Pausha Putrada Ekadashi 2025 : साल के आखिरी दिनों में भगवान विष्णु देंगे संतान सुख का आशीर्वाद
News India Live, Digital Desk : जैसे-जैसे साल 2025 अपने अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे एक बहुत ही खास और चमत्कारिक दिन हमारे करीब आ रहा है। हम बात कर रहे हैं पौष पुत्रदा एकादशी (Pausha Putrada Ekadashi) की।
नाम से ही साफ़ है—'पुत्रदा' यानी पुत्र या संतान देने वाली। जिन कपल्स की गोद सूनी है, या जिन्हें अपनी संतान की तरक्की और लंबी उम्र की चिंता सताती रहती है, उनके लिए यह एकादशी किसी वरदान से कम नहीं है। और इस बार तो यह एकादशी ठीक नए साल के जश्न से पहले, यानी 30 दिसंबर 2025 (मंगलवार) को पड़ रही है। यानी 2026 में कदम रखने से पहले आप अपने बच्चों के लिए ढेर सारा आशीर्वाद समेट सकते हैं।
तो चलिए, आज बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि इस दिन आपको क्या करना चाहिए और वो कौन सी गलतियां हैं, जो भूलकर भी नहीं करनी चाहिए।
क्या है इसका महत्व? (Why is it so Special?)
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पौष माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी का सीधा संबंध संतान सुख से है। कहा जाता है कि इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करने से 'वाजपेय यज्ञ' के बराबर पुण्य मिलता है। अगर मेडिकल साइंस के चक्कर काटकर थक चुके हैं, तो एक बार श्रद्धा के साथ इस व्रत को ज़रूर आजमाएं।
महत्वपूर्ण तिथियां (Important Dates):
- एकादशी की तारीख: 30 दिसंबर 2025, मंगलवार
- पारण (व्रत खोलने का समय): 31 दिसंबर 2025 की सुबह (अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार समय जरूर देखें, क्योंकि हरि वासर खत्म होने के बाद ही व्रत खोला जाता है)।
पूजा के दौरान इन 3 गलतियों से बचें (Big Mistakes to Avoid)
अक्सर हम भक्ति में इतने डूब जाते हैं कि नियमों को अनदेखा कर देते हैं। एकादशी का फल तभी मिलता है जब आप ये गलतियां न करें:
- चावल को कहें 'ना':
यह तो हम सब जानते हैं, लेकिन फिर भी याद दिला दें—एकादशी के दिन चावल (Rice) खाना "महापाप" माना गया है। घर में इस दिन चावल न बनाएं, भले ही कोई व्रत न रख रहा हो। - तुलसी के पत्ते न तोड़ें:
भगवान विष्णु की पूजा बिना तुलसी के अधूरी है, लेकिन एकादशी के दिन तुलसी का पत्ता तोड़ना मना है। इसलिए पूजा के लिए पत्ते एक दिन पहले (यानी 29 दिसंबर को) ही तोड़कर रख लें। - गुस्सा और दिन में सोना:
अगर आप व्रत रख रहे हैं, तो अपने मन को शांत रखें। किसी पर चिल्लाना या दोपहर में सो जाना व्रत के फल को नष्ट कर सकता है। "ओम नमो भगवते वासुदेवाय" का जाप करते रहें।
नि:संतान दंपतियों के लिए 'गोल्डन टिप'
अगर आप संतान प्राप्ति के लिए यह व्रत कर रहे हैं, तो पति और पत्नी दोनों साथ में व्रत रखें। पूजा के समय भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप को झूला झुलाएं और माखन-मिश्री का भोग लगाएं। मान्यता है कि ऐसा करने से जल्द ही घर में किलकारियां गूंजने लगती हैं।
तो, तैयार हो जाइए 30 दिसंबर के लिए।यह साल का अंत जरूर है, लेकिन आपकी खुशियों की नई शुरुआत हो सकती है। भगवान विष्णु आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी करें!