Paush Month 2025 : ठंड, तप और त्यौहार पौष का महीना आ रहा है, कहीं आप कोई गलती तो नहीं कर रहे?
News India Live, Digital Desk: साल बदल रहा है और इसी के साथ हिंदू कैलेंडर का दसवां और बेहद खास महीना यानी 'पौष मास' (Paush Maas) भी हमारे दरवाजे पर दस्तक दे रहा है। जैसे ही हम रजाई में दुबकने लगते हैं और कड़ाके की ठंड पड़ती है, आध्यात्मिक नज़रिए से सूरज की गर्मी का महत्व और भी बढ़ जाता है। यह महीना सिर्फ़ सर्दी का नहीं, बल्कि सूर्य देव की उपासना (Worship of Sun God) और अपने पूर्वजों को याद करने का होता है।
लेकिन, बड़े-बुज़ुर्ग कहते हैं न कि हर चीज़ का एक नियम होता है। इस महीने में भी कुछ काम ऐसे हैं जो आपको "राजा" बना सकते हैं और कुछ गलतियां ऐसी, जो बनी-बनाई बात बिगाड़ सकती हैं। आइए, बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि इस दौरान क्या करना चाहिए और किन चीजों से तौबा कर लेनी चाहिए।
1. मांगलिक कार्यों पर लगता है 'फुल स्टॉप'
आपने अक्सर सुना होगा कि "अरे, अभी शादी नहीं हो सकती, खरमास चल रहा है।" जी हाँ, पौष के महीने को ही खरमास (Kharmas) कहा जाता है। मान्यता है कि इस वक्त सूर्य देव का प्रभाव थोड़ा 'धीमा' हो जाता है। इसलिए, इस पूरे महीने में शादी, सगाई, मुंडन या नए घर में प्रवेश (गृह प्रवेश) जैसे शुभ काम नहीं किए जाते। यह समय शोर-शराबे का नहीं, बल्कि शांत मन से भक्ति करने का है।
2. खाने की थाली में बदलें ये चीज़ें
ठंड के मौसम में पार्टी करने का मन सबका करता है, लेकिन धर्मशास्त्र कहते हैं कि पौष के महीने में सात्विकता बहुत ज़रूरी है।
- क्या न खाएं: मांस, मदिरा (शराब) और तामसिक भोजन से पूरी तरह दूरी बना लें। यहाँ तक कि कई लोग इस महीने में बैंगन, मूली या उड़द की दाल खाने से भी बचते हैं।
- नमक का त्याग: अगर आपकी सेहत इजाज़त दे, तो कोशिश करें कि रविवार के दिन नमक न खाएं। माना जाता है कि इससे सूर्य मजबूत होते हैं और मान-सम्मान बढ़ता है।
- क्या खाएं: तिल और गुड़! यह न सिर्फ़ सेहत के लिए अच्छे हैं बल्कि इनका दान करना भी सोने पर सुहागा माना जाता है।
3. देर तक सोना पड़ेगा भारी
सर्दियों की सुबह रजाई छोड़ने का मन नहीं करता, है न? लेकिन पौष का महीना आलस त्यागने का है। इस महीने कोशिश करें कि सूर्योदय से पहले या उसके साथ ही उठ जाएं। उगते हुए सूरज को तांबे के लोटे से जल (अर्घ्य) चढ़ाना इस महीने का सबसे बड़ा 'एंटीबायोटिक' है—यह आपकी किस्मत और सेहत दोनों को ठीक रखता है।
4. कड़वे बोल और गुस्सा
यह महीना 'पितरों' का भी माना जाता है, जिसे कई बार 'छोटा पितृ पक्ष' भी कहते हैं। इसलिए घर के बड़े-बुजुर्गों का अपमान करना, कड़वा बोलना या किसी गरीब को दुत्कारना आपको पाप का भागी बना सकता है। जितना हो सके मीठा बोलें और ज़रूरतमंदों को गर्म कपड़े दान करें।
सरल मंत्र:
इस महीने सिर्फ एक नियम बना लें—रोज सुबह 'ओम सूर्याय नम:' का जाप करें और लाल चंदन का तिलक लगाएं। यकीन मानिए, यह साधारण सी आदत आपके जीवन में गजब की सकारात्मक ऊर्जा भर देगी। तो इस पौष में रजाई में ही न पड़े रहें, थोड़ी भक्ति भी करें!