BREAKING:
April 19 2026 01:33 am

राजस्थान में पेट्रोल-डीजल के दाम धड़ाम भजनलाल सरकार ने वैट में की बड़ी कटौती, जनता को मिली बड़ी राहत

Post

News India Live, Digital Desk: राजस्थान की भजनलाल सरकार ने प्रदेशवासियों को महंगाई के मोर्चे पर एक बड़ी खुशखबरी दी है। राज्य सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) में भारी कटौती का निर्णय लिया है। लंबे समय से पड़ोसी राज्यों की तुलना में राजस्थान में ईंधन की ऊंची कीमतों को लेकर उठ रही मांगों और विरोध प्रदर्शनों के बीच सरकार के इस कदम को एक 'मास्टरस्ट्रोक' के रूप में देखा जा रहा है। इस फैसले के लागू होते ही प्रदेश के विभिन्न शहरों में तेल की कीमतों में 1.40 रुपये से लेकर 5 रुपये तक की गिरावट दर्ज की गई है।

मुख्यमंत्री का बड़ा फैसला: वैट में 2% की कमी

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कैबिनेट की बैठक के बाद इस महत्वपूर्ण निर्णय की घोषणा की। सरकार ने पेट्रोल और डीजल दोनों पर वैट की दरों में 2 प्रतिशत की कमी कर दी है। इसके साथ ही, तेल डिपो (Oil Depot) से दूरी के आधार पर लगने वाले परिवहन खर्च (Freight) की विसंगतियों को भी दूर करने का प्रयास किया गया है। इसका सबसे बड़ा फायदा उन सीमावर्ती जिलों को होगा जहाँ तेल की कीमतें जयपुर या दिल्ली के मुकाबले काफी ज्यादा थीं। सरकार के इस फैसले से सरकारी खजाने पर करीब 1500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा, लेकिन जनता को सीधे तौर पर बड़ी राहत मिलेगी।

इन शहरों में सबसे ज्यादा सस्ता हुआ तेल

वैट में कटौती और माल ढुलाई के नियमों में बदलाव के बाद श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और जैसलमेर जैसे जिलों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में सबसे बड़ी गिरावट देखी गई है। श्रीगंगानगर, जो देश में सबसे महंगे पेट्रोल के लिए जाना जाता था, वहाँ अब कीमतें काफी हद तक नियंत्रण में आ गई हैं। राजधानी जयपुर में भी पेट्रोल और डीजल के दाम अब पड़ोसी राज्य हरियाणा और उत्तर प्रदेश के काफी करीब पहुँच गए हैं। इस फैसले से न केवल निजी वाहन चालकों को फायदा होगा, बल्कि माल ढुलाई सस्ती होने से आवश्यक वस्तुओं के दाम भी कम होने की उम्मीद है।

विपक्ष के हमले और जनता का रिएक्शन

चुनावों के दौरान बीजेपी ने राजस्थान की जनता से वादा किया था कि वे प्रदेश में ईंधन की दरों की समीक्षा करेंगे और इन्हें तर्कसंगत बनाएंगे। इस फैसले को उसी वादे की पूर्ति के रूप में देखा जा रहा है। दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने इसे 'देर से लिया गया फैसला' बताया है, लेकिन आम जनता और पेट्रोल पंप संचालकों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। पंप संचालकों का कहना है कि वैट कम होने से पड़ोसी राज्यों में जाने वाला कारोबार अब वापस राजस्थान के पंपों पर लौटेगा, जिससे राज्य के राजस्व में भी लंबी अवधि में सुधार होगा।