यूपी में सियासी हलचल तेज सीएम योगी और संघ की बैठक का क्या है मतलब? जानिए अंदर की बात
News India Live, Digital Desk : उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों ठंड तो बढ़ रही है, लेकिन सियासी पारा काफी चढ़ा हुआ है। लखनऊ के गलियारों में बस एक ही सवाल गूंज रहा है "आखिर बीजेपी का अगला प्रदेश अध्यक्ष कौन होगा?" इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए बैठकों का दौर जारी है, और हाल ही में एक ऐसी ही महत्वपूर्ण मुलाकात हुई जिसने अटकलों को हवा दे दी है।
खबर है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के बड़े पदाधिकारियों के साथ एक अहम बैठक की है। आइए, आसान भाषा में समझते हैं कि इस बैठक के मायने क्या हैं और यूपी की राजनीति किस करवट बैठने वाली है।
योगी और संघ का मिलना क्यों है खास?
हम सभी जानते हैं कि बीजेपी में कोई भी बड़ा फैसला संघ (RSS) की राय के बिना अधूरा माना जाता है। खासकर जब बात यूपी जैसे बड़े राज्य की हो, जहाँ से दिल्ली की गद्दी का रास्ता निकलता है। वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी का कार्यकाल पूरा हो चुका है और चर्चा है कि लोकसभा चुनाव के नतीजों को देखते हुए पार्टी अब संगठन में बदलाव के मूड में है।
ऐसे माहौल में सीएम योगी का संघ के पदाधिकारियों से मिलना यह साफ इशारा करता है कि "तलाश" अब अपने अंतिम चरण में है। इस बैठक को 'समन्वय' यानी तालमेल बिठाने की कोशिश माना जा रहा है। मतलब, सरकार और संगठन दोनों की पसंद का ध्यान रखा जाएगा।
क्या चर्चा हुई होगी अंदर?
हालांकि, कमरे के अंदर क्या बात हुई यह तो बाहर नहीं आता, लेकिन सियासी पंडितों का मानना है कि दो मुद्दों पर सबसे ज्यादा माथापच्ची हुई होगी:
- जातीय समीकरण (Caste Equations): बीजेपी पिछड़ों (OBC), दलितों और सवर्णों के बीच संतुलन बनाना चाहती है। चूंकि सीएम योगी खुद क्षत्रिय समाज से आते हैं, तो माना जा रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी किसी ओबीसी (जैसे मौर्य, पटेल या निषाद समाज) या फिर किसी ब्राह्मण चेहरे को दी जा सकती है।
- मिशन 2027: अगला विधानसभा चुनाव जीतना पार्टी के लिए नाक का सवाल है। इसलिए, किसी ऐसे नेता को कमान सौंपने की तैयारी है जो कार्यकर्ताओं में जोश भर सके और जिसकी पकड़ जमीन पर मजबूत हो।
किसका नाम है रेस में?
नाम तो कई चल रहे हैं। चर्चाओं का बाजार गर्म है। कभी किसी मंत्री का नाम उछाला जाता है तो कभी किसी सांसद का। लेकिन बीजेपी अक्सर अपने फैसलों से सबको चौंकाती है। हो सकता है कोई ऐसा चेहरा सामने आ जाए, जिसके बारे में मीडिया ने सोचा भी न हो। लेकिन एक बात तय है जो भी नया अध्यक्ष बनेगा, उस पर सीएम योगी की सहमति की मुहर जरूर होगी।
कार्यकर्ताओं को क्या उम्मीद है?
बीजेपी का आम कार्यकर्ता बस यही चाहता है कि जो भी 'कप्तान' बनकर आए, वो उनकी बात सुने। पिछले कुछ समय से 'सरकार बनाम संगठन' की दबी जुबान में चर्चाएं थीं। यह बैठक शायद उसी गैप को भरने की कोशिश है।