सरकारी नौकरी के साथ नहीं चलेगी सियासत, छत्तीसगढ़ सरकार ने जारी किए कड़े निर्देश नियम तोड़ा तो जाएगी नौकरी
News India Live, Digital Desk : छत्तीसगढ़ में सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए राज्य सरकार ने एक बेहद महत्वपूर्ण और कड़ा फरमान जारी किया है। अब सरकारी सेवा में रहते हुए किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधि में शामिल होना भारी पड़ सकता है। राज्य सरकार ने सिविल सेवा आचरण नियमों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि कोई कर्मचारी किसी राजनीतिक दल से जुड़ता है या चुनाव प्रचार में हिस्सा लेता है, तो उसके खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
क्या है नया निर्देश और क्यों पड़ी इसकी जरूरत?
सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा जारी इन निर्देशों के अनुसार, सरकारी कर्मचारियों को किसी भी राजनीतिक दल या ऐसी संस्था का सदस्य बनने की अनुमति नहीं है जो राजनीति में हिस्सा लेती हो। हाल के दिनों में ऐसी कई शिकायतें मिली थीं जिनमें सरकारी कर्मचारी सोशल मीडिया या सार्वजनिक मंचों पर राजनीतिक विचारधारा का प्रचार करते पाए गए थे। प्रशासन ने इसे सरकारी मर्यादा के खिलाफ मानते हुए अब 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई है।
सोशल मीडिया पर भी रहेगी पैनी नजर
सरकार ने साफ कर दिया है कि यह पाबंदी केवल जमीनी रैलियों या बैठकों तक सीमित नहीं है। अब कर्मचारियों के सोशल मीडिया हैंडल्स (Facebook, X, WhatsApp) पर भी विभाग की नजर रहेगी। किसी राजनीतिक दल के पक्ष में पोस्ट करना, शेयर करना या विवादित टिप्पणी करना भी आचरण नियम का उल्लंघन माना जाएगा। उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित कर्मचारी को निलंबित करने या सेवा से बर्खास्त करने तक का प्रावधान किया गया है।
निर्वाचन कार्य और तटस्थता की अनिवार्यता
निर्देशों में इस बात पर जोर दिया गया है कि सरकारी तंत्र को पूरी तरह से 'तटस्थ' (Neutral) होना चाहिए। विशेष रूप से आगामी चुनावों और प्रशासनिक कार्यों की पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों की गतिविधियों की नियमित निगरानी करें और यदि कोई संदिग्ध मामला सामने आता है, तो उसकी रिपोर्ट तुरंत वरिष्ठ कार्यालय को भेजें।
नियम तोड़ने वालों पर होगी 'बर्खास्तगी' की गाज
छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के तहत सरकारी सेवकों को किसी भी राजनीतिक आंदोलन या प्रदर्शन में भाग लेने की मनाही है। सरकार ने याद दिलाया है कि नियम 5 के तहत कोई भी सरकारी सेवक न तो किसी राजनीतिक दल का सदस्य होगा और न ही किसी राजनीतिक गतिविधि में चंदा देगा। इन निर्देशों के बाद अब कर्मचारियों में हड़कंप है, क्योंकि एक छोटी सी चूक भी उनके करियर को खत्म कर सकती है।