बांग्लादेश में हाहाकार काजी नजरूल इस्लाम की कब्र के पास ही क्यों दफनाया जा रहा है 32 साल के उस्मान हादी को?
News India Live, Digital Desk: पड़ोसी देश बांग्लादेश एक बार फिर उबल रहा है, लेकिन इस बार वजह कोई राजनीतिक भाषण नहीं, बल्कि एक युवा नेता की दुखद मौत है।बांग्लादेश में लोग एक नाम लेकर सड़कों पर उतर आए हैं उस्मान हादी (Osman Hadi)। और सबसे बड़ी खबर यह है कि उन्हें वहां दफनाया जा रहा है जहाँ जगह पाना किसी आम इंसान के बस की बात नहीं।
जी हाँ, उस्मान हादी को बांग्लादेश के राष्ट्रीय कवि (National Poet) काजी नजरूल इस्लाम की कब्र के ठीक बगल में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। यह सम्मान अपने आप में बहुत बड़ा है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर 32 साल का यह लड़का कौन था और उसे इतनी बड़ी जगह क्यों दी जा रही है?
कौन थे उस्मान हादी?
उस्मान हादी को बांग्लादेश के 2024 के उस छात्र आंदोलन का चेहरा माना जाता है, जिसने शेख हसीना की मजबूत सरकार को हिलाकर रख दिया था। 'इंकलाब मंच' (Inqilab Moncho) के प्रवक्ता रहे उस्मान ने युवाओं में वो जोश भरा कि तख्त-ओ-ताज पलट गए।
अभी कुछ ही दिन पहले, 12 दिसंबर को, जब वो 2026 के आम चुनावों के लिए प्रचार कर रहे थे, ढाका में उन्हें दिनदहाड़े गोली मार दी गई। उन्हें बचाने की बहुत कोशिश हुई, इलाज के लिए सिंगापुर भी ले जाया गया, लेकिन 18 दिसंबर को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। उनकी मौत ने पूरे बांग्लादेश को झकझोर कर रख दिया है। वहां की जनता उन्हें एक नेता नहीं, बल्कि एक 'शहीद' मान रही है।
नजरूल इस्लाम के पास ही कब्र क्यों?
अब आते हैं सबसे बड़े सवाल पर। काजी नजरूल इस्लाम को 'विद्रोही कवि' (Rebel Poet) कहा जाता है। उन्होंने अपनी कलम से अन्याय के खिलाफ आग उगली थी। इत्तेफाक देखिए, उस्मान हादी ने भी अपनी आवाज से वही काम किया।
- परिवार की इच्छा: उस्मान हादी के परिवार ने सरकार और ढाका यूनिवर्सिटी प्रशासन से भावुक अपील की थी कि उनके बेटे को राष्ट्रीय कवि के पास जगह दी जाए।
- सम्मान का प्रतीक: सरकार और यूनिवर्सिटी ने इस अपील को मंजूर कर लिया। यह फैसला इसलिए भी खास है क्योंकि यह उस संदेश को गहरा करता है कि "एक बागी कवि के बगल में एक क्रांतिकारी युवा को ही जगह मिलनी चाहिए।"
- विरासत का मिलन: लोगों का मानना है कि काजी नजरूल इस्लाम ने जिस इंकलाब की बात कविताओं में की थी, उस्मान हादी ने उसे सड़कों पर सच कर दिखाया।
ढाका यूनिवर्सिटी के केंद्रीय मस्जिद परिसर में, जहाँ महान कवि सोए हैं, वहीं अब उस्मान हादी भी चिरनिद्रा में लीन होंगे। यह सिर्फ एक कब्र नहीं है, बल्कि बांग्लादेश के इतिहास का एक नया पन्ना है।
जहाँ एक तरफ उनकी मौत पर लोगों का गुस्सा भड़क रहा है, वहीं दूसरी तरफ यह सम्मान यह बताता है कि बांग्लादेश के लोगों के दिलों में उस्मान हादी ने कितनी गहरी जगह बना ली थी। एक युवा आवाज, जो समय से पहले खामोश तो हो गई, लेकिन उसका असर शायद कभी खत्म न हो।