Phulera Dooj 2026 : कब है अबूझ मुहूर्त वाली फुलेरा दूज? श्रीकृष्ण को ऐसे लगाएं गुलाल, बरसेगा राधा रानी का प्यार

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News India Live, Digital Desk: साल 2026 में 19 फरवरी को फुलेरा दूज का त्योहार मनाया जाएगा। फाल्गुन शुक्ल पक्ष की द्वितीया को आने वाला यह दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने राधा रानी और गोपियों के साथ फूलों की होली खेलकर होली के उत्सव की शुरुआत की थी।

फुलेरा दूज को क्यों कहते हैं 'अबूझ मुहूर्त'?

ज्योतिष शास्त्र में फुलेरा दूज को 'स्वयंसिद्ध मुहूर्त' माना गया है। इसका मतलब है कि इस दिन कोई भी शुभ काम करने के लिए आपको पंडित जी से पंचांग या मुहूर्त निकलवाने की जरूरत नहीं होती।

शादी-ब्याह: जिन लोगों के विवाह के मुहूर्त नहीं निकल रहे होते, वे इस दिन बिना किसी बाधा के फेरे ले सकते हैं।

नया व्यापार: नए शोरूम, दुकान या गृह प्रवेश के लिए यह साल का सबसे श्रेष्ठ दिन माना जाता है।

पूजा विधि: ऐसे प्रसन्न होंगे कान्हा और राधा

सुबह का संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ कपड़े पहनें।

फूलों का श्रृंगार: मंदिर में राधा-कृष्ण की मूर्ति को रंग-बिरंगे फूलों से सजाएं। इस दिन उन्हें 'गुलाल' लगाना न भूलें।

विशेष भोग: कान्हा को माखन-मिश्री और पोहे का भोग लगाएं। इसके अलावा मालपुए का भोग भी अति शुभ माना जाता है।

प्रेम का प्रतीक: घर के मुख्य द्वार पर रंगोली बनाएं और फूलों की माला लटकाएं।

भूलकर भी न करें ये गलतियाँ (सावधानियाँ)

फुलेरा दूज जितना शुभ है, कुछ बातों का ध्यान रखना उतना ही जरूरी है:

तामसिक भोजन: इस दिन घर में लहसुन, प्याज या मांस-मदिरा का सेवन बिल्कुल न करें।

कलह से बचें: चूंकि यह प्रेम का त्योहार है, इसलिए घर में वाद-विवाद या किसी का अपमान करने से बचें।

बासी फूल: पूजा में कभी भी सूखे या बासी फूलों का प्रयोग न करें, हमेशा ताजे खिले हुए फूल ही चढ़ाएं।

वस्त्रों का चुनाव: पूजा के समय काले या गहरे नीले रंग के कपड़े पहनने से बचें, पीले या गुलाबी रंग के वस्त्र पहनना शुभ होता है।

क्यों खास है यह दिन?

फुलेरा दूज के दिन से ही मथुरा-वृंदावन के मंदिरों में फाग उत्सव की शुरुआत हो जाती है। यह त्योहार संदेश देता है कि जीवन में कितनी भी शुष्कता क्यों न हो, भक्ति और प्रेम के रंग उसे दोबारा महका सकते हैं।