Political Controversy : दिल्ली में गूंजी मुजफ्फरनगर की टशन ,संजीव बालियान और राजीव प्रताप रूडी के बीच छिड़ी सीधी जंग

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News India Live, Digital Desk: Political Controversy : राजनीति में दोस्ती और दुश्मनी कब बदल जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। ऐसा ही एक नज़ारा इन दिनों दिल्ली के सियासी गलियारों में देखने को मिल रहा है, जहाँ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के ही दो बड़े और दिग्गज नेता एक-दूसरे के खिलाफ़ खुलेआम तलवारें खींचकर खड़े हो गए हैं। ये नेता हैं फायरब्रांड छवि वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री और मुजफ्फरनगर से सांसद डॉ. संजीव बालियान और बिहार से बीजेपी के वरिष्ठ सांसद राजीव प्रताप रूडी

मामला इतना बिगड़ गया है कि दोनों के बीच अब बात सिर्फ ज़ुबानी जंग तक सीमित नहीं रही, बल्कि खुलेआम एक-दूसरे को देख लेने की धमकियाँ भी दी जाने लगी हैं।

आख़िर किस बात पर हुई यह 'महाभारत'?

इस पूरे घमासान की जड़ में है दिल्ली का प्रतिष्ठित 'कॉन्स्टीट्यूशन क्लब' (Constitution Club)। यह क्लब देश भर के मौजूदा और पूर्व सांसदों का एक अहम अड्डा माना जाता है, जहाँ नेता अक्सर मिलते-जुलते हैं और चर्चा करते हैं। हाल ही में इस क्लब के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव होने वाले हैं, और यहीं से सारा विवाद शुरू हुआ।

दरअसल, संजीव बालियान भी इस चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए अपनी दावेदारी पेश करना चाहते थे, लेकिन आरोप है कि राजीव प्रताप रूडी और उनके गुट ने कुछ ऐसा किया जिससे बालियान चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा ही नहीं ले पाए।

बालियान का फूटा गुस्सा, बोले- "ईंट का जवाब पत्थर से देंगे"

इस घटना के बाद डॉ. संजीव बालियान का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के सीधे-सीधे राजीव प्रताप रूडी पर हमला बोल दिया। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, "मैं यहाँ आज मौजूद सांसदों को यह बताने आया हूँ कि कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में क्या चल रहा है। मैं उन्हें आगाह करना चाहता हूँ... अगर हम पर एक ईंट फेंकी जाएगी, तो हम उसका जवाब पत्थर से देंगे।"

बालियान यहीं नहीं रुके, उन्होंने आगे कहा, "इसका नतीजा बहुत गंभीर हो सकता है। उन्हें समझ लेना चाहिए कि हम चुप बैठने वालों में से नहीं हैं।"

संजीव बालियान के इस आक्रामक रुख ने बीजेपी के अंदर की राजनीति को गरमा दिया है। एक ही पार्टी के दो वरिष्ठ नेताओं का इस तरह सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे के खिलाफ़ मोर्चा खोलना यह दिखाता है कि इस क्लब के चुनाव का महत्व कितना ज़्यादा है। अब देखना यह होगा कि पार्टी हाईकमान इस मामले में कोई हस्तक्षेप करता है या फिर यह सियासी 'जंग' और आगे बढ़ती है।