Palm Beach Airport: जब उड़ान भरने वाला था ट्रंप का एयरफोर्स वन, अचानक मंडराया खतरा आसमान में दागने पड़े फ्लेयर्स
News India Live, Digital Desk: अमेरिका के पाम बीच इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रविवार को उस समय भारी अफरा-तफरी मच गई, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वहां मौजूद रहने के दौरान सुरक्षा में बड़ी चूक की खबर सामने आई। ट्रंप का 'एयरफोर्स वन' विमान वाशिंगटन डीसी के लिए उड़ान भरने ही वाला था कि तभी एक नागरिक विमान (Civilian Plane) ने 'नो फ्लाई जोन' का उल्लंघन कर दिया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत मोर्चा संभाला और आसमान में F-16 लड़ाकू विमानों को तैनात कर दिया गया।
TFR का उल्लंघन और आसमान में फ्लेयर्स का इस्तेमाल
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दोपहर करीब 1 बजे के आसपास एक छोटे विमान ने टेंपररी फ्लाइट रेस्ट्रिक्शन (TFR) वाले प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश किया। जब इस विमान का एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से संपर्क नहीं हो पाया, तो सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत वायुसेना के विमानों ने उसे घेर लिया। पायलट का ध्यान खींचने और उससे संपर्क स्थापित करने के लिए आसमान में 'फ्लेयर्स' (Flares) छोड़े गए। बता दें कि फ्लेयर्स जलते हुए गोले होते हैं जो आसमान में ही खत्म हो जाते हैं और जमीन पर इनसे कोई नुकसान नहीं होता। बाद में संदिग्ध विमान को सुरक्षित रूप से वहां से दूर ले जाया गया।
सुरक्षित हैं डोनाल्ड ट्रंप, एयरपोर्ट पर सेवाएं बहाल
व्हाइट हाउस और सीक्रेट सर्विस ने स्पष्ट किया है कि इस पूरी घटना का राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप या उनके विमान पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। कुछ शुरुआती खबरों में ड्रोन देखे जाने के बाद 'ग्राउंड स्टॉप' की बात कही गई थी, लेकिन सुरक्षा अधिकारियों ने इसे खारिज कर दिया। सुरक्षा जांच के लिए हेलिकॉप्टरों के जरिए पूरे एयरस्पेस की निगरानी की गई। सीक्रेट सर्विस के प्रवक्ता के अनुसार, अब पाम बीच एयरपोर्ट पर विमानों का संचालन पूरी तरह सामान्य है और राष्ट्रपति सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य के लिए रवाना हो गए हैं।
इस्लामाबाद में 'शांति मंथन': क्या टल जाएगा खाड़ी का युद्ध?
एक तरफ अमेरिका में सुरक्षा अलर्ट था, तो दूसरी तरफ पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में रविवार को एक बेहद अहम चतुष्पक्षीय शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ। सऊदी अरब, मिस्र, तुर्की और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों ने बंद कमरे में पश्चिम एशिया (Middle East) के बिगड़ते हालातों पर चर्चा की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को कम करने का रास्ता खोजना है, जिसने वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल आपूर्ति को संकट में डाल दिया है।
चार देशों के दिग्गजों की गुप्त रणनीति
पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इसहाक डार के निमंत्रण पर सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान, तुर्की के हाकान फिदान और मिस्र के बद्र अब्देलत्ती इस्लामाबाद पहुंचे। अधिकारियों के मुताबिक, यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत में देरी हो रही है। हालांकि, बैठक के बाद कोई आधिकारिक साझा बयान जारी नहीं किया गया, लेकिन इसे क्षेत्र में 'व्यापक शांति' स्थापित करने की दिशा में एक बड़ी कूटनीतिक कोशिश माना जा रहा है।