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March 16 2026 02:52 am

दिल्ली की हवा में 'ज़हर' बरकरार, नहीं मिली राहत! AQI 'बहुत खराब' श्रेणी में, इस हफ्ते 'गंभीर' होने का खतरा

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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और एनसीआर के लोगों को जहरीली हवा से फिलहाल कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है। सोमवार की सुबह भी दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 'बहुत खराब' श्रेणी में बना रहा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, सुबह 6 बजे दिल्ली का औसत AQI 324 दर्ज किया गया।

हवा की रफ्तार बेहद धीमी होने के कारण प्रदूषक तत्व वायुमंडल में ही फंसे हुए हैं, जिससे स्थिति लगातार बिगड़ रही है। रविवार को भी दिल्ली का औसत AQI 366 था और तीन निगरानी केंद्रों पर तो यह 400 के पार यानी 'गंभीर' श्रेणी में पहुंच गया था।

दिल्ली-NCR के ये इलाके सबसे ज्यादा प्रदूषित

सोमवार को भी दिल्ली के 39 में से ज्यादातर स्टेशनों पर AQI 300 से ऊपर रहा। वजीरपुर और नरेला जैसे इलाके 'गंभीर' श्रेणी के बेहद करीब हैं।

  • वजीरपुर: 389
  • नरेला: 386
  • बुराड़ी क्रॉसिंग: 384
  • आनंद विहार: 371
  • बवाना: 371
  • रोहिणी: 363

एनसीआर के शहरों का भी हाल बेहाल है। गाजियाबाद का AQI 334, नोएडा का 311 और गुरुग्राम का 304 दर्ज किया गया, जो 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है।

क्यों घुट रहा है दिल्ली का दम?

वायु गुणवत्ता प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (AQEWS) के अनुसार, प्रदूषण में इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह हवा की धीमी रफ्तार है।

स्काईमेट वेदर के विशेषज्ञ महेश पालावत ने बताया कि रविवार शाम को हवा की गति 8 किलोमीटर प्रति घंटे से भी कम हो गई, जिससे प्रदूषक एक ही जगह पर जमा हो गए और हवा जहरीली हो गई। उन्होंने यह भी बताया कि दिन के समय हवा की दिशा पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी हो जाती है, जो पंजाब और हरियाणा से पराली के धुएं को सीधे दिल्ली तक लाने के लिए अनुकूल है।

CPCB के अनुसार, रविवार शाम को हवा में PM 2.5 का स्तर 189.6 और PM 10 का स्तर 316 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था, जो सुरक्षित सीमा से कई गुना ज्यादा है।

चेतावनी: इस हफ्ते 'गंभीर' हो सकती है हवा

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह हफ्ता दिल्ली वालों के लिए और भी मुश्किल भरा हो सकता है। AQEWS की भविष्यवाणी है कि 4 नवंबर तक हवा 'बहुत खराब' श्रेणी में ही रहेगी, लेकिन इसी हफ्ते इसके 'गंभीर' (AQI 400+) स्तर को छूने की भी प्रबल आशंका है।

बढ़ते प्रदूषण से बच्चों, बुजुर्गों और फेफड़ों या हृदय रोग से पीड़ित लोगों को सांस लेने में गंभीर समस्या हो सकती है।