POCSO Case : जेल में सुधरा कैदी, लिखे 50 निबंध, हाई कोर्ट ने अच्छे आचरण पर कम कर दी सजा
News India Live, Digital Desk: दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में एक पॉक्सो (POCSO) मामले में सजा काट रहे अपराधी की सजा को कम करते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने दोषी द्वारा जेल के भीतर किए गए सुधारों, उसके द्वारा लिखे गए निबंधों और शैक्षणिक प्रगति को आधार मानते हुए उसकी शेष सजा में कटौती की है।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला साल 2017 का है, जहाँ एक व्यक्ति को नाबालिग के साथ छेड़छाड़ और यौन शोषण के आरोप में दोषी ठहराया गया था। निचली अदालत ने उसे कठोर सजा सुनाई थी। दोषी ने इस फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहाँ उसने अपनी सजा कम करने की गुहार लगाई।
सुधार की राह: 50 निबंध और शैक्षिक प्रमाण पत्र
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि दोषी ने जेल में बिताए समय का उपयोग खुद को सुधारने में किया। जेल प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार:
कैदी ने जेल की लाइब्रेरी में बैठकर 50 से अधिक प्रेरक और सामाजिक विषयों पर निबंध लिखे।
उसने जेल के भीतर चलने वाले शैक्षिक पाठ्यक्रमों में भाग लिया और प्रमाण पत्र हासिल किए।
जेल अधिकारियों ने उसके व्यवहार और आचरण को 'उत्कृष्ट' (Excellent) बताया।
हाईकोर्ट की टिप्पणी: 'सुधार का मौका मिलना चाहिए'
न्यायमूर्ति ने कहा कि कानून का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि व्यक्ति को समाज में वापस लौटने के लिए सुधारना भी है। कोर्ट ने पाया कि दोषी पहले ही काफी समय जेल में बिता चुका है और उसके सुधरने के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं। इसी आधार पर उसकी सजा को कम कर दिया गया, ताकि वह समाज की मुख्यधारा में लौट सके।