Pradosh Vrat 2026 : जनवरी का आखिरी प्रदोष व्रत कल, महादेव को प्रसन्न करने के लिए रखें इन बातों का ध्यान
News India Live, Digital Desk: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की कृपा पाने का सबसे उत्तम मार्ग माना गया है। हर माह के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को यह व्रत रखा जाता है। साल 2026 के जनवरी महीने का आखिरी प्रदोष व्रत 31 जनवरी (शनिवार) को पड़ रहा है। शनिवार को होने के कारण इसे 'शनि प्रदोष' कहा जाएगा, जो पुत्र प्राप्ति और कर्ज से मुक्ति के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।
प्रदोष व्रत जनवरी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को यह व्रत रखा जाएगा।
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 30 जनवरी 2026, रात 09:15 बजे से।
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 31 जनवरी 2026, रात 08:40 बजे तक।
प्रदोष काल पूजा मुहूर्त: 31 जनवरी, शाम 05:55 से रात 08:25 तक।
विशेष: प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा सूर्यास्त के समय यानी 'प्रदोष काल' में की जाती है, इसलिए 31 जनवरी को व्रत रखना ही शास्त्रसम्मत है।
व्रत में क्या खाएं और किन चीजों से करें परहेज?
प्रदोष व्रत के दौरान खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए ताकि व्रत का पूर्ण फल मिल सके:
क्या खाएं: व्रत के दौरान फलाहार (फल, दूध, जूस) का सेवन किया जा सकता है। शाम की पूजा के बाद आप साबूदाना खिचड़ी या कुट्टू के आटे से बनी चीजें (बिना साधारण नमक के, केवल सेंधा नमक) खा सकते हैं।
क्या न खाएं: इस दिन अन्न, लाल मिर्च, सादा नमक, प्याज और लहसुन का सेवन पूरी तरह वर्जित है। तली-भुनी चीजों से परहेज करें ताकि मन शांत और भक्ति में लगा रहे।
सावधान! प्रदोष व्रत पर न करें ये गलतियां
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन कुछ कार्यों को करना अशुभ माना जाता है:
बाल न धोएं: शास्त्रों के अनुसार, व्रत वाले दिन महिलाओं और पुरुषों को बाल नहीं धोने चाहिए। संभव हो तो एक दिन पहले ही स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं।
काले कपड़े: पूजा के दौरान काले रंग के कपड़े पहनने से बचें। इस दिन सफेद, केसरिया या पीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ होता है।
तामसिक विचार: इस दिन किसी की निंदा न करें और न ही क्रोध करें। ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य है।
शनि प्रदोष का विशेष महत्व
31 जनवरी को शनिवार होने से 'शनि प्रदोष' का संयोग बन रहा है। जिन जातकों पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही है, उन्हें इस दिन शिवलिंग पर काले तिल और शमी पत्र जरूर अर्पित करने चाहिए। इससे शनि देव और महादेव दोनों की कृपा प्राप्त होती है।