आमलकी एकादशी पर भगवान विष्णु को लगाएं इन चीजों का भोग, बरसेगी असीम कृपा

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News India Live, Digital Desk: हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी (Amalaki Ekadashi) के नाम से जाना जाता है। इसे 'रंगभरी एकादशी' भी कहा जाता है। साल 2026 में यह पवित्र तिथि भगवान विष्णु और आंवले के वृक्ष की विशेष पूजा के लिए समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन श्रीहरि को उनकी प्रिय चीजों का भोग लगाने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

आइए जानते हैं आमलकी एकादशी पर भगवान विष्णु को किन चीजों का भोग (Bhog List) लगाना सबसे शुभ माना जाता है।

आमलकी एकादशी भोग लिस्ट (What to Offer)

भगवान विष्णु को सात्विक और प्रिय चीजें अर्पित करने से वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं। इस दिन की भोग लिस्ट में निम्नलिखित चीजें जरूर शामिल करें:

आंवले का फल (Amla): चूंकि इस एकादशी का नाम ही 'आमलकी' है, इसलिए इस दिन आंवले का भोग लगाना अनिवार्य है। आंवले को भगवान विष्णु का स्वरूप माना जाता है। आप ताजे आंवले या आंवले से बनी मिठाई (मुरब्बा) अर्पित कर सकते हैं।

तुलसी दल (Tulsi Leaves): भगवान विष्णु का कोई भी भोग तुलसी के बिना अधूरा है। चाहे आप फल चढ़ाएं या मिष्ठान, उसमें तुलसी का पत्ता जरूर रखें, तभी वे भोग स्वीकार करते हैं।

पीली मिठाइयां (Yellow Sweets): विष्णु जी को पीला रंग अत्यंत प्रिय है। आप उन्हें केसरिया खीर, बेसन के लड्डू या पीले पेड़े का भोग लगा सकते हैं।

पंजीरी और पंचामृत: धार्मिक अनुष्ठानों में पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का मिश्रण) और धनिया की पंजीरी का भोग लगाना बहुत शुभ फलदायी होता है।

ऋतु फल (Seasonal Fruits): केला, सेब या अन्य पीले फलों का भोग लगाएं।

आमलकी एकादशी 2026 तिथि और मुहूर्त

एकादशी तिथि प्रारंभ: 28 फरवरी 2026, शाम से

एकादशी तिथि समाप्त: 01 मार्च 2026, दोपहर तक

व्रत की तारीख: उदयातिथि के अनुसार 01 मार्च 2026 को व्रत रखना श्रेष्ठ रहेगा।

भोग लगाते समय रखें इन बातों का ध्यान

सात्विकता: भोग पूरी तरह शुद्ध और सात्विक होना चाहिए। इसमें प्याज या लहसुन का अंश बिल्कुल न हो।

बर्तन की शुद्धि: भगवान को भोग हमेशा सोने, चांदी, तांबे या पीतल के स्वच्छ बर्तनों में ही लगाएं।

भक्ति भाव: भोग अर्पण करते समय 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का निरंतर जाप करें।

महत्वपूर्ण टिप: आमलकी एकादशी के दिन केवल भगवान को भोग ही न लगाएं, बल्कि स्वयं भी आंवले के वृक्ष के नीचे बैठकर पूजन करें और संभव हो तो आंवले का दान भी करें।