असम में 'मियां' टिप्पणी पर छिड़ा सियासी घमासान: हिमंता बिस्वा सरमा के बयान पर ओवैसी का तीखा पलटवार

Post

गुवाहाटी/हैदराबाद। असम की राजनीति में एक बार फिर 'मियां' समुदाय को लेकर दिए गए बयानों ने उबाल ला दिया है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा द्वारा हाल ही में मियां समुदाय के प्रति की गई विवादित टिप्पणी के बाद विपक्षी दलों ने सरकार को आड़े हाथों लिया है। विशेष रूप से AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मुख्यमंत्री के बयान को पद की गरिमा के खिलाफ और अमानवीय बताते हुए कड़ी आलोचना की है।

क्या था मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का बयान?

असम के मुख्यमंत्री ने एक सभा के दौरान मियां समुदाय के लोगों को राज्य छोड़ने पर मजबूर करने के लिए एक अजीबोगरीब सलाह दी थी। उन्होंने कहा था कि यदि इस समुदाय का कोई व्यक्ति रिक्शा या ऑटो चलाता है और वह 5 रुपये मांगता है, तो उसे केवल 4 रुपये ही दें। सरमा ने तर्क दिया कि जब तक उन्हें इस तरह की छोटी-छोटी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा, तभी वे राज्य छोड़कर जाएंगे।

बाद में मुख्यमंत्री ने सफाई देते हुए कहा कि बांग्लादेशी मूल के लोग भारत की जमीन पर काम नहीं कर सकते। उन्होंने इसे कानून और राज्य की सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा कि वे केवल उन लोगों की बात कर रहे हैं जो अवैध रूप से यहां रह रहे हैं।

असदुद्दीन ओवैसी का 'महाशक्ति' वाला तंज

ओवैसी ने हिमंता सरमा के बयान पर पलटवार करते हुए इसे भारतीय नागरिकों का अपमान बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा सरकार के 'विकसित भारत' के संकल्प पर सवाल उठाते हुए कहा:

मुख्यमंत्री की गरिमा: ओवैसी ने पूछा कि क्या कोई मुख्यमंत्री इस तरह की ओछी बात कर सकता है? उन्होंने याद दिलाया कि जिन्हें 'मियां' कहा जा रहा है, वे 150-200 साल पहले अंग्रेजों द्वारा खेती के लिए लाए गए थे और वे भारत के वैध नागरिक हैं।

अर्थव्यवस्था और ऑटो चालक: ओवैसी ने तंज कसते हुए कहा, "एक तरफ आप दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने और चांद पर घर बनाने की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ एक गरीब ऑटो चालक को एक रुपया देने में हिचकिचा रहे हैं। आपकी सोच कितनी छोटी है?"

भय का माहौल: ओवैसी ने आरोप लगाया कि देश को वर्तमान में ईमानदारी और आशा की जरूरत है, लेकिन भाजपा सरकार संदेह और भय का माहौल पैदा कर रही है।

'मियां' विवाद की ऐतिहासिक जड़ें

असम में 'मियां' शब्द का प्रयोग आमतौर पर उन बंगाली भाषी मुसलमानों के लिए किया जाता है जिनके पूर्वज अविभाजित बंगाल (वर्तमान बांग्लादेश) से आकर असम में बसे थे। पिछले कुछ वर्षों में, यह शब्द असम की राजनीति में पहचान और नागरिकता के विवाद का केंद्र बन गया है।

हिमंता बिस्वा सरमा अक्सर अपनी रैलियों में 'मियां' समुदाय और स्वदेशी असमिया संस्कृति के बीच अंतर को स्पष्ट करते रहे हैं, जिसे विपक्ष ध्रुवीकरण की राजनीति करार देता रहा है।