रशांत किशोर का राजनीतिक भविष्य भी इसी दांव पर टिका है।