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April 19 2026 06:38 am

Online Fraud : वाराणसी में चल रहा था अंग्रेजी' स्कैम, आधी रात में अमेरिकियों को फोन कर ऐसे लगाते थे चूना, 29 गिरफ्तार

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News India Live, Digital Desk: धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां रात के अंधेरे में एक स्कूल की बिल्डिंग से अमेरिकन नागरिकों को ठगने का अंतर्राष्ट्रीय खेल चल रहा था. वाराणसी पुलिस ने एक बड़े फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है, जो भोले-भाले अमेरिकियों को फोन कर उन्हें डराता और फिर उनसे लाखों रुपये ऐंठ लेता था. इस मामले में पुलिस ने 29 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से कई फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने वाले दूसरे राज्यों के युवा हैं.

स्कूल की बिल्डिंग में आधी रात को सजता था 'ठगी का बाजार'

यह पूरा गोरखधंधा वाराणसी के रोहनिया इलाके में अमरा चौराहे के पास एक पब्लिक स्कूल की बिल्डिंग से ऑपरेट हो रहा था. बाहर से देखने पर कोई सोच भी नहीं सकता था कि यहां रात में साइबर ठगी का इतना बड़ा नेटवर्क चलाया जा रहा है. पुलिस को खुफिया जानकारी मिली थी कि इस जगह से कोई संदिग्ध गतिविधि चल रही है. इसके बाद साइबर क्राइम टीम और रोहनिया पुलिस ने मिलकर जब बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात करीब 3 बजे छापा मारा, तो वहां का नजारा देखकर हैरान रह गई.

दर्जनों लड़के-लड़कियां हेडफोन लगाकर तेज आवाज में अंग्रेजी में बात कर रहे थे. पुलिस ने मौके से 29 लोगों को रंगे हाथों पकड़ा. इनके पास से बड़ी संख्या में लैपटॉप, कंप्यूटर, मोबाइल फोन और सर्वर बरामद किए गए हैं.

कैसे फंसाते थे अमेरिकी नागरिकों को?

इन शातिर ठगों का काम करने का तरीका बिल्कुल फिल्मी था. पुलिस की पूछताछ में जो खुलासा हुआ, वो बेहद चौंकाने वाला है:

  1. डेटा जुगाड़: यह गिरोह सबसे पहले डार्क वेब या दूसरे गलत तरीकों से अमेरिकी नागरिकों का पर्सनल डेटा (नाम, फोन नंबर) हासिल करता था
  2. फर्जी कॉल: इसके बाद, सिंगापुर जैसे विदेशी सर्वर का इस्तेमाल करके ये लोग अमेरिकी नागरिकों को एक ऑटोमेटेड (IVR) कॉल करते थे. यह कॉल ज्यादातर Amazon या Flipkart जैसी कंपनियों के नाम पर होती थी, जिसमें कहा जाता था कि "आपके नाम से एक महंगा सामान खरीदा गया है, कन्फर्म करने के लिए एक दबाएं.
  3. डर का खेल: जाहिर है, जब किसी ने सामान खरीदा ही नहीं, तो वह मना कर देता. यहीं से ठगों का असली खेल शुरू होता था. कॉल तुरंत एक एजेंट को ट्रांसफर हो जाती, जो पीड़ित को बताता कि आपके नाम से भेजे जा रहे पार्सल में ड्रग्स या चाइल्ड पोर्नोग्राफी जैसा अवैध सामान है, इसलिए यह मामला गंभीर है
  4. नकली पुलिस बनकर वसूली: पीड़ित के बुरी तरह घबरा जाने के बाद कॉल एक तीसरे शख्स को ट्रांसफर होती, जो खुद को पुलिस या किसी कानूनी अधिकारी बताकर बात करता. वह पीड़ित को कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर मामले को रफा-दफा करने के नाम पर पैसे की मांग करता. पैसे वसूलने के लिए ये लोग बिटकॉइन या वॉलमार्ट जैसे गिफ्ट कार्ड का इस्तेमाल करते थे, ताकि उन्हें आसानी से ट्रेस न किया जा सके.

इस गिरोह का मास्टरमाइंड पंजाब के मोहाली का रहने वाला कौशलेंद्र तिवारी बताया जा रहा है.अच्छी अंग्रेजी बोलने के लिए गिरोह में खास तौर पर नागालैंड और मेघालय जैसे पूर्वोत्तर राज्यों के युवाओं को नौकरी पर रखा गया था, ताकि अमेरिकी नागरिकों को उन पर कोई शक न हो. वाराणसी पुलिस इस बड़े नेटवर्क के बाकी तारों को खंगालने में जुट गई है और आईबी जैसी केंद्रीय एजेंसियों से भी मदद ले रही है.