Rent देते हैं कैश में? सावधान! इनकम टैक्स का नोटिस सीधा आपके घर आ सकता है
क्या आप भी हर महीने अपने मकान मालिक के हाथ में कैश में किराया थमा देते हैं? अगर हाँ, तो यह छोटी-सी आदत आपको बड़ी मुसीबत में डाल सकती है। आज के डिजिटल जमाने में कैश में लेनदेन करना, खासकर किराए जैसी बड़ी रकम का, इनकम टैक्स विभाग की नजरों में आपको ला सकता है।
क्यों पड़ सकती है आप पर नज़र?
इनकम टैक्स विभाग हमेशा आपकी कमाई और आपके खर्चों पर नज़र रखता है। जब आप किराया कैश में देते हैं, तो उसका कोई डिजिटल रिकॉर्ड नहीं होता। मान लीजिए, आपकी सैलरी 5 लाख रुपये सालाना है और आप कागजों में कोई किराए का खर्च नहीं दिखाते, लेकिन हर महीने 20,000 रुपये किराया कैश में दे रहे हैं।
टैक्स विभाग को जब आपके बैंक खाते या अन्य तरीकों से पता चलता है कि आपके खर्च आपकी घोषित आय से ज़्यादा हैं, तो उन्हें शक होता है। उनके लिए यह एक 'रेड फ्लैग' है और वे आपसे पूछ सकते हैं कि इन खर्चों के लिए पैसा कहाँ से आया। यहीं से नोटिस का खेल शुरू होता है।
तो फिर कैसे बचें इस झंझट से? (सबसे आसान तरीका)
इसका समाधान बेहद आसान है- डिजिटल पेमेंट!
जब भी किराया दें, तो हमेशा UPI (Google Pay, PhonePe), बैंक ट्रांसफर (NEFT/IMPS) या चेक का इस्तेमाल करें।
फायदा क्या है?
जब आप ऑनलाइन पेमेंट करते हैं, तो आपकी बैंक स्टेटमेंट ही सबसे बड़ा और पक्का सबूत बन जाती है। कल को अगर इनकम टैक्स विभाग कोई सवाल करता भी है, तो आप आसानी से यह डिजिटल रिकॉर्ड दिखाकर साबित कर सकते हैं कि आपने वैध तरीके से किराया चुकाया है।
अगर नोटिस आ ही गया तो क्या करें?
सबसे पहले तो घबराएं नहीं। अगर आपने सही तरीके से किराया दिया है, तो आपको बस कुछ दस्तावेज तैयार रखने होंगे:
- रेंट एग्रीमेंट: यह सबसे जरूरी कागज है।
- पेमेंट का सबूत: अगर डिजिटल पेमेंट किया है तो बैंक स्टेटमेंट काफी है।
- मकान मालिक का पैन कार्ड: अगर आपका सालाना किराया 1 लाख रुपये से ज्यादा है, तो यह जरूरी हो जाता है।
50,000 से ज़्यादा किराए का बड़ा नियम
याद रखें, अगर आपके मकान का किराया हर महीने ₹50,000 से ज़्यादा है, तो आपको उस पर TDS (Tax Deducted at Source) काटना कानूनी रूप से अनिवार्य है। यह काम कैश पेमेंट में करना लगभग नामुमकिन है।
आखिरी सलाह: कैश को कहें NO, डिजिटल को कहें YES!
किराए का भुगतान कैश में करने से बचें। यह सिर्फ नोटिस से बचने का तरीका नहीं, बल्कि एक समझदार और जिम्मेदार नागरिक बनने की निशानी भी है। डिजिटल पेमेंट पारदर्शी होता है, सुरक्षित होता है और आपको भविष्य की किसी भी कानूनी परेशानी से बचाता है।