बंगाल में फिर सियासी उबाल हुमायूं कबीर को BJP की सीधी चेतावनी, याद दिलाया 6 दिसंबर
News India Live, Digital Desk : पश्चिम बंगाल की राजनीति में शांति मिले, ऐसा कम ही होता है। अभी हाल ही में वहां जो हुआ, उसने एक बार फिर साबित कर दिया है कि चुनाव और वोट बैंक के लिए नेता किसी भी हद तक जा सकते हैं। मुद्दा फिर से वही पुराना है बाबरी मस्जिद और धर्म की राजनीति, लेकिन इस बार अखाड़ा बना है बंगाल।
असली कहानी शुरू होती है टीएमसी (TMC) के बड़बोले नेता हुमायूं कबीर से। हुमायूं कबीर अपने बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं, और कई बार तो उनकी अपनी पार्टी भी असहज हो जाती है। इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि हुमायूं कबीर ने कुछ ऐसा कह दिया, जिसे लेकर बीजेपी (BJP) आगबबूला हो गई।
बीजेपी का पलटवार: "ये 90 का दौर नहीं है"
जैसे ही टीएमसी की तरफ से तीखी बयानबाजी हुई, बीजेपी नेता चुप नहीं बैठे। खास तौर पर बंगाल में बीजेपी का चेहरा माने जाने वाले नेताओं ने हुमायूं कबीर को सीधी चेतावनी दे दी। मामला बाबरी मस्जिद विवाद से जुड़ा है। बीजेपी की तरफ से साफ कहा गया कि अगर आप इतिहास कुरेदेंगे, तो जवाब भी इतिहास से ही मिलेगा।
बीजेपी के एक कद्दावर नेता ने हुमायूं कबीर को याद दिलाया कि उन्हें संभलकर बोलना चाहिए। उनका कहना था कि धार्मिक भावनाओं को भड़काकर अगर वे अपनी रोटियां सेकना चाहते हैं, तो उन्हें 6 दिसंबर की तारीख और उससे जुड़े इतिहास को नहीं भूलना चाहिए। यह सीधा इशारा था कि ईंट का जवाब पत्थर से दिया जाएगा।
आम जनता क्या सोच रही है?
देखिए, समझने वाली बात यह है कि बंगाल में माहौल को हमेशा चुनावों के इर्द-गिर्द बुना जाता है। हुमायूं कबीर भरसक कोशिश कर रहे हैं कि वे एक खास समुदाय के मसीहा बनें, वहीं बीजेपी भी अपने समर्थकों को यह संदेश देना चाहती है कि वे किसी की धमकियों से डरने वाले नहीं हैं।
राजनीति में यह 'एक्शन और रिएक्शन' का खेल चलता रहेगा, लेकिन इसके बीच आम बंगाली वोटर फिर से वही सवाल पूछ रहा है— विकास की बात कब होगी? बाबरी मस्जिद के मुद्दे को बंगाल लाकर किसे फायदा होगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि आने वाले दिनों में यह जुबानी जंग और तीखी होने वाली है।
बीजेपी ने तो साफ़ कर दिया है कि अगर टीएमसी नेता लक्ष्मण रेखा पार करेंगे, तो उन्हें उसी भाषा में जवाब मिलेगा। अब देखना यह है कि ममता बनर्जी अपनी पार्टी के नेताओं पर लगाम लगाती हैं या फिर यह मुद्दा चुनाव का केंद्र बन जाएगा।